" /> काँ-रोना! एमपी में कर-नाटक, नहीं माने बागी विधायक तो सामूहिक इस्तीफा

काँ-रोना! एमपी में कर-नाटक, नहीं माने बागी विधायक तो सामूहिक इस्तीफा

– आधे विधायकों के इस्तीफे के बाद विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं कमलनाथ

 कमलनाथ आसानी से हार मानने के मूड में नहीं
 वे 50 प्रतिशत विधायकों से दिलवा सकते हैं इस्तीफा
 इसके बाद वे विधानसभा भंग करवा सकते हैं

कोरोना के इस माहौल में मध्य प्रदेश का सियासी पारा तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा है। यहां राजधानी भोपाल में गहमागहमी मची हुई है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए विकट स्थिति बनी हुई है और उनकी सरकार का बचना मुश्किल लग रहा है। लेकिन कमलनाथ हार माननेवालों में से नहीं हैं और आसानी से भाजपा को सत्ता तक पहुंचने देने के मूड में नहीं हैं। अगर नंबर गेम उनके पक्ष में नहीं आया तो वे विधानसभा भंग करने की जुगत भी लगा सकते हैं।
एमपी में भी पिछले साल हुए कर्नाटक के नाटक का पुन: मंचन शुरू हो गया है। तब कांग्रेसी विधायकों को तोड़ कुमारस्वामी की सरकार को गिराकर येदियुरप्पा की सरकार बनाई गई थी। उसी तर्ज पर कमलनाथ के विधायकों में फूट डलवाई गई और उन्हें कर्नाटक भेजा गया है। इसलिए कांग्रेस की कोशिश है कि बंगलुरु गए विधायकों को जल्द से जल्द मनाकर पार्टी के साथ लाया जाए। अगर फ्लोर टेस्ट की स्थिति बनती है तो बंगलुरु गए विधायकों की मदद से कांग्रेस बहुमत साबित कर सकती है। विधायक नहीं माने तो इस स्थिति में कांग्रेस सरकार संकट में आ जाएगी। अगर इस्तीफा देनेवाले विधायकों को मनाने में कांग्रेस नाकाम होती है तो वह अपने सभी विधायकों को इस्तीफा देने के लिए भी कह सकती है। अगर सदन में आधे यानी ५० फीसदी विधायक इस्तीफा दे देते हैं और मुख्यमंत्री कमलनाथ विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दें तो मध्यावधि चुनावों की नौबत आ सकती है। मंगलवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया गया है।
कल बंगलुरु में १९ विधायकों से मिलकर मंत्री सज्जन वर्मा बुधवार को भोपाल लौट आए। उनका दावा है कि इस्तीफा देनेवाले इन विधायकों में से कोई भी सिंधिया के साथ जाना नहीं चाहता। उन्हें गुमराह करके बंगलुरु ले जाया गया है। इनमें से ज्यादातर का कहना है कि वे भाजपा में जाने को तैयार नहीं हैं।

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