" /> कोरोना से बचा तो पाकिस्तान के ही हाथों मरेगा दाऊद!

कोरोना से बचा तो पाकिस्तान के ही हाथों मरेगा दाऊद!

– डी से पिंड छुड़ाना चाहती है आईएसआई

-‘लादेन शॉटडाउन थ्योरी’ में नजर आ रही है उम्मीद
-कागज पर नहीं असल में डी का कांटा हटाना है मकसद
– अंतरराष्ट्रीय दबाव से परेशान है इमरान सरकार

हिंदुस्थान के लिए मोस्ट वॉन्टेड अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की मौत की खबरें पिछले 2 दिनों से सुर्खियों में हैं। कहा जा रहा है कि दाऊद इब्राहिम जानलेवा वायरस कोरोना से मारा गया है। उसकी मौत कराची के आर्मी अस्पताल में हो गई है। यह खबर कितनी सच है और कितनी झूठी, इस पर से पर्दा तो आने वाले कुछ समय में हट ही जाएगा पर एक बात तो तय है कि अब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई किसी भी तरह डी से पिंड छुड़ाना चाहती है, दाऊद को खुद ही मरवाना चाहती है। इसीलिए खुफिया तंत्र भी मानता है कि यदि कल को दाऊद कोरोना से बच भी गया तो आईएसआई के हाथों नहीं बचेगा।

दरअसल, शुक्रवार को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि दाऊद और उसकी पत्नी गंभीर रूप से कोरोना संक्रमित हैं और कराची के आर्मी हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है। इसके बाद शनिवार को उसकी मौत की खबरें आने लगीं। हालांकि इनकी पुष्टि नहीं हो सकी। उस पर डी खेमे से आई खबरों में भी इसका खंडन कर दिया गया। जबकि इंटेलिजेंस एजेंसियों के हवाले वाली रिपोर्ट्स में कहा गया था कि कराची के क्लिफ्टन इलाके में रहनेवाला दाऊद और उसकी पत्नी कोरोना पॉजिटिव हैं और पाकिस्तान आर्मी की इंटेलिजेंस यूनिट और आईएसआई की उस पर पैनी नजर रखी हुई है।

मुम्बई में हुए 1993 के श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों के बाद से ही दाऊद मोस्ट वॉन्टेड की सूची में है। इसलिए पाकिस्तान पर दाऊद को हिंदुस्थान को सौंपने का दबाव लगातार बना रहता है। 9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के बाद हिंदुस्थान के अलावा दुनिया के कई देशों ने इसके लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था लेकिन पाकिस्तान दाऊद के कराची में होने की खबरों को हमेशा नकारता रहा। बल्कि वह बीच-बीच में दाऊद की मौत की झूठी खबरें उड़ाकर इससे बचने की कोशिश भी करता रहा। आईएसआई ने कभी दाऊद को गैंग्रीन बीमारी से मरवाया तो कभी एड्स से। उसके द्वारा छोड़ी गई सुरसुरियों में दाऊद कई बार मारा जा चुका है। अब तक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को लगता था कि ऐसा करने से उन पर बना दाऊद को सौंपने का दबाव खत्म हो जाएगा। दुनिया को लगेगा कि दाऊद मर चुका है परन्तु हर बार खुफिया एजेंसियों को दाऊद के जिंदा होने के सबूत मिल गए और उसी के साथ पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई पर दाऊद को सौंपने का दबाव भी दोबारा बनने लगा।
दाऊद को बचाने में पाकिस्तान को तब तक खासी दिलचस्पी थी जब तक दाऊद पाकिस्तान और आईएसआई के लिए जरूरी प्यादा था। इसलिए पाकिस्तान उसे और उसके परिवार को पूर्ण संरक्षण दिए हुए था पर पिछले एक दशक से दाऊद पाकिस्तान के किसी काम का नहीं रह गया है। आईएसआई की तमाम इच्छाओं के बावजूद वह हिंदुस्थान विरोधी किसी मुहिम का हिस्सा नहीं बन पा रहा है। बल्कि उसने पाकिस्तान से संरक्षण लेकर अपना पूरा व्यापार दुबई में शिफ्ट कर लिया है। इस बात की पुष्टि दाऊद के भाई अनीस इब्राहिम ने भी की है। अनीस के हवाले से आई ताज़ा खबरों में भी बताया गया है कि डी कंपनी पाकिस्तान और दुबई के जरिए बिजनेस चला रही है। अनीस के मुताबिक डी कंपनी का यूएई में लग्जरी होटल, पाकिस्तान में बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट और ट्रांसपोर्ट का बिजनेस भी चल रहा है। यही वजह है कि पिछले एक दशक से आईएसआई को दाऊद नकारा लगने लगा है और वो उससे किसी तरह छुटकारा पाने का सुरक्षित रास्ता खोज रही है। इसीलिए अब वो दाऊद को कागजों पर नहीं, बल्कि असल में मरवाना चाहती है। दाऊद की पाकिस्तान में मौजूदगी से इमरान सरकार पर भी लगातार दबाव बना हुआ है। सरकार लादेन कांड की जलालत के बाद एक और जलालत नहीं उठाना चाहती। कभी अलकायदा का आतंकवादी सरगना ओसामा बिन लादेन उसके गले की हड्डी बना था, अब दाऊद बन गया है। अब दाऊद भी उसके लिए लायबिलिटी बन चुका है।
खुफिया सूत्रों को लगता है कि जब से अमेरिका द्वारा एबोटाबाद में किए गए ऑपरेशन में लादेन मारा गया है तब से पाकिस्तान को इसी में दाऊद से छुटकारे की उम्मीद नज़र आ रही है। पाकिस्तान को लगता है कि जिस तरह लादेन की मौत के बाद उस पर से लादेन को सौंपने का अमेरिकी दबाव ही खत्म हो गया था, उसी तरह दाऊद की मौत के बाद उसे इससे भी छुटकारा मिल जाएगा। शुरुआत में तो पाकिस्तान के लिए सार्वजनिक तौर पर यह स्वीकार कर पाना बेहद कठिन था कि लादेन पाकिस्तान में ही था पर बाद में उसने मान लिया। पाकिस्तान ने गौर किया कि ऐसा करने से एक तो उसे लादेन को लेकर बने दबाव से राहत मिल गई और दूसरे दुनिया जल्द ही उस मामले को भूल भी गई। इसीलिए अब पाकिस्तान ‘लादेन शॉटडाउन थ्योरी’ से ही दाऊद से भी छुटकारा चाहता है। क्योंकि वो अब उसके किसी काम का नहीं रह गया है। ओसामा बिन लादेन की तरह पाकिस्तान के लिए बेकार है दाऊद। पिछले एक-डेढ़ दशक से दाऊद हिंदुस्तान में पाकिस्तान के इशारे पर और उसकी चाहत के अनुसार कुछ भी कर पाने में असफल साबित हो रहा है। इसलिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई डी कंपनी से किसी भी तरह पीछा छुड़ाने को बेताब है। दाऊद मर गया तो समझो अंतरराष्ट्रीय दबाव से भी उसे छुटकारा मिल जाएगा। तब पाकिस्तान दाऊद से ध्यान हटाकर, उसकी सुरक्षा में लगे भारी भरकम लाव-लश्कर को हटाकर दूसरी जगह ध्यान दे पायेगा। वह अब कश्मीर पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है और उस काम के लिए डी कंपनी उसके किसी काम की नहीं है। इसलिए दाऊद अब उसके लिए बेकार की चीज है। इसलिए इस बात की भी संभावना है कि आईएसआई किसी दुर्घटना की साजिश रचकर दाऊद को मरवाकर उससे अपना पिंड छुड़ा ले।