" /> कोरोना काल के चलते नाग पंचमी पर नही दिखी काशी के अखाड़ों की रौनक,परंपराओं की निभाई गई औपचारिकता

कोरोना काल के चलते नाग पंचमी पर नही दिखी काशी के अखाड़ों की रौनक,परंपराओं की निभाई गई औपचारिकता

काशी अपनी परंपराओं को सहेजने के लिए भी जानी जाती है। काशी में नाग पंचमी पर अखाड़ों में कुश्ती लड़ने और जोड़ी-गदा फेरने की पुरानी परंपरा है। ऐसी ही एक परंपरा शनिवार को नाग पंचमी पर निभाई गई।कोरोना काल के चलते इस बार इन अखाड़ों में वह रौनक नही दिखी जो पूर्व के वर्षों में दिखती थी।इन अखाड़ों में नमी गिरामी पहलवानो का जमघट होता था, ये या तो खुद जोर आजमाइश करते या अपने शागिर्दों से करवाते थे।इन पुरानी परम्पराओं के औपचारिकता निभाने के लिए शनिवार को नाग पंचमी पर्व पर काशी के विभिन्न अखाड़ों में नाम मात्र के पहलवान उतरे और जोर आजमाइश की। इस दौरान एक नई बात यह भी रही कि पहलवानों ने मास्क पहनकर एक दूसरे से मुकाबला किया।

वाराणसी में हर साल नाग पंचमी पर कुश्ती दंगल होता है। इसकी तैयारियां कई दिनों पहले से शुरू हो जाती हैं। पारंपरिक अखाड़ों के अलावा भी नाग पंचमी के दिन कुश्ती लड़ी जाती है। प्रमुख मुहल्लों में ट्रैक्टर से मिट्टी गिरवाकर अखाड़ा बनाया जाता है। इसी पर पहलवान जोर आजमाइश करते हैं।और गदा और जोड़ी की प्रतियोगिताएं भी होती हैं। इन्हें देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है।

नाग पंचमी के दिन कई पहलवान तो एक से ज्यादा अखाड़ों में जोर आजमाइश करने जाते हैं। यहां इनाम के रूप में बर्तन, गमछा से लेकर नगद रुपयों की बौछार होती है। इस बार माहौल उस तरह का भले नहीं रहा लेकिन कई अखाड़ों ने परंपरा का निर्वहन जरूर किया ।
लोहटिया स्थित अंतरराष्ट्रीय अखाड़ा बड़ा गणेश में कुश्ती दंगल का आयोजन हुआ। कुश्ती शुरू करने से पहले भगवान गणपति की पूजा भी की गई। पहलवानों ने अखाड़े को खोदने की परंपरा भी निभाई। अखाड़े पर मौजूद यूपी केशरी और राष्ट्रीय चैंपियन कृष्णकुमार सिंह ने बताया कि परंपरा को निभाने के लिए केवल दो तीन कुश्ती ही लड़ी गई। ताकि नागपंचमी पर कुश्ती लड़ने की परंपरा बनी रहे। पहलवानों ने मास्क भी पहने रहा और अन्य नियमों का भी पालन किया गया। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय पहलवान नरेश ने रेफरी की भूमिका निभाई। वहीं, परमानंदपुर में स्थित अखाड़े पर पहलवान जुटे और केवल पूजा की गई। कोरोना के कारण कुश्ती नहीं लड़ी।