कास्टिंग काउच से नहीं हुआ सामना-सना कपूर

सना कपूर ने बॉलीवुड में फिल्म ‘शानदार’ से पदार्पण किया। हालांकि यह फिल्म सना के लिए बॉक्स ऑफिस से कुछ शानदार परिणाम लेकर नहीं आई लेकिन अनुभव जरूर दिए। सना एक शॉर्ट फिल्म कर रही हैं। इसका नाम `खजूर पे अटके’ है। फिल्म इंडस्ट्री में सना की उम्मीदों और शॉर्ट फिल्म ‘खजूर पे अटके’ को लेकर सना की राय जानीr लिपिका वर्मा ने। पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश-
फिल्म `शानदार’ आपके लिए कैसी रही?
मुझे तो ‘शानदार’ फिल्म से बहुत कुछ मिला है। दरअसल मुझे लोगों का प्यार मिला, ढेर सारे पैंâस मिले तथा सभी को मेरा किरदार और मेरा काम अच्छा लगा। सो, मेरे लिए इस फिल्म में काम करना अच्छा साबित हुआ है। फिल्म अच्छी चले, इसके लिए हम सब बहुत मेहनत करते हैं और अपना बेस्ट देने की कोशिश करते हैं। इसके बाद भी यदि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपना जलवा नहीं बिखेर पाती तो हम यही कह सकते हैं कि अगली बार और मेहनत करेंगे।
अब आप शॉर्ट फिल्म में नजर आनेवाली हैं इतने दिन क्या कुछ किया?
देखिए मुझे रोल के लिए कई ऑफर मिल रहे थे। सो, मैंने पापा का थिएटर ज्वाइन कर लिया। ‘दोपहरी’ और ‘सेहर’ जैसे प्ले से मैं जुड़ गई। इसके जरिए मुझे अलग-अलग जगहों पर सफर करने का मौका मिला। इससे मुझे पापा से अभिनय के गुर सीखने को मिले।
नेपोटिज्म या भाई-भतीजावाद और कास्टिंग काउच इन दिनों चर्चा का विषय है। क्या कहना चाहेंगी इस बारे में?
सही मायने में हम स्टार किड्ज के वर्ग में शामिल नहीं होते। क्योंकि मेरे माता-पिता एक मंजे हुए कलाकार हैं तो मुझे भाई-भतीजावाद का कोई नुकसान या फायदा नहीं हुआ। हां, यह जरूर है कि कभी-कभी कोई हमारा नाम किसी किरदार के लिए सिर्पâ रिकमेंड करता है तो उन्हें ऐसा भी लगता है कि ये तो पंकज कपूर और सुप्रिया की बिटिया है तो शायद यह किरदार न करे। पर हां, लोगों को जब पता चलता है कि मैं फलां-फलां की बेटी हूं क्योंकि मेरे माता-पिता ने अपने अभिनय से एक इज्जत बनाई है तो हमें भी प्रोड्यूसर रिस्पेक्ट ही करते हैं। मुझे कभी भी कास्टिंग काउच का सामना नहीं करना पड़ा। मेरे पैरेंट्स उस तरह की लाइम लाइट में नहीं रहे, सो, हमें एक बहुत ही साधारण परवरिश मिली है।
अपनी मां सुप्रिया पाठक की कौन-सी फिल्म आपको अच्छी लगी?
वैसे तो मॉम की सारी फिल्में मुझे बेहद पसंद हैं। विंâतु दिल के सबसे करीब है उनकी फिल्म, ‘बाजार’। इतनी छोटी-सी उम्र में उन्होंने दिग्गजों के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर किया और बेहतरीन अभिनय से सबको मंत्रमुग्ध भी कर दिया। पिताजी की कौन-सी फिल्में देखी हैं और कौन-सी आपकी पसंदीदा फिल्में हैं?
डैड की कुछ फिल्में देखी हैं मैंने जैसे ‘मकबूल’ इत्यादि। ‘करमचंद’ सीरियल नहीं देख पाई क्योंकि उस समय मैं इस दुनिया में नहीं आई थी।
शाहिद कपूर से हाल ही में मिली हैं आप। उनकी कौन-सी बात आप हमसे शेयर करना चाहेंगी?
वे मेरा बहुत खयाल रखते हैं। हाल ही में जब मैं उनके घर गई थी और मीशा के साथ खेल रही थी तब वे कमरे में आए और बोले, ‘ये क्या कपड़े पहने हो? मीशा भी तुम्हें देखकर ऐसे ही कपड़े पहनने को मांगेगी।’ हम सब उनकी यह बात सुनकर बहुत हंसे। एक पिता होने के नाते शाहिद अभी से मीशा को लेकर कितने रक्षात्मक विचार रखते हैं।