कहीं डिप्रेशन में न डाल दे पिंपल!

युवाओं में चाहे वह लड़का हो या लड़की, अपने लुक के प्रति वे कुछ ज्यादा ही संवेदनशील रहते हैं। हालांकि स्मार्ट, आकर्षक और सुंदर दिखनेवाली युवावस्था में ही उन्हें पिंपल्स का भी सामना करना पड़ता है। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि चेहरे पर पिंपल हो जाने भर से लोगों में ६३ प्रतिशत तक डिप्रेशन (अवसाद) का खतरा बढ़ जाता है।
बता दें कि हर कोई खूबसूरत दिखना चाहता है। कई बार हम दूसरों से बेहतर दिखना चाहते हैं पर हाल ही में हुए शोध में एक नया चौंकानेवाला तथ्‍य सामने आया है। ब्रिटिश जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी ने यूके के एक बड़े प्राथमिक देखभाल डेटाबेस द हेल्थ इंप्रूवमेंट नेटवर्क (टीएचआईएन) के १९८६ से २०१२ तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया। शोध में पता चला है कि जिनके चेहरे पर मुंहासे होते हैं, उनमें अवसाद बढ़ने का खतरा काफी बढ़ जाता है इसलिए यह जरूरी है कि स्किन के डॉक्टर मुंहासोंवाले मरीजों में समय-समय पर डिप्रेशन के लक्षणों की भी जांच करें। मुंबई के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सागर मूंदड़ा ने कहा कि युवावस्था में लड़के, लड़कियों के लिए उनका लुक बहुत महत्वपूर्ण होता है। स्वयं को परिभाषित करने में इसकी अहम भूमिका रहती है और इसका सीधा असर आत्म-मूल्यांकन और आत्मविश्वास पर पड़ता है। जो अपने शरीर को लेकर संतुष्ट रहते हैं और अपने आत्म-मूल्यांकन से आश्वस्त होते हैं, उनकी शारीरिक छवि सकारात्मक होती है। दूसरी ओर जिन्हें लगता है कि वे अच्छे नहीं दिखते या मानते हैं कि उन्हें अपने चेहरे या विचारों को बदलने की जरूरत है, उनकी शारीरिक छवि नकारात्मक होती है।
सोशल मीडिया का टेंशन
आज के युग में सोशल मीडिया भी युवाओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हर कोई अपनी सेल्फीवाली तस्वीरें फेसबुक, व्हॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे चैटिंग ऐप पर डालते हैं। ऐसे में यदि आपके मुंह पर मुंहासे हैं और किसी ने कोई टिप्पणी कर दी तो किशोरावस्था में ही नकारात्मक शारीरिक छवि की समस्या उत्पन्न होती है।
क्‍या कहते हैं वैज्ञानिक?
डिप्रेशन जैसी समस्याओं से ग्रसित होने का खतरा मुंहासों के पता चलने के बाद पहले ५ वर्षों तक ही रहता है इसलिए युवाओं में यह जरूरी है कि मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर भी ध्‍यान रखा जाए। पैरेंट्स के साथ-साथ यह उन डॉक्‍टरों की भी जिम्‍मेदारी है कि वे युवाओं के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर भी ध्‍यान दें।