काला पन्ना!, मेज पीटने से सच मरेगा क्या?

सार्वजनिक सभाओं में जिस तरह आक्रामक होकर बोलते हैं, कुछ इसी तरह का भाषण प्रधानमंत्री मोदी संसद में भी करते हैं। सत्ताधारी दल के लोग प्रधानमंत्री के हर वाक्य पर मेज पीटते रहते हैं लेकिन उसके कारण संसद की महान परंपरा में कुछ वृद्धि हो रही है क्या? प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में कांग्रेस को ठोंक डाला। बखूबी चमड़ी उधेड़ डाली। देश की वायुसेना मजबूत न हो, इसी के लिए राफेल करार पर सतत टिप्पणी किए जाने का आरोप मोदी ने किया। कांग्रेस को फौज की मजबूती नहीं चाहिए, हमेशा इस तरह का आरोप प्रधानमंत्री लगाते हैं और दूसरे दिन ही राफेल करार में मोदी की व्यक्तिगत रुचि कितनी थी, इस संदर्भ से जुड़े कागजातों का सबूत सामने आ जाता है, इसे क्या कहें? राफेल करार हवाई सेना की मजबूती के लिए हुआ या दलदल में फंसे उद्योगपति की मजबूती के लिए किया गया, इस सवाल का जवाब प्रधानमंत्री की ओर से अपेक्षित है। राफेल के मामले में सीधे हमारे मोदी ही ‘डील’ कर रहे थे, रक्षामंत्री और रक्षा सचिव वगैरह मंडलियों को इस व्यवहार से दूर रखा गया। राफेल के दाम को तय करने से लेकर यह ठेका किसे देना है, इस बारे में सारे निर्णय मोदी ने ही लिया है। इसलिए आरोप और टिप्पणी के लिए उन्हें ही जिम्मेदार होना पड़ेगा। ‘चौकीदार चोर है’ यह नारा राहुल गांधी ने दिया और वो देश के कोने-कोने में पहुंच गया। इसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार नहीं बल्कि राफेल मामले में अब सामने आई लुका-छिपी जिम्मेदार है। श्री मोदी कहते हैं, ‘तुम मोदी पर टिप्पणी करो, भाजपा पर टिप्पणी करो लेकिन देश पर टिप्पणी मत करो।’ इसका अर्थ मोदी भक्त ही समझाकर बताएं। संदेहास्पद व्यवहार जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, उस पर स्पष्टीकरण मांगना देश पर टिप्पणी वैâसे हो सकता है? देश में लोकतंत्र है और उसका बधियाकरण कौन कर रहा है? लोकतंत्र तथा न्याय व्यवस्था का सम्मान बनाए रखने की जिम्मेदारी सत्ताधारी दल की होती है। विरोधियों को सवाल पूछने का अधिकार है और इस अधिकार को नकारने का मतलब लोकतंत्र का बधियाकरण है। साढ़े ४ वर्षों से देश पर मोदी का एकछत्र राज्य है। फिर भी महंगाई से लेकर भ्रष्टाचार तक हर बात का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ना मतलब खुद की असफलता को छिपाने के समान है। ७० वर्षों में कांग्रेस ने क्या किया? इस सवाल के घेरे से मोदी तथा उनकी सरकार सत्ता का कार्यकाल खत्म होने को है फिर भी बाहर नहीं निकल पा रही है। लोगों ने उन्हें सत्ता दी लेकिन यह सत्ता सिर्फ विरोधियों की नाड़ियों को कसने के लिए इस्तेमाल की गई। इसीलिए सत्ताधारियों को बार-बार कांग्रेस पर टिप्पणी करनी पड़ रही है। कांग्रेस ने देश को कमजोर किया, यह मोदी का आरोप मान्य है। कांग्रेसवाले चोर, लफंगे, लुटेरे और डाकू हैं। हर कांग्रेसी को सरेबाजार फांसी पर उल्टा लटकाना चाहिए। कांग्रेस यह गाली है। ये सब मान्य कर लिए जाएं तो भी राफेल व्यवहार में राहुल गांधी ने जो सवाल पूछा है, वह बरकरार रह जाता है। ५०० करोड़ का राफेल विमान १६०० करोड़ में खरीदने के पीछे क्या तर्क है? इसका संतोषजनक जवाब मिलने तक देश का हर नागरिक यह सवाल पूछता रहेगा। राजनीति में जो तालाब की रखवाली करेगा वो पानी चखेगा, यह मान्य है लेकिन यहां तो समुद्र ही निगला जा रहा है। मौजूदा राजनीति में राष्ट्रवाद और देशभक्ति की व्याख्या बदल दी गई है। राफेल करार का भजन जो गाएगा वो देशभक्त तथा राफेल की कीमतों को बढ़ाकर किसको फायदा पहुंचाया गया, ऐसा पूछनेवाले देशद्रोही। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को संसद में देशभक्ति का भाषण दिया। राफेल का समर्थन किया। दूसरे दिन ही राफेल मामले का ‘काला पन्ना’ सामने आ गया। मेज पीटकर देशभक्ति का नारा देनेवालों के मुंह इससे बंद हो गए हैं। कांग्रेस सहित उनका पूरा महागठबंधन मतलब महामिलावट है, ऐसा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा। हम मोदी की भूमिका से सहमत हैं, मगर उनकी यह टिप्पणी राफेल मामले पर उन पर और उनकी सरकार पर किए जा रहे आरोपों का जवाब नहीं हो सकती। अब राफेल मामले में मोदी के ‘शामिल’ होने का एक नया दस्तावेज सामने आया है। ‘हिंदू’ जैसे एक प्रतिष्ठित अखबार ने इस दस्तावेज को शुक्रवार को एक खबर के साथ प्रकाशित किया है। राफेल मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से ‘समानांतर सौदेबाजी’ जारी थी और उस पर रक्षाविभाग ने आपत्ति जताई थी, ऐसा इस खबर में कहा गया है। सबूत के रूप में रक्षा विभाग के अधिकारी का एक खत भी उस खबर में प्रकाशित की गई है। यह खबर बेबुनियाद और अधूरी है। ‘हिंदू’ ने पूरा सच लोगों के सामने नहीं रखा है, ऐसा अब भाजपावाले कह रहे हैं (हम भी प्रार्थना कर रहे हैं कि यह ‘फेक न्यूज’ हो)। पर इस बहाने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों का क्या? देश की सुरक्षा और ‘राफेल’ के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोकसभा में किए गए हमले के २४ घंटे में ही राहुल गांधी ने यह प्रति हमला किया है। मोदी की पार्टी और बाहर सच्चे दोस्त नहीं रहे। व्यवहार में भावनाएं नहीं होतीं। राफेल में व्यवहार है और यह सबूतों के साथ सामने आ चुका है। बेवजह विरोधियों को दोष क्यों देते हो? ‘सत्यमेव जयते’ ही देश को जीवंत रखने का मंत्र है। विरोधी मारे जाएंगे, लेकिन सत्य जिंदा रहेगा!