" /> कमलनाथ की आज अग्निपरीक्षा!

कमलनाथ की आज अग्निपरीक्षा!

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर एनपी प्रजापति को फ्लोर टेस्ट के लिए आज यानी शनिवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया शाम ५ बजे तक पूरी करने को कहा है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने पूरी प्रक्रिया की लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने कहा कि बहुमत का पैâसला विधायकों के हाथ उठवाकर कराया जाए। कोर्ट ने आदेश दिया कि शनिवार को विधानसभा की कार्यवाही का एकमात्र एजेंडा बहुमत परीक्षण कराना ही हो, वहीं बेंच में शामिल जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि अगर बागी विधायक विधानसभा आना चाहें तो कर्नाटक और मध्य प्रदेश के डीजीपी उन्हें सुरक्षा दें। कोर्ट ने विधानसभा के प्रमुख सचिव को जरूरी इंतजाम करने के आदेश दिए।
इससे पहले भाजपा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लगातार दूसरे दिन सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने स्पीकर एनपी प्रजापति से पूछा कि क्या वे वीडियो लिंक के जरिए बागी विधायकों से बात कर सकते हैं और फिर उनके बारे में पैâसला कर सकते हैं? इस पर स्पीकर की तरफ से पेश वकील अभिषेक सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नहीं, ऐसा संभव नहीं है। स्पीकर को मिले विशेषाधिकार को सुप्रीम कोर्ट भी नहीं हटा सकता। स्पीकर ने १६ बागी विधायकों के इस्तीफों पर पैâसला लेने के लिए दो हफ्ते का वक्त मांगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि इतना समय देना सोने की खदान जैसा होगा, इससे हॉर्स ट्रेडिंग बढ़ेगी। बेंच ने सभी पक्षों से पूछा कि क्या विधायकों के इस्तीफे या उन्हें अयोग्य करार देने के स्पीकर के किसी भी पैâसले से फ्लोर टेस्ट पर असर पड़ेगा? संवैधानिक सिद्धातों पर गौर करें तो विधायकों के इस्तीफे या उनकी अयोग्यता का मुद्दा स्पीकर के सामने लंबित रहने से ट्रस्ट वोट पर कोई रोक नहीं लगती। इसलिए कोर्ट को दूसरे पहलू की तरफ देखना होगा कि क्या राज्यपाल ने उन्हें मिली शक्तियों से परे जाकर कोई कदम उठाया है? अगर विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा है और इस बीच अगर सरकार बहुमत खो देती है तो राज्यपाल के पास स्पीकर को विश्वास मत परीक्षण कराने का निर्देश देने का अधिकार है। इस पर स्पीकर ने कहा कि राज्यपाल यह तय नहीं कर सकते कि सरकार के पास बहुमत है या नहीं। यह सदन तय करता है। राज्यपाल को तीन ही अधिकार हैं कि सदन का सत्र बुलाएं, सत्र को निलंबित करें या सदन को भंग कर दें। राज्यपाल लालजी टंडन की ओर से पेश वकील ने बेंच से कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ एकतरफ बैठे हैं और स्पीकर कोर्ट में राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं। बता दें कि जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच में कांग्रेस के वकील दुष्यंत दवे, भाजपा के वकील मुकुल रोहतगी, राज्यपाल के वकील तुषार मेहता, स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी और बागी विधायकों के वकील मनिंदर सिंह ने पैरवी की।

सरकार के पास है बहुमत क्यों कराएं फ्लोर टेस्ट?
सीएम कमलनाथ का सवाल
मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने फिर कहा है कि सरकार के पास बहुमत है। ऐसे हालात में हम फ्लोर टेस्ट क्यों कराएं? उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे तो सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जो आदेश देगा हम उसका पालन करेंगे। मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच सीएम कमलनाथ ने फिर दोहराया कि हमारी सरकार बहुमत में हैं। भाजपा द्वारा फ्लोर टेस्ट की मांग पर कमलनाथ ने कहा कि नई सरकार का फ्लोर टेस्ट होता है। हम सदन में कई बार बहुमत साबित कर चुके हैं। इसलिए हम फ्लोर टेस्ट क्यों कराएं? अगर भाजपा को लगता है कि हम अल्पमत में हैं तो वो सदन में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए। सीएम ने साथ ही ये भी कहा कि आगे सुप्रीम कोर्ट हमें जो आदेश देगा हम उसका पालन करेंगे। सीएम कमलनाथ ने सवाल उठाया कि कांग्रेस के विधायकों को कर्नाटक क्यों लेकर गए? उन्हें क्यों किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा? सीएम ने कहा कि उनमें से कई विधायक हमारे संपर्क में हैं। विधायक भोपाल आकर अपनी बात रखें।

वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग पर सुझाव
सुप्रीम कोर्ट की बेंच का सुझाव था कि हम बंगलुरु या कहीं और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर सकते हैं ताकि बागी विधायक वीडियो कॉन्प्रâेंसिंग के जरिए स्पीकर से बात कर सकें। स्पीकर ने इस सुझाव को ठुकरा दिया। बेंच ने स्पीकर से पूछा कि बागी विधायकों के इस्तीफे के मामले में क्या कोई जांच हुई है और क्या इस पर कोई पैâसला किया गया है? इस पर स्पीकर की ओर से पेश वकील सिंघवी ने कहा कि जब कोर्ट स्पीकर को तय वक्त के अंदर कुछ कदम उठाने के निर्देश देने लग जाएं तो इससे संवैधानिक दिक्कतें पैदा होंगी।

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