काम मांगने में कोई हर्ज नहीं! -प्रनूतन

देश की चुनिंदा अभिनेत्रियों में से एक नूतन की एक और पीढ़ी फिल्मों में दस्तक दे रही है। नूतन की पोती और मोहनीश-एकता बहल की बेटी प्रनूतन की डेब्यू फिल्म ‘नोटबुक’ २९ मार्च को रिलीज होगी।  पेश है नवोदित अभिनेत्री प्रनूतन से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
 आपकी डेब्यू फिल्म ‘नोटबुक’ तैयार है, कैसा अनुभव रहा?
फिल्म ‘नोटबुक’ प्रेम कहानी है। इस फिल्म में मेरा किरदार फिरदौस नामक शिक्षिका का है। कहानी कश्मीर के एक स्कूल की है। पूर्व सैन्य अधिकारी कबीर इसी स्कूल में टीचर बनकर आता है, जहां फिरदौस से मुलाकात होती है। क्या होता है आगे इन दोनों के जीवन में? इसी पर आधारित है फिल्म।
 परिवार में अभिनय से जुड़े आपके सामने तीन आयडल्स हैं। आपकी दादी नूतन, पिता मोहनीश और मां एकता।  क्या सीखा आपने इन सभी से?
दादी नूतन के बारे में मैं क्या-क्या कहूं? उनके बारे में मैं जितना भी कहूं कम ही होगा। मेरी दादी १९९१ में गुजरी और मेरा जन्म हुआ १९९३ में। पापा को लगा मैं दादी का रूप हूं इसीलिए मेरा नाम भी प्रनूतन रखा गया। मैं दादी से रू-ब-रू नहीं हो सकी, यह मेरे लिए अफसोस की बात है पर उनकी फिल्मों और मेमरीज से उनके बारे में जानने-समझने का मौका मिला। मेरी मां ने मेरी पैदाइश के बाद अभिनय को अपने से दूर ही रखा। पापा तो अभिनय करते रहे हैं। इन सभी से मैंने मेहनत और लगन सीखी।
 आपने कब तय किया की आपको अभिनय में ही आना है?
मैं बचपन में पापा के साथ उनकी शूटिंग में जाया करती थी। मुझे फिल्मों के सेट का वह माहौल बड़ा ही मैजिकल लगता था। एक फास्ट हैपनिंग एंबियंस में कोई कैमरा सेट कर रहा है तो कहीं मेकअप चल रहा है, कोई अपने डायलॉग याद कर रहा है। बहुत एंजॉय किया मैंने फिल्मी माहौल को। फिर लगने लगा मैं कब इसका हिस्सा बनूंगी। पापा को जब मैंने कहा कि मुझे भी दादी और आपकी तरह अभिनय में आना है तो पापा ने कहा कि पहले पढ़ाई पर ध्यान दो। अभिनय कहीं भाग नहीं जाएगा। मैं वैसे भी पढ़ाकू थी, अपना पहला रैंक और फर्स्ट क्लास मैंने कभी नहीं छोड़ा।
 आपको सलमान खान ने कैसे लॉन्च किया?
मेरे पापा को भी अभिनय में लानेवाले सलमान अंकल ही हैं। पापा ने फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ १९८९ में की थी, जिसकी सफलता के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सलमान की उनसे दोस्ती इसी फिल्म से शुरू हुई। यह मित्रता आज भी कायम है। पापा ने जब कहा प्रनूतन अभिनय में आना चाहती है तो सलमान ने मुझे और उनके दोस्त के बेटे जहीर इकबाल को फिल्म ‘नोटबुक’ में लॉन्च किया।
 सलमान से आप कई मर्तबा मिली होंगी, उनसे क्या सीखा?
सलमान उम्दा एक्टर हैं और उससे बढ़कर एक ग्रेट सोल है। उन्होंने मुझे कहा, रिमेंबर प्रनू अगर तुम काम करना चाहती हो तो काम मांगने में कोई शर्म नहीं या बुराई नहीं है।
 आपकी दादी की किन फिल्मों ने आपको प्रभावित किया?
दादी की फिल्मों का रेंज बहुत वाइड था।  उनमें परफॉर्मंस और ग्लैमर संतुलित था। हर फिल्म में नूतन जी ने सभी को चौंकाया।  मैंने उनकी सभी फिल्मों को देखा है और दादी को महसूस किया है। मुझे दादी की फिल्म ‘बंदिनी’ सर्वश्रेष्ठ लगती है यदि इसका रीमेक बना तो मैं करना चाहूंगी। कल्याणी का किरदार दादी ने बेहद संजीदगी से जिया है। मैं उनकी तुलना में १० प्रतिशत भी कर पायी तो मुझे खुशी होगी।
 हिंदुस्थानी फिल्मों में नूतन का नाम बड़े आदर से लिया जाता है, उनकी पोती होने का कितना प्रेशर है आप पर?
 मैं इसे प्रेशर नहीं मानती। प्रेशर एक नेगेटिव वर्ड है। मैं नूतन की पोती हूं, इसे मैं उपलब्धि मानती हूं। यह मेरी जिम्मेदारीr है की मैं अच्छा काम करूं।