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कभी खुद को प्रमोट करना नहीं आया!-कल्पना अय्यर

फिल्म ‘प्यारा दुश्मन’ का ‘हरि ओम हरि…’ गीत हो या फिल्म ‘लूटमार’ का ‘जब छाए मेरा जादू…’ या फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ का ‘परदेसी परदेसी जाना नहीं…’ इन सभी गीतों में अपनी यादगार परफॉर्मेंस देनेवाली कल्पना अय्यर को सिनेमाप्रेमी कभी नहीं भुला सकते। सौ-सवा सौ फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेर चुकीं कल्पना ‘मिस इंडिया’ रनर अप और ‘मिस वर्ल्ड’ की टॉप फाइनलिस्ट रह चुकी हैं। कल्पना आजकल दुबई में शांतिपूर्ण जीवन बिता रही हैं। पेश है कल्पना अय्यर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश।

बॉलीवुड छोड़कर आप दुबई कब और वैâसे शिफ्ट हुईं?
बॉलीवुड से मुझे कभी गिला-शिकवा नहीं रहा। इसे मैं महज एक इत्तफाक या संजोग कहूं कि निर्माता राज एन. सिप्पी की पत्नी ने मुझसे कहा कि उनके एक करीबी रिश्तेदार का होटल दुबई में है। वे एक मैनेजर नियुक्त करना चाहते हैं। मैनेजर का ऑफर मुझे अच्छा लगा तब मैंने अपनी मां और बहनों से बात की कि पता नहीं बॉलीवुड में मुझे और कितने सालों तक काम मिलेगा। उन्होंने मुझे समझाया कि अगर स्वाभिमान पूर्ण जिंदगी जीना है तो ये ऑफर मुझे स्वीकार कर लेना चाहिए। मैं एक नामी होटल में रेस्टॉरेंट मैनेजर बन गई और अपने परिवार सहित दुबई में सेटल हो गई।

क्या आज भी आप उसी होटल में मैनेजर हैं?
मेरे जीवन में मेरी बहन, उसका परिवार और मेरी मां मेरी बैकबोन हैं। इनके प्यार, संबल और धीरज ने मुझे हमेशा आधार दिया। फ्लोअर मैनेजर का काम करते हुए मुझे १८ वर्ष बीत चुके। रेस्टॉरेंट के बंद हो जाने से मेरी जॉब चली गई। सोशल मीडिया पर मैंने अपनी ख्वाहिश जताई कि मैं इंडिया लौटना चाहती हूं। अगर मेरे लायक फिल्म, टीवी, वेब सीरीज, शॉर्ट फिल्म में पॉजिटिव, निगेटिव, सपोर्टिंग रोल है तो मैं उसे करना चाहूंगी। मुझे पूरी उम्मीद है की अभिनय में फिर से मेरी वापसी जरूर होगी। मैं आशा करती हूं कि आनेवाले समय में मुझे फिल्म इंडस्ट्री में काम मिल जाएगा।

आप फिल्मों में कैसे आईं?
मैं एक मध्यमवर्गीय तमिल ब्राह्मण परिवार से हूं। मेरे परिवार का दूर-दूर तक फिल्मों से कोई रिश्ता नहीं था। हम सभी प्यार-मोहब्बत से रहते थे। कॉलेज के दिनों में ही मेरे लुक्स की बहुत तारीफ हुआ करती थी, कॉलेज की तरफ से ‘फेमिना मिस इंडिया’ में भाग लिया और मैं फर्स्ट रनर अप घोषित हुई। ‘मिस वर्ल्ड’ के प्लेटफार्म पर भी मैं फर्स्ट फाइनलिस्ट की लिस्ट में थी। मेरे जैसी सामान्य परिवार की युवती जिसे किसी की गाइडेंस नहीं थी, उसके लिए ये भी बड़ी सफलता ही थी। यही था मेरे लिए फिल्मों के दरवाजे खुल जाना। ‘राजश्री प्रोडक्शंस’ की फिल्म ‘मनोकामना’ में मुझे लीड एक्ट्रेस का किरदार मिला। इस फिल्म में मेरी बहुत तारीफ हुई। इसके तुरंत बाद देव आनंद की फिल्म ‘लूटमार’ का गाना ‘जब छाए मेरा जादू…’ हिट हो गया और मेरे पास डांस और गाने का अंबार लग गया।

हीरोइन बनने के बावजूद आपने वैंप, डांसर और अन्य दूसरे किरदार क्यों निभाए?
इस बात का मुझे कोई मलाल नहीं कि मैंने डांसर, को-स्टार और वैंप के रोल भी किए। मुझे इस बात की संतुष्टि है कि मैंने जो भी किरदार निभाया वो यादगार थे। इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि मुझे हीरोइन के रोल मिलते। उन दिनों मुझे गाइड करनेवाला कोई नहीं था। मेरी मां और बहन मेरा काम देखती थीं। आज मैं सोचती हूं कि अगर मैंने अपना काम देखने के लिए किसी मैनेजर या सेक्रेटरी को नियुक्त किया होता तो मेरा करियर और निखरता।

कितनी सच्चाई है इन बातों में कि आपके अमजद खान से करीबी ताल्लुकात थे?
आज अमजद खान इस दुनिया में नहीं हैं इसलिए उनके बारे में कुछ भी कहना गलत होगा। तीन दशक के बाद कुछ कहना गड़े मुर्दे उखाड़नेवाली बात होगी। अमजद खान से मेरी मित्रता थी इससे मैं इंकार नहीं करती। जब दो कलाकार साथ काम करते हैं तो उनमें एक स्नेह का रिश्ता अपने आप बन जाता है। बिना शादी किए भी मैं अपनी जिंदगी में खुश हूं।