कश्मीर में उदयाचल सूरज

कश्मीर में स्थितियां बदल रही हैं इसमें कोई दोमट नहीं है। इन्हीं बदलती स्थितियों से एक ऐसा सूरज भी उगने को तैयार है जो हिंदुस्थानी खेल की दिशा और दशा को बदल सकता है। क्योंकि देश ने जम्मू-कश्मीर के ऐसे कई खिलाड़ी देखे जिन्होंने न केवल क्रिकेट में बल्कि फुटबाल आदि खेलों में भी अपने राज्य का नाम रोशन किया है। और ये खिलाड़ी ही सरकार की नजरों में हैं जो हिंदुस्थान का तिरंगा विश्व में लहराने का माद्दा रखते हैं। सरकार ने खेल और खिलाड़ियों के लिए अपनी कई योजनाओं के माध्यम से इस राज्य के विकास में कदम उठाए हैं। अव्वल तो ये कि हालात सुधरते ही यहां के स्टेडियम विश्व स्तरीय स्टेडियम के रूप में तब्दील किए जानेवाले हैं जहां अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट्स की उम्मीदें हैं। क्रिकेट, फुटबाल, एथलेटिक्स आदि ऐसे खेल हैं जिसके लिए जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों को तलाशने का काम जारी है।
क्रिकेट निश्चित रूप से एक ऐसा माध्यम है जिसके सहारे इस राज्य में खेल तथा खिलाड़ियों की स्थिति में सुधार ला सकता है। यहां के लोग भी क्रिकेट को अन्य खेलों के मुकाबले ज्यादा तरजीह देते हैं और शायद यही वजह भी है कि जम्मू-कश्मीर ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने घोषणा की थी कि इस राज्य की खुद की आईपीएल टीम बनाई जाएगी और उनके लिए मैचों का आयोजन भी किया जाएगा। राज्यपाल ने जब जम्मू-कश्मीर के क्रिकेटर मंजूर दार के खेल की चर्चा सुनी थी तो उन्हें अपने इस राज्य में क्रिकेट के ऐसे बीज दिखाई दिए जो फलदार वृक्ष में तब्दील किए जा सकते हैं। मंजूर को किंग्स इलेवन पंजाब ने आइपीएल २०१८ के लिए अपनी टीम में शामिल किया था लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। मंजूर दार के क्रिकेटर बनने की संघर्ष की कहानी से प्रेरित होकर मलिक ने ये कदम उठाया और कहा कि इस राज्य की खुद की आईपीएल टीम बनाई जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी हालात की वजह से वहां से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर सामने नहीं आए हैं। इस राज्य से अब तक सिर्फ परवेज रसूल और मंजूर दार ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के तौर पर पहचान हासिल कर पाए हैं। इस राज्य में दो बेहतरीन क्रिकेट स्टेडियम भी है। एक स्टेडियम श्रीनगर तो दूसरा जम्मू में है। ८० के दशक में यहां पर दो अंतरराष्ट्रीय मैचों का आयोजन किया गया था लेकिन कई खामियों की वजह से यहां पर इंटर स्टेट मैचों का आयोजन भी पिछले कुछ सालों से नहीं किया जा रहा है। अगर यहां प्रयास किए जाएं तो कई अच्छे क्रिकेटर सामने आ सकते हैं। हाल ही में यहां के अंडर १९ क्रिकेटर कामरान इकबाल को इंडिया बी टीम में शामिल किया गया था। इस खिलाड़ी ने इस टीम की तरफ से चतुष्कोणीय सीरीज में हिस्सा भी लिया था और अच्छा खेल दिखाया था।
राज्य में खेलों तथा खिलाड़ियों को लेकर काफी आशाएं हैं, उम्मीदें हैं। जब अप्रैल महीने में चिनार फुटबाल लीग हुआ तब यहां की भावनाओं को समझा गया। इस लीग में राज्य की करीब १६ टीमों ने हिस्सा लिया था। और इतना बढ़िया टूर्नामेंट संपन्न हुआ कि कश्मीरियों में खेल की ललक देखते ही बनती थी। इसी ललक का एक उदाहरण दानिश फारूक नामक फुटबाल खिलाड़ी को देखने से मिलता है। दानिश को श्रीनगर के टीआरसी टर्फ ग्राउंड पर प्रैक्टिस के लिए जाते हुए सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) ने हिरासत में ले लिया था। मगर एक सीनियर ऑफिसर ने जब पहचाना कि फारूक जम्मू-कश्मीर संतोष ट्रॉफी टीम का हिस्सा रहे हैं, तब उन्हें जाने दिया गया। दानिश बताते हैं कि वैâसे घाटी में तनाव और कर्फ्यू तक के बीच खिलाड़ी कभी प्रैक्टिस नहीं छोड़ते। श्रीनगर के ईदगाह इलाके के रहनेवाले फारूक का सिर्फ लुक या हेयरस्टाइल नहीं, बल्कि ड्रिबलिंग और गोल करने की क्षमता ने उन्हें फुटबॉल प्रेमियों के बीच `कश्मीर का रोनाल्डो’ नाम से मशहूर कर दिया है। अटैकिंग मिडफील्डर दानिश के पास जब भी बॉल होता है और वह पुर्तगाली स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो की तरह ड्रिबल करते हैं, तो उनके टीममेट्स उन्हें क्रिस्टियानो कहते हैं। रीयल कश्मीरी एफसी आई-लीग के टॉप डिविजन में आनेवाले सीजन में आगाज करेंगे और दानिश को रियल कश्मीर का इंजन कहा जाता है। सेकंड डिविजन में चार स्ट्राइक्स के साथ वह संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा गोल करनेवाले खिलाड़ी थे। सबसे ज्यादा असिस्ट भी उनके नाम हैं। केंद्र सरकार की नीतियों की वजह ही रही कि कभी अफशां आशिक जहां श्रीनगर की गलियों में पुलिस पर पत्थर फेंकनेवाली लड़कियों के गुट की अगुवाई करती थीं, अब वह जम्मू-कश्मीर महिला फुटबाल टीम की कप्तान बन गर्इं हैं। ये खबर अनुच्छेद ३७० हटाए जाने से पहले की है। यानी अब जब धारा के हट जाने के बाद की स्थिति है वो उस जैसी कितनी लड़कियों की जिंदगी बदल सकती है ये सोचा जा सकता है। ‘पत्थर फेंकनेवाले छात्रों की यह पोस्टर गर्ल’ में यह खुशनुमा बदलाव था और यह एक तरह से कश्मीरियों के दिलों को जीतने की सरकारी दास्तां भी बयां करता है। श्रीनगर के शेर ए कश्मीर और बख्शी स्टेडियम की तरह ही राज्य में अन्य जगहों पर भी मैदान बनाए जाने की एक सोच है। ताकि अधिक से अधिक लोगों को खेल से जोड़ा जा सके। इसके लिए सरकार मुहिम चलाएगी और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने तो खिलाड़ी तलाशने की अपनी मुहिम के तहत यहां शुरुआत कर ही रखी है। इरफान पठान को ये जिम्मेदारी दी गयी थी जिन्हें ३७० धारा हटाए जाने के बाद राज्य की स्थिति को सुधरने तक के लिए वापस बुलवा लिया गया था। उन्हें बोर्ड फिर से भेजेगा भी और उनके द्वारा तराशे गए खिलाड़ियों को क्रिकेट में अवसर भी देगा। सीओए के चीफ विनोद राय की बात पर यकीन करें तो उम्मीदें जगती हैं और लद्दाख के लिए भी बेहतरी के दरवाजे खुलते नजर आने लगे हैं। राय के मुताबिक लद्दाख के लिए एक नई टीम न बनाते हुए लद्दाख के खिलाड़ियों को रणजी ट्रॉफी या किसी अन्य डोमेस्टिक लीग में जम्मू-कश्मीर के टीम से खिलाया जाएगा। आपको यह भी बता दें कि आज तक लद्दाख के किसी खिलाड़ी ने जम्मू-कश्मीर की टीम का प्रतिनिधित्व नहीं किया है और रणजी ट्रॉफी का अगला सत्र इस साल दिसंबर महीने से शुरू हो रहा है और इसी के साथ इतिहास रच दिया जाएगा। कुलमिलाकर जिस तरह की योजनाओं पर काम होता दिख रहा है वो जम्मू-कश्मीर के भविष्य के लिए सुनहरा तो है ही देश के खेलों के लिए भी शानदार खिलाड़ियों के आमद की राह भी है।