" /> कोरोना न धोना

कोरोना न धोना

अफवाह पर सवार
अफवाहों के पैर नहीं होते मगर पंख होते हैं, जो दिखते नहीं। इसलिए दिल्ली दंगों में मारे गए आईबी के जवान अंकित शर्मा की नृशंस हत्या से संबंधित एक मैसेज व्हॉट्सऐप यूनिवर्सिटी पर चला तो सीधा संसद भवन तक पहुंच गया। होली के बाद देश के गृहमंत्री ने बताया कि अंकित शर्मा के शरीर पर ४०० घाव थे। गृहमंत्री बोले तो पार्टी सांसद मीनाक्षी लेखी और लोकसभा और प्रवक्ता व राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा में अंकित के घावों के इन्हीं आंकड़ों को दोहरा दिया। यह ब्रेकिंग खबर एक टीवी चैनल की रणनीतिक संपादक ने ट्वीटर पर चस्पां की थी, जो अगली सुबह हर चैनल और समाचार माध्यम पर चस्पां थी। २७ फरवरी को अंकित शर्मा का पोस्टमॉर्टम हुआ था और उसके बाद यह खबर अफवाहबाजों द्वारा पैâला दी गई। जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अंकित के शरीर पर ५१ चोटें दर्ज हैं, जिनमें १३ घाव चाकू या अन्य धारदार हथियार से गोदने के मिले हैं। अब यह तो देश के गृहमंत्री ही जानते होंगे कि ४०० घाव की जानकारी उन्हें किसने दी थी? कम से कम अपने शर्लाक होम्स से ही कन्फर्म कर लेते। उस संपादक और अन्य खबरी जमात ने यह जहमत नहीं उठाई कि एक बार अपनी आंख से अंकित की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देख ले।
झंडा सलामी
चुनाव की बयार सामने देख बिहार में राष्ट्रीय जनता दल एक्शन मोड में है। नए-नए प्रदेश अध्यक्ष बने जगदानंद सिंह ने सबसे पहले पार्टी दफ्तर का मेकअप करवाया ताकि दफ्तर टनाटन दिखे। अब एक ताजा फरमान पार्टी कार्यकर्ताओं को जारी किया गया है कि पार्टी सुप्रीमो नंबर-२ यानी लालूपुत्र तेजस्वी का स्वागत फूल माला की बजाय पार्टी के झंडे से किया जाए। इस पत्र में पुराने पार्टी के साथियों को चिह्नित कर फिर उन्हें पार्टी में वापस लाने के लिए कहा गया है। इसके अलावा भाजपा के सोशल मीडिया पर अफवाह पर ज्यादा ध्यान न देने का भी निर्देश दिया गया है। साथ ही सक्रिय कार्यकर्ताओं की सूची राज्य मुख्यालय में इस महीने के अंत तक जमा करने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर भी राजद अपने खिलाफ प्रचार से परेशान होकर पार्टी के नेताओं को अधिक से अधिक ग्रुप बनाकर अपनी बात रखना चाहती है। माना जा रहा है कि ये दिशा-निर्देश तेजस्वी यादव के इशारे पर जारी किया गया है और आनेवाले दिन में तेजस्वी पार्टी की इमेज सुधारने के लिए ऐसे कई और कदम उठा सकते हैं। कल्पना करें अगर कोई कार्यकर्ता झंडे की बजाय डंडा समझ ले तो क्या होगा?
कोरोना न धोना
कोरोना के डर से दुनिया सहमी हुई है। ऐसे में कोरोना प्रभावित मरीजों के कपड़ों की साफ-सफाई भी एक समस्या बनकर उभर रही है। कम से कम यवतमाल के सरकारी अस्पताल के एकांत वॉर्ड में कोरोनाग्रसित तीन मरीज इस समस्या से जूझ रहे हैं। अस्पताल के धोबी ने उनके कपड़े धोने से मना कर दिया है। किसी ने अफवाह पैâला दी कि रोगियों के संपर्क में आने से कोरोना वायरस ज्यादा पैâलता है। अब अस्पताल प्रशासन कोरोनाग्रस्तों के कपड़े पहले अपने स्तर पर वायरस मुक्त कर, दो दिन बाद धोबिया पछाड़ के लिए देगा। पहले ये कपड़े एंटी वायरल पदार्थ में दो दिन भिगोए जाएंगे फिर धोबियों को दिए जाएंगे। इनमें बिस्तर, चादर, तकिया तथा गिलाफ आदि भी शामिल हैं।
जडेजा पर डाका
गुजरात में कांग्रेसी खेमे में सेंधमारी करने में जुटी भाजपा ने पहली चाल में कांग्रेस के ५ विधायकों के इस्तीफे तो दिलवा दिए लेकिन इससे उसके राज्यसभा प्रत्याशी नरहरि अमीन जीत ही जाएं इसमें संदेह है। इसलिए राज्यसभा चुनाव के लिए जोड़-तोड़ लोकतंत्र शबाब पर है। खबर है कि नया शिकार राकांपा विधायक कांधल जडेजा हुए हैं। कांधल ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को वोट देने की घोषणा की है। सवाल यह है कि जिस राकांपा के सर्वेसर्वा भाजपा के खिलाफ देशव्यापी अभियान की तैयारी में जुटे हों उसी पार्टी का विधायक पार्टी लाइन से अलग पैâसला लें! वैसे इस हृदय परिवर्तन को समझाना आसान है। पोरबंदर में जुर्म की दुनिया की गॉडमदर संतोखबेन जडेजा के बेटे कांधल २०१७ में चुनाव जीतने के बाद एक प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी को मारने रानावाव पुलिस थाने पहुंच गए थे। २० दिसंबर २०१७ यानी बुधवार की सुबह इन्होंने थाने में तोड़फोड़ की, फिर देर रात पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर लिया था। पोरबंदर की कुतियाणा सीट से चुने गए जडेजा को क्या मंत्र भाजपा ने दिया होगा? आप समझ सकते हैं। जान से मारने की धमकी और थाने पर हमले की सजा का डर जो न कराए। भाजपा तो बेकार ही बदनाम है।