" /> कोरोना काल महाजनों की चांदी

कोरोना काल महाजनों की चांदी

कोरोना काल में ऐसा नहीं है कि सिर्फ हेल्थ और ऑनलाइन सेक्टर की चांदी थी। एक सेक्टर और था जो सिर्फ पैसे से ही पैसा पैदा कर रहा था, वह था सर्वोच्च आय वर्ग, जिनकी ताकत उनकी नगदी तरलता थी। जितनी ज्यादा नगदी तरलता, उतनी ही ज्यादा बारगेनिंग पॉवर। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया जबरदस्त तरीके से नगदी संकट का सामना कर रही थी और पैसे के जुगाड़ में अपना जेवर, प्रॉपर्टी के कागज या गाड़ी ले हर उस आदमी के दरवाजे पर खड़ी थी जो उसे इस संकट के समय पर पैसा दे दे, ऐसी परिस्थिति का खूब फायदा उठाया महाजनी चरित्र के अमीरों ने और अपनी कठिन शर्तों तथा उच्च ब्याज दरों पर लोगों को पैसे बांटे। यहां तक कि बैकों एवं गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों ने भी ब्याज के मामले में कोई उदारता नहीं दिखाई। महाजनी चरित्र के लोग ऐसी परिस्थितियों का लाभ उठा संपत्तियों को उनके वास्तविक मूल्य से भी काफी नीचे की कीमत पर खरीदी करने लगे। लोग मजबूर थे जो भी कीमत मिल जाती, बेचने के लिए तैयार हो जाते क्योंकि बाजार में खरीद की ताकत रखने वाले मुट्ठी भर यही लोग बचे थे। यही कारण है कि इस कोरोना काल में ऐसे महाजनीय चरित्र वाले अमीरों की संपत्ति में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि हुई तो वहीं इनके इतर अन्य लोगों की संपत्ति में गिरावट और आगे जो अभी वैक्सीन आने के हालात दिख रहें हैं लगता है आगे भी ऐसी ही उम्मीद रहेगी।
एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना काल में चुनिन्दा अरबपतियों की कमाई में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है। अपने ही देश में ऊपर के टॉप १०० अमीरों की संपत्ति पिछले साल पहले की तुलना में १४ फीसदी बढ़ गई है। भारत में इकनॉमिक आंकड़े जहां गोते लगा रहे थे कई मौके ऐसे आये जब शेयर बाजार उछाल मार रहा था, मतलब पैसे से ही पैसे पैदा हो रहे थे और उसमें गुड एवं सर्विस का योगदान कम था। अमेरिका के प्रोग्रेसिव थिंकटैंक द इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, महामारी के दौरान करीब ६४३ अरबपतियों की संपत्ति तीन गुना बढ़ी है। लेकिन इसी के साथ गरीबी को लेकर वर्ल्ड बैंक के रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना प्रकोप के कारण अगले साल तक दुनिया की १५ करोड़ से ज्यादा आबादी पहले से ज्यादा गरीब हो जाएगी। वहीं संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि कोरोना महामारी के कारण करीब २.७ करोड़ लोग दुनियाभर में भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की स्टडी के अनुसार कोरोना के चलते अब तक करीब १४.७ करोड़ लोग बेरोजगार हो चुके हैं। बिल गेट्स की संस्था बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी ने लगभग ३.७ करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी में धकेल दिया है।
हाल ही में वैश्विक रिसर्च कम्पनी प्राइस वाटर हाउस और यूबीएस की रिपोर्ट रिलीज हुई है उनके मुताबिक आज दुनिया में अरबपतियों की संपत्ति अपने सर्वोच्च स्तर १०.२ ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गई है जबकि इसके पहले का सर्वोच्च ८.९ ट्रिलियन डॉलर वर्ष २०१७ का था। अरबपतियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जहां वर्ष २०१७ में यह २१५८ था वहीं २०२० में यह बढ़कर २१८९ हो गया है। यह बढ़ोत्तरी अपने आप में कुछ कहती है। जब दुनिया के कई देश मंदी की तरफ थे तो वहीं कुछ खास तबके ऐसे थे जिनकी सम्पत्ति बढ़ रही थी। आज वैज्ञानिक, कंप्यूटर प्रोग्रामर और इंजीनियर क्रांति का समय है और इतनी गति से उद्योग बढ़ोत्तरी कभी नहीं देखी गई है।
हालांकि प्राइस वाटर हाउस और यूबीएस की रिपोर्ट में अमीरों की वृद्धि के कई और अन्य पारिस्थिकीय कारण गिनाए हैं जिसका निर्माण इस कोरोना के कारण उपजे नए कोरोनामिक्स के कारण हुआ है। उनका कहना है कि वृद्धि के प्रमुख कारणों में नवाचार में निवेश और हेल्थ एवं तकनीक सेक्टर में वृद्धि रही है। बकौल भारतीय वैज्ञानिक डॉ राम उपाध्याय लक्साई लाइफ साइंस कम्पनी के सीईओ का कहना है कि अगली सदी तकनीक के अलावा एग्रो एवं हेल्थ सेक्टर की होगी। इंसानों ने जितनी भौतिक प्रगति की है अपने आरामतलब जिन्दगी को विकसित करने में उससे अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। इसके कारण स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को रोकने के लिए इसलिए अगली सदी एग्रो एवं हेल्थ सेक्टर में विकास का होगा।
इस नए विकसित हुए कोरोनामिक्स ने कईयों के गणित गड़बड़ा दिए हैं तो कईयों के लिए नए द्वार खोले हैं। इस कोरोना काल में जब आर्थिक गतिविधियां लॉकडाउन के दौरान बंद थीं और अनलॉक की प्रक्रिया के दौरान धीरे-धीरे खुल रही थीं, उसमें वही लोग ज्यादा फायदे में थे जिनके पैसे पैसों के पेड़ पर ही उगते थे। जैसे महाजन या बैंकिंग सिस्टम क्योंकि उनके बांटे हुए पैसों पर प्रतिदिन ब्याज का मीटर चल रहा था, बजाय इसके कि इकॉनमी की साइकिल चल रही है या नहीं। इसका फायदा बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों ने खूब उठाया और सरकार द्वारा दी रही मोरेटेरियम सुविधा में भी ब्याज के ऊपर ब्याज लगाया।
अमीरों का खूब अमीर बनना और गरीबों का पहले से भी ज्यादा गरीब बनते जाना इकॉनमी की साइकिल के हिसाब से सही चक्र नहीं कहा जाएगा और इसे रोकने के लिए सरकार को ही पहले कदम उठाने पड़ेंगे और पहले सुधार के रूप में सरकार को बैंकों एवं गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों द्वारा लगाये जा रहे ब्याज पर ब्याज प्रक्रिया को रोकना पड़ेगा। माइक्रो फाइनेंस को बढ़ावा देते हुए बांटे गए ऋण की मोनिटरिंग बढ़ानी पड़ेगी। बैंकों को महाजनी चरित्र से बाहर आकर व्यापार मित्र की भूमिका निभानी पड़ेगी। त्योहारी और शादी विवाह का सीजन आ रहा है। भारत में यही सबसे ज्यादा व्यापार का समय होता है। ऐसे समय में आम जनता के हाथों में पैसा पहुंचाना पड़ेगा ताकि वह पैसा लोग बाजार खरीद में इस्तेमाल करे जिससे इकॉनमी का जो पहिया रुक गया था वह फिर से पुनः चलना चालू करे।
सरकार ने भी कोरोना महामारी के कारण मंदी से जूझ रही इकॉनमी में तेजी लाने के लिए हाल ही में कई बड़ी घोषणाएं कीं। सरकार का अनुमान है की इन योजनाओं से इकॉनमी में १ लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त मांग पैदा होगी जिससे कोरोनावायरस महामारी से प्रभावित हुई इकॉनमी को लाभ मिलेगा और कारोबार को जारी रखने के लिए बाजार में मांग बढ़ने का इंतजार कर रहे लोगों को राहत मिलेगी। सरकार की इन प्रमुख घोषणाओं में केंद्रीय कर्मचारियों १०,००० रुपए का वन टाइम स्पेशल फेस्टिवल लोन , एलटीसी कैश वाउचर स्कीम के तहत १२ फीसदी या इससे ज्यादा टैक्स वाले किसी भी सामान की खरीदारी और टैक्स में छूट, पूंजीगत खर्च बढ़ाने के लिए ३७,००० करोड़ रुपए का पैकेज जिसमें राज्य सरकारों को अगले ५० साल के लिए १२,००० करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त लोन भी शामिल है, मनरेगा के काम में बढ़ोत्तरी भी शामिल है।