कहां गए कृष्ण?

फिर से कृष्ण को खोज रहे हैं सुदामा।
पर कृष्ण का कहीं अता-पता नहीं है।।
शायद कृष्ण पर पड़ गई है कलियुग की परछार्इं।
इसमें कृष्ण की कोई खता नहीं है।।
इस युग का हाल देखकर कृष्ण भी हैं असमंजस में।
सुदामा से भी इस युग का हाल छिपा नहीं है।।
कलियुग के चक्र से हर कोई है परेशान।
लगता है भगवान भी इससे बचा नहीं है।।
कृष्ण भी थक गए हैं शायद इस दुनिया से।
किसी का भी घर ठीक से बसा नहीं है।।
दीन-हीन बेचारा सुदामा करे भी तो क्या करे?
उसके पास भी कोई साधन बचा नहीं है।
अब तो कृष्ण ही तारे सभी सुदामा को।।
कृष्ण के बिना किसी भी सुदामा का भला नहीं है।।
-अंजलि देवी, सीतामढ़ी, बिहार

हिम्मत मत हारो यारो!
हार को मानना हार को कबूल करना
भी एक मर्दानगी की निशानी है यारो।
क्योंकि हार हमारी कमजोरी है
हार हमारी नादानी है।
हार हमारी बेवकूफी है
हार हमारे अधूरेपन की निशानी है।
हार हमको हमारी कमी दिखाती है
जब हममें कोई कमी होती है।
तभी हमारी हार होती है
इसलिए यारो मेरी सलाह मानो।
अपने आपको समझो
अपनी कमियों को समझो।
भरसक कोशिश करो प्रयत्नवादी बनो
किसी ने सही कहा है कि
कोशिश करनेवालों की
कभी हार नहीं होती।
जिंदगी में अगर आपको मंजिल
तक पहुंचना है तो
हार से मत डरो मन हिचकिचाओ
बार-बार हार के भी एक बार जरूर जितोगे।
वही हार एक दिन हार में विजय माला
लिए आपका स्वागत, सम्मान करेगी।
आप विजेता बन जाओगे
विजेता से नेता बन जाओगे।
राजा बनके राज करोगे।
इसलिए कहता हूं यारो हिम्मत मत हारो।।
-अनिल कुमार विष्णु जोशी,
ठाणे

पथिक
मुसाफिर अगर रुकते हैं
तो पथिक आगे बढ़ते हैं
वो तय करते हैं मंजिल
उनका होता कुछ ध्येय
साथ में रहता है उत्साह
तो रस्ते होते हैं आसान
वरना निरुद्देश्य है जीवन
बेमतलब बेस्वाद है जीना
बिन सपनों के वैâसा चलना?
जो निकले हैं पथ पर
वही हुए आज अग्रसर
उन्हें ही मिले हमसफर
हो जाए आसान डगर
थामे हाथ बढ़ कर आगे
मिलता है कोई सहारा
उससे हो जाए गुजारा
पूरा होगा उनका सपना
वैâसा भय और वैâसा डरना?
-नागेंद्रनाथ गुप्ता, ठाणे (प.)

है इश्क बिना…
है इश्क बिना
जीना है सूना
ये इश्क है अपना
सभी का सपना सलोना
उसी को हरदम पाना
न गलती से भी खोना
क्योंकि पड़ता है फिर
जीवन भर आंसू बहाना
इसलिए एक-दूजे को
समझा-बुझाकर समझ लेना
और समझकर जिंदगी बिताना
यही है फर्ज अपना
इश्क को मरते दम तक निभाना
यहां एक दिन आना
और एक दिन सभी को जाना
मौका नहीं दोबारा लौटना
इसलिए तू इश्क किए जा
किसी का होकर
किसी को अपनाकर
ये इश्क के नाम पर
यह जिंदगी उसी को
हवाले करता जा
-गणपत क्षीरसागर, दहिसर,
मुंबई

घड़ी
मैं घड़ी हूं अपने इशारों पर संसार को चलती हूं।
समय-समय पर लोगों को
जगाती और सुलाती हूं।।
मैं घड़ी हूं…।।
इंसान का वक्त अच्छा हो या बुरा।
हर वक्त में सही समय बताती हूं।।
मैं मानव के जीवन की अभिन्न अंग हूं।
मैं बंद पड़ जाऊं तो मानव जीवन हो
जाएगा पूरा अस्त-व्यस्त।।
धरती, आकाश, सूरज, चांद, सितारे।
सब समझते हैं मेरे एक-एक इशारे।।
मैं घड़ी हूं…।।
मैं मानव द्वारा निर्मित एक छोटी-सी मशीन हूं।
पहले लोग मुझे अपनी कलाई पर
बड़े प्यार से बांधते थे।।
पर आज समय बदल गया है।
मैं मोबाइल में फिट कर दी गई।।
अब न मेरा कोई आकार है न प्रकार है।
अब मोबाइल पर उभरते अंक ही मेरी पहचान हैं।।
हां, पर मेरा अस्तित्व अब भी है।
और हमेशा रहेगा, यह मेरा पक्का विश्वास है।।
हां, मैं उन लोगों की अहसानमंद हूं।
जो मुझे अब भी बड़े प्यार से अपनी
कलाई पर शान से बांधते हैं।।
मैं घड़ी हूं…।।
-विजय कुमार अग्रवाल, वसई

धोखेबाज
जिसने मेरा दर्द सुना है
उसने ही मुझे दर्द दिया है,
जिसको मैंने अपना माना
उसने ही मुझे गैर किया है।
जिसका मैंने साथ दिया था
आज उसी ने घात किया है।
जिसको मैंने प्यार किया था
आज उसी ने बर्बाद किया है।
जिसको मैंने राह बताई
आज उसी ने छोड़ दिया है,
जीवनभर का करके वादा
आज उसी ने तोड़ दिया है।
मैं थी बिल्कुल सीधा-साधी
हर एक बात मान गई थी
तब तक बहुत देर हो चुकी थी
जब उसको मैं जान गई थी।
मुझको यह सब नहीं पता था,
उसने यह एक खेल रचा था।
मुझको भी भरोसा है खुद पर
अपनी मेहनत, अपनी ताकत पर।
नहीं कभी मैं कमजोर पडूंगी
जोर-शोर से संघर्ष करूंगी।
लाखों लाख धोखा दे दे कोई
अब मैं सारी दुनिया से ल़ड़ूंगी।।
-हेमलता त्रिपाठी, लखनऊ