" /> कोरोना संकट के बीच मॉनसून में अतिखतरनाक इमारत गिरने का खतरा

कोरोना संकट के बीच मॉनसून में अतिखतरनाक इमारत गिरने का खतरा

उल्हासनगर में एक तरफ कोरोना संक्रमण को लेकर लड़ाई शुरू है। इसी बीच मॉनसून में इमारत गिरने से  किसी तरह की जनहानि न हो, इस बात को ध्यान में रखते हुए उमपा प्रशासन ने 28 मई को खतरनाक इमारत की मरम्मत करने तथा अतिखतरनाक इमारत को उस इमारत में रहनेवाले निवासी स्वयं तोड़ें इस तरह का आदेश जारी किया गया है। इस आदेश को लेकर खतरनाक व अतिखतरनाक में रह रहे लोगों में हड़कंप मच गया है।
उल्हासनगर में इमारत गिरने से अब तक तकरीबन 25 लोग अपनी जान इमारत के मलबे के नीचे दबकर गंवा चुके हैं। आगे इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए उमपा प्रशासन ने सुरक्षा के तौर पर उल्हासनगर की खतरनाक 214 व अतिखतरनाक 41 इमारतों को नोटिस जारी कर उनमें रहनेवाले लोगों को बताया गया है कि अतिखतरनाक इमारत में रह रहे लोग 7 दिन के भीतर इमारत को तुड़वाएं अन्यथा उमपा प्रशासन खुद तोड़कर तोड़ने पर लगा खर्च इमारत में रहनेवाले लोगों से वसूलेगी, वहीं खतरनाक इमारत के निवासियों को बताया गया है कि इंजीनियर से अपनी इमारत का स्ट्रक्चर परीक्षण करवाएं तथा उसकी मरम्मत कराकर उसका प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें। ऐसा न करने पर किसी भी तरह के हादसे के लिए उमपा प्रशासन जिम्मेदार न होते हुए, उसमें रहनेवाले लोग दोषी होंगे। प्रभाग-दो के प्रभाग अधिकारी (सहायक आयुक्त) भगवान कुमावत ने अंबिका सागर अपार्टमेंट, जो उल्हासनगर कैंप नंबर 3, हीराघाट के समीप स्थित पवई परिसर में स्थित है। इस इमारत की एक फ्लैट की छत गिरने से एक मासूम बालक की, जहां पर मौत हो गई थी, वहीं दो वृद्ध पति-पत्नी घायल हो गए थे। उस इमारत के साथ अन्य 41 इमारतों को तोड़ने का आदेश दिए जाने से उल्हासनगर में हडकंप मच गया है। इतना ही नहीं आदेश की प्रति इमारत पर चिपकाई गई हैं। उमपा की नोटिस मिलते ही उल्हासनगर में राजनीति भी गरमा गई है कि कोरोना बीमारी की सतर्कता को लेकर प्रशासन की तरफ से की गई लॉकडाउन, कर्फ्यू से तबाह हुए लोग जो खाने को मोहताज हैं वे इमारत को तोडऩे व रिपेयरिंग के लिए धन कहां से लाएं? इस मुसीबत से निपटने के लिए समाजसेविका काजल मूलचंदानी ने आयुक्त समीर उन्हाले से मिलकर इमारत से परेशान लोगों की राह आसान करने की मांग की है।