कायर कप्तान होशियार कंगारू

जब कप्तान ही कायर हो तो टीम कैसे जीत सकती है। हालांकि इसके बावजूद टीम को कुछ ऐसे मौके मिले जो यदि भुनाए जाते तो पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया को पराजित कर सकता था मगर वे मौके भी तब भुनाए जा सकते थे, जब कप्तान सरफराज डट कर मुकाबला करता और खुद जिम्मेदारी लेता। एक मूर्ख, बेवकूफ और डरपोक कप्तान को लेकर पाकिस्तान की टीम विश्वकप में उतरी है। ऑस्ट्रेलिया से हारने के बाद ये महामूर्ख कप्तान अपने देश में अपनी छवि खराब न हो इसलिए अब बक रहा है कि हम हिंदुस्थान के खिलाफ जी जान लगा देंगे। रविवार को पाकिस्तान को टीम इंडिया के खिलाफ खेलना है। क्रिकेट में पाकिस्तान टीम इंडिया पर ही निर्भर है। उसके साथ खेलकर फिर वो चाहे हार भी जाए उसके करोड़ों के वारे-न्यारे हो जाते हैं। भिखमंगे पाकिस्तान को और क्या चाहिए? टीम इंडिया से मुकाबले को वो अपनी तमाम कमजोरियों, बेवकूफियों को छुपा ले जाते हैं। पाकिस्तान देश भी अपनी टीम से बस यही चाहता है कि वो टीम इंडिया को हरा दे तो विश्वकप जीतने जैसा है मगर ये उसका दु:स्वप्न है क्योंकि अभी तक विश्वकप में पाकिस्तान हिंदुस्थान को पराजित नहीं कर पाया है और अबकी बार भी उसकी हार तय है किंतु वो अपनी ऑस्ट्रेलिया से हार को हिंदुस्थान से मुकाबले की बात कर पचाने की कोशिश में लगा है।
बहरहाल अपने इस मूर्ख सेनापति को लेकर जब पाकिस्तान टीम मैदान में उतरी तभी वो आधा मैच हार चुकी थी। टॉस जीतकर सरफराज ने कंगारुओं को पहले बल्लेबाजी सौंप दी। ऑस्ट्रेलिया के लिए ये सोने पर सुहागा था। फिंच और वॉर्नर ने पाकिस्तानी गेंदबाजों को धुनना शुरू किया तो अपनी टीम को एक मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया। हां, टॉस के बाद ऑस्ट्रेलिया की मजबूती में एक टर्निंग पाइंट तब भी आया जब वॉर्नर का वैâच स्लिप में छूट गया और इसके बाद वार्नर ने शानदार शतक जमाया। पूरी पाकिस्तानी टीम बिखरी हुई थी। न फील्डिंग, न गेंदबाजी और न कोई दबाव। वो तो भला हो आमिर का जिसने ५ विकेट लेकर तेज गेंदबाजी का मान बनाए रखा वरना कंगारुओं को तो ४०० के पार कूदना था।
३०७ रन पाकिस्तान के लिए पहाड़ जैसे ही थे किंतु यदि सरफराज समझदार होता तो संभव था मैच भी उसके पक्ष में चला जाता क्योंकि उसके अंतिम बल्लेबाज जो मूल बल्लेबाज नहीं थे ने बल्लेबाजी में आंख मीच कर गेंदें बाउंड्री पार कर टीम को जीत के नजदीक खींच लिया था। कप्तान डरपोक नहीं होता तो इन बल्लेबाजों को वो आउट नहीं होने देता और खुद जिम्मेदारी उठाकर ज्यादा से ज्यादा स्ट्राइक लेता। हद तो तब हो गई जब अंतिम बल्लेबाज क्रीज पर उतरा और ओवर के अंतिम गेंद पर सरफराज एक रन लेकर स्ट्राइक से भागता रहा। मजेदार किस्सा ये रहा कि ऐसे कायर कप्तान को मैक्सवेल ने एक डायरेक्ट हिट से दूसरे छोर पर ही स्टंप उखाड़ कर उसे रन आउट कर दिया।
पाकिस्तानी हार में सबसे बड़ा योगदान कप्तान सरफराज ने दिया। फिंच और वॉर्नर के छोड़े गए वैâचों ने दिया और उस टॉस ने जो जीतकर भी कप्तान ने कंगारुओं को दे दिया। ये सब एक टीम की वे कमजोरियां हैं जो उसके पूरे प्रबंधन की खामियां उजागर करती हैं। कोई टीम मैनेजमेंट नहीं। कोई पूर्व योजना नहीं। कोई अक्लमंदी नहीं। बस मैदान में उतरना है और अपनी-अपनी शक्ति अनुसार खेलकर लौट जाना है। इसमें भी कप्तान का मूर्ख होना भी हार को वैâसे जीत में बदल सकता था।
कहानी कुछ इस प्रकार रही। ओपनर डेविड वॉर्नर (१०७) के शानदार शतक और उनकी कप्तान आरोन फिंच (८२) के साथ १४६ रनों की ओपनिंग साझेदारी के बाद तेज गेंदबाज पैट कमिंस की घातक गेंदबाजी (३३ रनों पर ३ विकेट) और मिशेल स्टार्क के १ ओवर में २ विकेट की बदौलत गत चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को आईसीसी विश्व कप के मुकाबले में ४१ रनों से पीट दिया।
ऑस्ट्रेलिया ने अपने पिछले मुकाबले में टीम इंडिया से मिली हार के बाद वापसी करते हुए ४९ ओवरों में ३०७ रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया और फिर पाकिस्तान को ४५.४ ओवरों में २६६ रनों पर निपटा दिया। ऑस्ट्रेलिया की ४ मैचों में यह तीसरी जीत है और उसके ६ अंक हो गए हैं जबकि पाकिस्तान को ४ मैचों में दूसरी हार का सामना करना पड़ा है और उसके खाते में ३ अंक हैं। पाकिस्तान के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर ने अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करते हुए १० ओवरों में ३० रनों पर ५ विकेट झटके लेकिन पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने आमिर की मेहनत पर पानी फेर दिया। इमाम उल हक ने ५३, बाबर आजम ने ३०, मोहम्मद हफीज ने ४६, वहाब रियाज ने ४५, कप्तान सरफराज अहमद ने ४० और हसन अली ने ३२ रन बनाए लेकिन कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल पाया। कमिंस ने फखर जमान (०), इमाम उल हक और शोएब मालिक (०) को आउट किया। केन रिचर्ड्सन ने आसिफ अली और हसन अली के विकेट लिए। नाथन कोल्टर नाइल ने बाबर आजम को निपटाया जबकि ऑस्ट्रेलिया के कप्तान आरोन फिंच ने हफीज को आउट किया। लेकिन इसके बाद सरफराज और वहाब रियाज ने ८वें विकेट के लिए ६४ रनों की जबरदस्त साझेदारी कर ऑस्ट्रेलिया के माथे पर पसीना ला दिया। ऐसे समय में मिशेल स्टार्क ने रियाज को आउट कर ऑस्ट्रेलिया को महत्वपूर्ण सफलता दिलाई। राउंड द विकेट गेंदबाजी कर रहे स्टार्क की गेंद रियाज के बल्ले का महीन किनारा लेकर विकेटकीपर के हाथों में चली गई। कीपर एलेक्स वैâरी ने अपील नहीं की लेकिन कप्तान आरोन फिंच ने २ सेकंड शेष रहते रेफरल ले लिया। फिंच का अंदाजा सटीक रहा और गेंद ने बल्ले का किनारा लिया। रियाज ने ३९ गेंदों पर ४५ रनों में २ चौके और ३ छक्के लगाए।
स्टार्क ने इसी ओवर में मोहम्मद आमिर को भी बोल्ड कर दिया। इन २ विकेटों ने मैच फिर से ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया। ग्लेन मैक्सवेल ने अपने सीधे थ्रो से सरफराज को नॉन स्ट्राइकर छोर पर रन आउट कर दिया। कमिंस के ३ विकेट के अलावा स्टार्क और रिचर्ड्सन ने २-२ विकेट लिए। शतकधारी वॉर्नर को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का पुरस्कार मिला। यह टूर्नामेंट में उनका दूसरा ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का पुरस्कार था।