कमजोरी

टीम इंडिया को विश्वकप जीतना है तो अपनी विराट कमजोरी को दूर कर ले अन्यथा ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज जीतकर संकेत दे दिए हैं कि टीम इंडिया में जीतने का अभाव है, उसे हराया जा सकता है। टीम इंडिया को पांचवें वनडे में ३५ रनों से मात देकर कंगारुओं ने सीरीज पर कब्जा किया और कमजोरी जगजाहिर कर दी। सबसे बड़ी समस्या है, नंबर-४ पर कौन खेलेगा? इसके प्रयोग में पहले तीन मैच में अंबाती रायडू के नाकाम रहने के बाद चौथे मैच में विराट कोहली इस नंबर पर उतरे। इसके बाद पांचवें नंबर पर ऋषभ पंत को मौका मिला। न तो रायडू और न ही विराट या पंत नंबर-४ पर कोई कमाल दिखा सके। पांच मैचों में इस नंबर पर सर्वोच्च स्कोर २० रहा, जो विराट ने बनाया। जाहिर है, यह गुत्थी अनसुलझी है इसलिए धोनी को इस नंबर पर उतारना ही सफलता देगा। दूसरी ओर स्पिनर टीम की ताकत रहे हैं। कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल ने पिछले दो साल में बेहतरीन प्रदर्शन किया है लेकिन इन दो स्पिनरों के बीच ऑस्ट्रेलिया के लेग स्पिनर एडम जंपा सीरीज में ११ विकेट झटक ले गए। वे सीरीज के सबसे सफल स्पिनर रहे। युजवेंद्र चहल ने चौथे वनडे में ८० रन लुटाए तो कुलदीप ने पांचवें वनडे में ७० रन खर्च कर दिए। इनकी नाकामी भी हिंदुस्थान की हार की बड़ी वजह रही। इस पर मेहनत की जानी चाहिए। तीसरा ओपनिंग पार्टनरशिप भी चिंता का विषय रोहित शर्मा और शिखर धवन मौजूदा समय की सबसे बेहतरीन ओपनिंग जोड़ी है। ये दोनों ही बल्लेबाज अपने दम पर मैच जिताते रहे हैं लेकिन इस सीरीज में सिर्फ चौथे वनडे में ही ये दोनों टीम को अच्छी शुरुआत दे सके। इस मैच में इन दोनों ने १९३ रनों की साझेदारी की जबकि पहले तीन मैचों में टीम इंडिया का पहला विकेट क्रमश: ४, ० और ११ रन पर गिरा। पांचवें मैच में हिंदुस्थान ने पहला विकेट १५ के स्कोर पर गंवाया। अच्छी शुरुआत नहीं मिल पाने से मिडिल ऑर्डर पर दबाव पड़ता रहा और वह लड़खड़ाता रहा। चौथे कोई मानें या न मानें कप्तान कोहली की कप्तानी धारदार नहीं हो पाई। धोनी का मैदान में होना जरूरी है। विराट को धोनी की जरूरत होगी यदि जीतना है तो।