" /> कोरोना को हरा चुके लोग अब कोरोना बाधितों को बचाएंगे : मनपा अस्पतालों में होगी प्लाज्मा थेरेपी

कोरोना को हरा चुके लोग अब कोरोना बाधितों को बचाएंगे : मनपा अस्पतालों में होगी प्लाज्मा थेरेपी

मुंबई के मनपा अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों का इलाज अब प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल करके किया जाएगा। कोरोना को हरा चुके लोगों का प्लाज्मा लेकर उससे कोरोना बाधित मरीजों को ठीक किया जाएगा। कोरोना से स्वस्थ हुए तीन मरीजों के शरीर से आज तीन यूनिट प्लाज्मा इकट्ठा किया गया है।
बता दें कि कई राज्यों में कोरोना मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी कारगर साबित हो रहा है। अब यही थेरेपी मनपा अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों पर किया जाएगा। प्लाज्मा डोनर के रूप में मनपा ने कोरोना को हरा चुके मरीजों को चुना है। इस प्रक्रिया के लिए लगनेवाली प्लाज्मा फेरेसिस मशीन नायर अस्पताल में कार्यान्वित है। स्वस्थ हुए कोरोना मरीजों को वहां बुलाकर उनके शरीर से प्लाज्मा लिया जाता है। यह प्लाज्मा उसके खून में बनता है। इसकी मदद से एक से दो और मरीजों को ठीक किया जा सकता है।
क्या है प्लाज्मा थेरेपी?
सीधे तौर पर इस थेरपी में एंटीबॉडी का इस्तेमाल किया जाता है। किसी खास वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी तभी बनता है, जब इंसान उससे पीड़ित होता है। अभी कोरोना वायरस फैला हुआ है, जो मरीज इस वायरस की वजह से बीमार हुआ था। जब वह ठीक हो जाता है तो उसके शरीर में इस कोविड वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनता है। इसी एंटीबॉडी के बल पर मरीज ठीक होता है, जब कोई मरीज बीमार रहता है तो उसमें एंटीबॉडी तुरंत नहीं बनता है, उसके शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनने में देरी की वजह से वह सीरियस हो जाता है। ऐसे में जो मरीज अभी अभी इस वायरस से ठीक हुआ है, उसके शरीर में एंटीबॉडी बना होता है, वही एंटबॉडी उसके शरीर से निकालकर दूसरे बीमार मरीज में डाल दिया जाता है। वहां जैसे ही एंटीबॉडी जाता है मरीज पर इसका असर होता है और वायरस कमजोर होने लगता है, इससे मरीज के ठीक होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है।
कैसे काम करती है प्लाज्मा थेरेपी?
डॉक्टरों की माने तो कोरोना वायरस की मोटे तौर पर तीन स्टेज हैं। पहली में वायरस शरीर में जाता है। दूसरी में यह फेफड़ों तक पहुंचता है और तीसरे में शरीर इससे लड़ने और इसे मारने की कोशिश करता है जो सबसे खतरनाक स्टेज होती है। यहां शरीर के अंग तक खराब हो जाते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि प्लाज्मा से इलाज के लिए सबसे सही वक्त दूसरी स्टेज होती है। क्योंकि पहली में इसे देने का फायदा नहीं और तीसरी में यह कारगर नहीं रहेगा। उनके मुताबिक, प्लाज्मा थेरपी मरीज को तीसरी स्टेज तक जाने से रोक सकती है।