कुत्ते की मौत मारे गए अजहर के संपोले

भारतीय वायुसेना द्वारा कल नष्ट किया गया बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी शिविर, पाकिस्तान के खतरनाक आतंकी शिविरों में शामिल था। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार वायुसेना की कार्रवाई में कई शीर्ष आतंकी कमांडर ढेर हुए हैं। वायुसेना की कार्रवाई के वक्त वहां मौजूद २५ शीर्ष कमांडर, ट्रेनर सहित करीब ३०० से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की संभावना जताई गई है। जिनमें आतंकी सरगना मसूद अजहर के दो संपोले अर्थात भाई भी शामिल हैं। हिंदुस्थानी वायुसेना की कार्रवाई में मसूद अजहर के बड़े भाई इब्राहिम अजहर और मौलाना यूसुफ अजहर के मारे जाने की खबर है। यूसुफ अजहर जैश का बड़ा ट्रेनर था और इसके सरगना मसूद अजहर का रिश्तेदार भी था। मसूद को छुड़ाने के लिए १९९९ में एयर इंडिया के विमान को हाईजैक किए जाने में यूसुफ अजहर भी शामिल था। यूसुफ अजहर बालाकोट में आतंकी ट्रेनिंग वैंâप चला रहा था। यह वैंâप बालाकोट के आबादी वाले इलाके से दूर एक पहाड़ी पर था। साल २००० में इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया था।
बता दें कि बालाकोट में की गई कार्रवाई में जैश के सेकेंड इन कमांडर यूसुफ अजहर के अलावा आतंकी मसूद अजहर का भाई भी मारा गया। जैश के पांच शीर्ष कमांडर सहित २५ मोस्ट वांटेड आतंकियों के ढेर होने का दावा एजेंसियों द्वारा किया जा रह है। मसूद अजहर का बड़ा भाई इब्राहिम अजहर, मौलाना तलहा सैफ, मौलाना मुफ्ती अजहर खान, यूसुफ अजहर, मौलाना अम्मार भारतीय वायुसेना की कार्रवाई में ढेर हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि आतंकी शिविर में ४२ सुसाइड बॉम्बर तैयार किए जा रहे थे। हिंदुस्थान ने पहले जो डोजियर पाकिस्तान को सौंपे थे, उनमें भी मसूद के साले और उसके भाई का नाम शामिल था। सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान कितना भी नकारने का प्रयास करे पर सेटेलाइट मैपिंग और कार्रवाई के बाद हलचल से साफ है कि हिंदुस्थानी वायुसेना ने उनकी रीढ़ तोड़ने वाली कार्रवाई की है। बालाकोट नगर से २० किलोमीटर दूर स्थित इस शिविर का इस्तेमाल युद्ध प्रशिक्षण के लिए किया जाता था। पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी यहां ट्रेनर के तौर पर आते थे। कई मौकों पर जैश का संस्थापक आतंकी आका मसूद अजहर और अन्य आतंकवादी नेताओं द्वारा यहीं से भड़काऊ भाषण दिए गए थे। हिज्बुल ने भी इसका इस्तेमाल अपने लिए किया। यहां प्रशिक्षण लेनेवाले आतंकवादियों के रहने और उनके प्रशिक्षण के लिए सुविधाएं थीं। यहां जल मार्ग से घुसपैठ की ट्रेनिंग देने के इंतजाम के अलावा पांच सौ लोगों के रहने की व्यवस्था थी।