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कैशलेस होगा उपचार- मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

लॉकडाउन को शिथिलता देते हुए वायरस को अधिक गंभीरता से लें
देश की महत्वाकांक्षी योजना को जिलों में सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है

आज 80 प्रतिशत लोगों में कोरोना का लक्षण दिखाई नहीं देता है। स्थलांतरित और लॉकडाउन शिथिल करने के बाद प्रवास करने के कारण जिन जिले के नागरिकों में कोरोना दिखाई नहीं दे रहा था, वहां कोरोना के रोगी दिखाई देने लगे हैं। एकतरफ राज्य में अर्थचक्र शुरू कर रहे हैं इसलिए अपनी जिम्मेदारी अधिक बढ़ गई है। इस बात को ध्यान में रखकर कोरोना वायरस को अधिक गंभीरता से लेने के निर्देश कल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिए। जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत करते हुए उक्त निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने यह भी कहा कि महात्मा फुले जन आरोग्य की महत्वाकांक्षी योजना, जो सभी नागरिकों को कैशलेस उपचार प्रदान करती है, इसे जिलों में सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। इस मौके पर मुख्य सचिव अजोय मेहता ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। यद्यपि महाराष्ट्र में रोगियों की संख्या बढ़ी है लेकिन रोगी तेजी से ठीक भी हो रहे हैं। फील्ड अस्पताल में भर्ती, पल्स ऑक्सीमीटर, प्लाज्मा थेरेपी, 80 प्रतिशत बिस्तर आरक्षण, 100 प्रतिशत कैशलेस उपचार और कुछ अन्य चीजें प्रभावी हैं।   महाराष्ट्र देश में एक उदाहरण स्थापित करेगा, ऐसा मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया।
आप सभी मरीजों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए बहुत प्रयास कर रहे हैं लेकिन मेरे विचार में अब आप मरीजों को क्या प्रदान कर रहे हैं, आप उनके साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं, इसका उपचार कैसे किया जाता है, यह आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। संस्थागत अलगाव में रखे गए रोगियों की नियमित जांच बहुत जरूरी है। उनके शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को एक पल्स ऑक्सीमीटर से जांचना चाहिए, रक्तचाप की निगरानी की जानी चाहिए। परीक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। अधिक से अधिक घरों में सर्वेक्षण करके रोगियों को खोजना बहुत महत्वपूर्ण है। अस्पताल से रोगी के निर्वहन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए, ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा। इसके अलावा अन्य कई निर्देश मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को दिए।