किस्मत की पहली किश्त कैद, १५ प्रतिशत ‘सरकार’ ईवीएम में…

१७ वीं लोकसभा के लिए कल पहले चरण का मतदान हो गया। सात चरणों के निर्धारित मतदान के लिहाज से कहा जा सकता है कि केंद्र की नई सरकार की किस्मत की पहली किश्त ईवीएम में वैâद हो गई। देश के मतदाताओं ने १५ प्रतिशत नई सरकार के भविष्य का पैâसला कर दिया। १८ राज्यों व २ केंद्रशासित प्रदेशों की कुल ९१ सीटों पर कल हुआ मतदान भले ही एक ढंग से शांतिपूर्ण माना जाए, तब भी पूरे दिन का सियासी वातावरण हर ढंग से तनावपूर्ण ही रहा। भ्रम और भड़ास की राजनीति दिनभर रंग बदलती रही, जिसका रंग सियासत के चेहरों से लेकर रैलियों के झंडों तक चमकता रहा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के चेहरे पर पड़ी हरे रंग की लेजर बीम ने जहां कांग्रेसियों का चेहरा ‘लाल’ कर दिया तो वहीं सोनिया गांधी की नामांकन रैली में फहराए नीले व काले रंग के झंडों ने भाजपाइयों का। नीले रंग के जरिए कांग्रेसी ‘एनवायएवाय’ स्कीम के प्रति समर्थन जतला रहे थे तो काले रंग के जरिए राफेल सौदे पर विरोध। परंतु इन काले और नीले रंगों के बीच सबसे ज्यादा ध्यान खींचा तो हरे रंग ने ही। राहुल की वायनाड रैली में दिखे हरे झंडों का रंग अनजाने में ही कल उनके चेहरे पर भी हरी लेजर बीम के जरिए कई बार चमका। करीब ७ बार। तय मानो की ७ बार की यह ‘सियासी चमक’ सातवें चरण के मतदान तक फीकी नहीं पड़ेगी। वैसे कल चमका तो भाजपाइयों का चेहरा भी होगा, जब यूपी के ‘महागठबंधन’ में खुलकर दरार नजर आई। साइकिल, हाथी का साथ छोड़कर कई जगहों पर सरपट निकल गई। सपा-बसपा के तमाम सदस्य महागठबंधन के प्रत्याशियों का प्रचार छोड़कर विरोधियों के साथ कदम-ताल करते दिखे। खैर, कार्यकर्ताओं ने ऐन वक्त पर अपना रंग और ढंग भले ही बदल लिया हो पर सपा-बसपा आलाकमान ने मजबूत गठबंधन के संदेश देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बसपा के कद्दावर नेता सतीश मिश्रा ने यूपी सरकार के डीजीपी पर दलितों को मतदान से दूर रखने की साजिश का आरोप लगाया तो उनका साथ देने अखिलेश बबुआ भी डिजिटल मैदान में कूद पड़े। ट्वीट किया और बसपा के आरोपों का समर्थन भी। कुल मिलाकर कल सियासी पार्टियों का सारा दिन उछल-कूद में बीत गया। पर यूपी की इस सियासी उछल-कूद से बेखबर चचा शिवपाल अपने सूने सियासी शामियाने से बाहर नहीं निकल पाए। शायद वे अभी से मान चुके हों कि उनकी सियासत का रंग फिलहाल तो काला ही रहनेवाला है। इस बीच नासा के वैज्ञानिकों ने भी काले रंग पर खोज कर ही डाली। धरती से काफी दूर आकाशगंगा के किसी ब्लैक होल को खोजने व उसकी तस्वीर साकार करने की खबर वायरल होती रही। पर बगल में पड़ी यूपी की सियासत का ब्लैक होल अदृश्य ही बना रहा। दिन बीत गया, मतदान पूरा हो गया पर नैतिकता की साख पर बना ब्लैक होल कोई खोज तक नहीं पाया।