" /> कोरोना को लेकर सच में कश्मीर के हालात नियंत्रण से बाहर?

कोरोना को लेकर सच में कश्मीर के हालात नियंत्रण से बाहर?

इसे अब दबे स्वर में स्वीकार किया जा रहा है कि कश्मीर में कम्युनिटी ट्रांसमिशन आरंभ हो चुका है। दो हफ्तों में रेड जोनों की संख्या दोगुनी हो जाने तथा कई गांवों से बीसियों पाजिटिवक मामले सामने आने के बाद यह स्पष्ट दिखने लगा है कि कोरोना को लेकर कश्मीर के हालत नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। यही कारण है कि प्रशासन ने 20 अप्रैल से दी जाने वाली ढील के दायरे से पूरे कश्मीर को ही बाहर रखा है क्योंकि 84 रेड जोन कश्मीर वादी के सभी जिलों में फैले हुए हैं। हालांकि जम्मू संभाग में रेड जोनों की संख्या 7 है जिस कारण वहां भी ढील में कोई छूट नहीं दी जा रही है।

कश्मीर के मंडलायुक्त पांडुरंग पोले भी मानते हैं कि रेड जोनों की संख्या में तीव्र गति से होने वाली वृद्धि चिंता का विषय है। यही कारण था कि रेड जोन को और बढ़ने से रोकने की खातिर संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों को तलाश करने के साथ ही अधिक से अधिक टेस्ट करने की मुहिम युद्ध स्तर पर छेड़ी जा चुकी है।

दरअसल बांडीपोरा में बढ़ती संक्रमितों की संख्या परेशानी पैदा करने वाली है। यह परेशानी इसलिए है क्योंकि जम्मू कश्मीर में जितने मामले अभी तक सामने आए हैं उसके 25 परसेंट सिर्फ बांडीपोरा से संबंध रखते हैं। ऐसे में कम्युनिटी ट्रांसमिशन के शब्द का इस्तेमाल बांडीपोरा के उन गांवों के लिए किया जाने लगा है जहां संक्रमितों की बाढ़ आ चुकी है।
बांडीपोरा की इस हालत के कारण उसके आसपास के गांवों में भी कम्युनिटी ट्रांसमिशन फैलने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि बांडीपोरा के उन सभी रेड जोन गांवों को पूरी तरह से सीलबंद करते हुए लाकडाउन के स्थान पर कर्फ्यू पाबंदियां लागू की गई हैं पर पाजिटिव मरीजों का आंकड़ा नीचे आने को तैयार ही नहीं है।

कश्मीर में जो मामले सामने आ रहे हैं उनके प्रति एक सच यह भी है कि 90 प्रतिशत में लक्षण ही नहीं दिखाई दिए थे। खासकर बांडीपोरा में ऐसे मामले सामने आए हैं, उनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री भी नहीं थी। ऐसे में इन लक्षणों को क्या कम्युनिटी ट्रांसमिशन कहा जा सकता है, के प्रति बांडीपोरा में तैनात अफसर सईद शहनवाज बुखारी कोई जवाब नहीं देते थे।

ऐसे में कश्मीर के दोगुने हो चुके रेड जोनों में युद्धस्तर पर कार्रवाईयां तेज की गई हैं। मास एंड रैपिड टेस्टिंग का भी सहारा लिया जा रहा है पर टेस्ट किटों की कमी इसमें कहीं न कहीं रूकावट जरूर डाल रही थी। तमाम दावों के बावजूद कश्मीर के डाक्टर अभी भी पूरी जांच सामग्री की कमी का रोना जरूर रो रहे थे।