कब आएंगे अच्छे दिन?

इंतजार आखिर कब तक?
कब आएंगे अच्छे दिन?
कब आएंगे, कब जाएंगे?
अपने भी दिन मौज में।
इंतजार आखिर कब तक?
बीतीं घड़ियां, दिन बीता
इंतजार में पल बीता।
मास, तिमास, षटमास गया
आज, अभी में कल बीता।
इंतजार आखिर कब तक?
बरस हुए, बरसात हुई
दिन थे, फिर से रात हुई
किए थे वादे कितने सारे
फिर-फिर से कहां बात हुई।
इंतजार आखिर कब तक?
भूल गए वे हम न भूले
याद अभी भी आता है
उनकी प्यारी-प्यारी बातें
छाती चौड़ी कर जाता है।
इंतजार आखिर कब तक?
पर यह महज छलावा था
या अनिल-अनिल का लावा था
किसे पता, वे यूं भी होंगे
छले गए, हम छले गए
इंतजार आखिर कब तक?
पुन: पर्व की आहट है
अवसर की फिर चाहत है
जुम-जुम, जुमला फेंकनेवालों
मन जुमले से आहत है।
इंतजार आखिर कब तक?
-विद्यासागर यादव, सानपाड़ा, नई मुंबई