" /> कोरोना: आपदा का अवसरवाद

कोरोना: आपदा का अवसरवाद

कोरोना वायरस की आपदा के चलते सामने आ रहे संक्रमण के मामलों ने देश में भय का माहौल बना दिया है। इसका असर बाज़ार में भी देखने को मिल रहा है। एक ओर लोग इस महामारी से लड़ने का हौसला जुटा रहे हैं तो दूसरी ओर लोग महंगी चीजें बेचकर मुनाफा कमाने की जुगत में लगे हैं। यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस संकट से हमें मिलकर लड़ना चाहिए, उसमें भी व्यावसायिक फायदा -नुकसान खोजा जा रहा है। बाजारों में मास्क और सेनेटाइजर जैसी चीजों की कालाबाजारी तक हो रही है। इन तकलीफदेह हालातों में इन चीजों को मनमानी कीमत पर बेचा जा रहा है। गौरतलब है कि इन दिनों कोरोना वायरस के पैâलाव से बचने के लिए मास्क और सेनेटाइजर की मांग बढ़ गई है। इसीलिए इनकी मनमानी कीमत वसूलने की शिकायतें भी मिल रही हैं। यह वाकई अफसोसजनक है कि ऐसी संकटकालीन स्थिति में भी लोग अपने व्यावसायिक हित साध रहे हैं।
सुखद है सरकार ने इस मामले में सक्रियता दिखाई है। कोविड- १९ के संक्रमण से जुड़ी बातों को लेकर नागरिकों को जागरूक करने के साथ ही बाजार में मास्क और सेनेटाइजर की अनुपलब्धता को देखते हुए सरकार ने इन दोनों वस्तुओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम में शामिल करने का पैâसला लिया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय के मुताबिक बीते कुछ सप्ताहों के दौरान कोरोना वायरस के प्रकोप और कोविड-१९ प्रबंधन के लिए लॉजिस्टिक संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय किया है। मौजूदा समय में मास्क और हैंड सेनेटाइजर या तो बाजार में अधिकांश विक्रेताओं के पास उपलब्ध नहीं है या बहुत अधिक कीमतों पर बड़ी मुश्किल से मिल पा रहे हैं। यही वजह है कि सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, १९५५ की अनुसूची में संशोधन कर मास्क और सेनेटाइजर को ३० जून, २०२० तक आवश्यक वस्तु अधिनियम, १९५५ के तहत आवश्यक वस्तु के रूप में घोषित करने का आदेश दिया है। इस मामले में सरकार ने एडवाइजरी भी जारी की है। जिसमें आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत, राज्य, विनिर्माताओं के साथ बातचीत कर इन वस्तुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के साथ ही इन दोनों चीजों की बिक्री अधिकतम खुदरा मूल्य पर हो, यह सुनिश्चित कर सकते हैं। नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि मास्क और सेनेटाइजर की उपलब्धता और कीमत पर नजर रखने के साथ ही यह भी ध्यान रखें कि लोगों से एमआरपी से ज्यादा कीमत न वसूली जाए। कोरोना वायरस से बचाव से लिए आमजन तक सबसे जरूरी उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाया गया यह कदम वाकई सुचिंतित और सराहनीय कदम है।
गौरतलब है कि दुनियाभर में पैâले कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए स्वच्छता और खान-पान पर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है। यह संक्रमण बहुत तेजी से पैâलता है। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी विश्वव्यापी महामारी घोषित किया है। साथ ही इसकी रोकथाम के मद्देनजर फेस्क मास्क और हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी है। हमारे यहां भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें मुख्य रूप से साफ-सफाई और खाने की चीजों को लेकर सतर्क रहने की बात की गई है। इन गाइडलाइंस में हाथों को साबुन से धोना, खांसते और छींकते समय नाक और मुंह पर रूमाल या टिश्‍यू पेपर रखना, सर्दी-खांसी के लक्षणवाले लोगों से दूरी बनाकर रखना, अंडे और मांस के सेवन से दूरी, जंगली जानवरों के संपर्क में न आने और भीड़-भाड़वाले स्थानों पर जाने के लिए मास्क के इस्तेमाल जैसी बातें शामिल हैं ऐसे में सरकार का यह निर्णय बेहद जरूरी था। क्योंकि हमारे यहां मास्क ५ से १० गुना तक ज्यादा कीमत में बेचे जा रहे हैं। सेनेटाइजर बाजार से गायब हो गए हैं जबकि इस सामुदायिक स्वास्थ्य के संकट से मिलकर लड़ने की दरकार है। इस वायरस से बचानेवाली इन वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी की बजाय इनकी उपलब्धता बढ़ाने और इस्तेमाल की जागरूकता लाने की जरूरत है।
दरअसल अच्छे आचरण और संवेदनशील व्यवहार का पाठ किसी भी देश के नागरिकों को जबरदस्ती नहीं पढ़ाया जा सकता। न ही यह समझाया जा सकता है कि कोई आपदा कारोबारी तरक्की का अवसर नहीं होती। मानवीय व्यवहार के इस विघटन में प्रशासन और कानून कुछ नहीं कर सकता। यह मामला नैतिक और व्यक्तिगत सोच का ज्यादा है। लेकिन ऐसी आपदा के समय भी अगर कुछ लोग स्वार्थ साधने की सोच अपनाएं तो कानूनी सख्ती बरतना भी जरूरी है। गौरतलब है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम का उल्लंघन करनेवालों को सात साल कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है। जुर्माना भरना पड़ सकता है या जेल व जुर्माना दोनों से दंडित किया जा सकता है। लेकिन विचारणीय है तो यह कि ऐसे मामले में भी सरकार और कानून को दखल देना पड़ रहा है, जो मानवीय सोच और व्यवहार से जुड़ा है। एक आम नागरिक के दायित्व बोध से संबंधित है। जरूरी है कि कमाई का अवसर बनाने की अफसोसजनक मानसिकता की बजाय कोरोना वायरस के प्रकोप का सजगता और सह-अस्तित्व के भाव के साथ सामना किया जाय।