कुत्ते, मैं तेरा खून ले लूंगा!, डोनर बने डॉग

शोले फिल्म का डायलॉग ‘मैं तेरा खून पी जाऊंगा कुत्ते’ काफी प्रसिद्ध हुआ था। कुछ इसी प्रकार परेल स्थित पशु अस्पताल के डॉक्टरों ने बीमार व दुर्घटनाग्रस्त कुत्तों की जान बचाने के लिए दूसरे कुत्तों से कहा कि ‘मैं तेरा खून ले लूंगा।’ घबराएं नहीं, ये खून कोई जोर- जबरदस्ती से नहीं बल्कि कुत्तों के स्वास्थ्य को देखकर उनके मालिक की इजाजत के बाद ही लिया गया। यहां बीमार व जरूरतमंद कुत्तों को बचाने के लिए डॉग ही डोनर बने।
बता दें कि आज तक आपने मानव को रक्तदान करते हुए देखा व सुना होगा लेकिन कल परेल अस्पताल में विदेशी ब्रीड के डॉग ब्लड डोनर बने। जिस तरह मानव को रक्त की जरूरत पड़ती है, बिल्कुल उसी प्रकार जानवरों को भी आपातकालीन स्थिति में रक्त की जरूरत होती है। ऐसे में परेल स्थित जानवरों के अस्पताल में कल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था। जर्मन शेफर्ड, रोटविलर और लैब्राडोर जैसे विदेशी ब्रीड के कुत्तों ने रक्तदान किया, जिसका इस्तेमाल पालतू व आवारा कुत्तों की जान बचाने के लिए किया जाएगा। अस्पताल के संचालक डॉ. जे सी खन्ना ने बताया, ‘जिस तरह बीमारी या दुर्घटना के समय इंसान को खून की जरूरत पड़ती है, उसी प्रकार कुत्तों को भी रक्त की जरूरत होती है। सही समय पर रक्त न मिलने से उनकी जान भी जा सकती है। लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़े और वे अपने कुत्तों को रक्तदान के लिए लाएं, इसको ध्यान में रखकर हमने रक्तदान शिविर का आयोजन किया था। करीब २० लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था लेकिन १४ लोग ही आए। जांच के बाद ७ कुत्ते रक्तदान के लिए फिट पाए गए। नियमानुसार हमने कुत्ते के वजन का २० प्रतिशत खून निकाला। इसी के साथ उनके मालिकों को रक्तदान करने के बाद प्रेरणापत्र भी दिया गया। लोगों में धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ रही है। पहले कोई अपने डॉगी को रक्तदान के लिए नहीं लाता था लेकिन लोग अब धीरे-धीरे जागरूक हो रहे हैं।’
…ताकि खून खराब न हो
डॉ. खन्ना ने बताया कि कुत्तों का खून निकालने के बाद उसे ६ महीने तक ही रखा जा सकता है, उसके बाद वह खराब हो जाता है। इसी के मद्देनजर हमने मशीन की सहायता से खून में मौजूद घटकों जैसे प्लाज्मा, प्लेटलेट्स व सेल को खून से अलग कर लिया है। घटकों को अलग करने से खून सालभर से भी ज्यादा चलेंगे। जरूरतमंद जानवरों को जिस घटक की कमी होगी, उसे वही दिया जाएगा।