" /> कलवा-मुंब्रा-शील-दिवा का निजीकरण हट गई महावितरण!

कलवा-मुंब्रा-शील-दिवा का निजीकरण हट गई महावितरण!

कलवा, मुंब्रा, दिवा, शील में बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी आज से टोरंट पावर नामक कंपनी ने संभाल ली है। इन क्षेत्रों में रहनेवाले लाखों ग्राहकों को कंपनी ने उत्तम सेवा देने का भरोसा दिया है। बिजली का निजीकरण किए जाने के बावजूद ग्राहकों के सभी अधिकार सुरक्षित हैं। इसी तरह नासिक स्थित मालेगांव शहर उप विभाग क्र. १,२,३ तथा मालेगांव ग्रामीण उप विभाग में बिजली आपूर्ति हेतु कोलकाता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉरपोरेशन लिमिटेड नामक कंपनी की नियुक्ति की गई है। स्थानीय लोगों द्वारा किए गए भारी विरोध के बावजूद एक मार्च, २०२० की आधी रात से दोनों कंपनियों ने महावितरण की जगह बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी संभाल ली है।
उत्तम सेवा, अतिरिक्त चार्ज नहीं
निजी कंपनियों को बिजली आपूर्ति की प्रâेंचाइजी दिए जाने के बावजूद सभी उपभोक्ता महावितरण के ग्राहक बने रहेंगे। महाराष्ट्र बिजली नियामक आयोग द्वारा निर्धारित प्रचलित दर के हिसाब से बिजली की आपूर्ति की जाएगी। सेवा शुल्क के नाम पर कंपनी द्वारा ज्यादा पैसा वसूल किया जाएगा। इस आशंका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि बिजली उपभोक्ताओं को उत्तम एवं दर्जेदार सेवा प्रदान करने के लिए किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क चार्ज नहीं किया जाएगा।
शिकायत निवारण केंद्र की स्थापना
बिजली उपभोक्ताओं की सभी शिकायतों के निवारण हेतु शिकायत निवारण केंद्र की स्थापना की गई है। केंद्र से शिकायत का निवारण न होने पर उपभोक्ता सीधे महावितरण द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है। विद्युत अधिनियम २००३ के तहत उपभोक्ताओं को दिए गए सारे अधिकार सुरक्षित हैं।
तीन लाख उपभोक्ता घाटे में महावितरण
कलवा विभाग में एक लाख, मुंब्रा विभाग में एक लाख ३ हजार तथा शील विभाग में ९७ हजार के आस-पास बिजली उपभोक्ता है। उक्त परिसरों में बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी तथा दादागीरी की जाती है। बिजली चोरों पर उचित कार्रवाई न हो पाने की वजह से बिजली विभाग को प्रतिवर्ष करोड़ों का घाटा उठाना पड़ रहा था। बिजली आपूर्ति एवं बिल की वसूली निजी हाथों में सौंपे जाने के बाद अब बिजली चोरी पर लगाम लगेगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है।
टोरंट कंपनी का बयान
टोरंट कंपनी के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी चेतन बदियानी का कहना है कि मुंब्रा, शील, दिवा तथा कलवा विभाग में बिजली आपूर्ति का करार एक वर्ष पूर्व महावितरण के साथ हुआ है। इसी करार के मुताबिक कंपनी ने उक्त क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति का काम शुरू किया है। क्षेत्र के सभी बिजली उपभोक्ताओं को उत्तम एवं दर्जेदार सेवा उपलब्ध हो, इसके लिए कंपनी लगातार प्रयास करती रहेगी।
निजीकरण का विरोध जारी रहेगा
कलवा-मुंब्रा तथा शील मंडल में बिजली आपूर्ति का ठेका रद्द करने के लिए लगातार धरना-प्रदर्शन, आंदोलन तथा अनशन किया गया। विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करनेवाले स्थानीय विधायक एवं राज्य के गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड ने एक बयान जारी कर कहा है कि टोरंट नामक कंपनी को बिजली आपूर्ति तथा बिल वसूली का ठेका भाजपा सरकार द्वारा एक वर्ष पूर्व दिया गया था। २६ जनवरी, २०१९ से कंपनी ने अपना काम शुरू कर दिया था। निजीकरण का विरोध सर्वपक्षीय नेताओं तथा स्थानीय निवासियों द्वारा किया गया था। यह भाजपा का पाप है। कंपनी का ठेका रद्द किया जा सकता है क्या? इसका अभ्यास किया जा रहा है। हमारा विरोध अभी भी कायम है। ‘टोरंट कृति विरोधी समन्वय समिति’ के अध्यक्ष दशरथ पाटील का कहना है कि टोरंट कंपनी का विरोध कायम है। विरोध के सभी मुद्दों से शासन को अवगत करा दिया गया है। राज्य सरकार उचित निर्णय लेगी।