" /> कोरोना से बेहाल अर्थतंत्र

कोरोना से बेहाल अर्थतंत्र

कोरोना वायरस से वैश्विक स्तर पर दहशत का माहौल बना हुआ है। अब तक ६७ देशों को यह अपनी गिरफ्त में ले चुका है, जिसमें बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। चीन में मरनेवालों की संख्या कम हो गई है लेकिन दूसरे देशों में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या लगभग एक लाख पहुंच चुकी है। बड़ी संख्या में चिकित्सा कर्मचारी भी इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं। चीन के विभिन्न इलाकों में भारतीय मूल के लगभग ६० हजार लोग अभी भी फंसे हुए हैं। पहले भारत में इससे संक्रमित मरीजों की संख्या न्यून थी, लेकिन अब इसमें इजाफा हो रहा है। अभी तक यहां ३० संक्रमित मरीजों की पहचान की गई है।
वैश्विक स्तर पर मंदी
कोरोना के कारण चीन के साथ-साथ दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी नुकसान पहुंचा है, जिसमें भारत भी शामिल है। विश्व बैंक ने कोरोना की वजह से वैश्विक वृद्धि दर में १ प्रतिशत गिरावट आने की आशंका जताई है। कंसल्टेंसी ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के मुताबिक भी कोरोना के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में ०.२ प्रतिशत की कम वृद्धि होगी। इसकी वजह से दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं चीन और अमेरिका के कारोबार में सुस्ती गहरा रही है। सिंगापुर ने भी कोरोना वायरस के प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए वर्ष २०२० के लिए अपने विकास दर के अनुमान को कम कर दिया है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के अनुसार विश्व के केंद्रीय बैंकों को आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए। इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में महज २.४ प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है, जो २००९ के बाद सबसे कम है। ओईसीडी का कहना है कि २०२१ में वैश्विक अर्थव्यवस्था में ३.३ प्रतिशत की दर से वृद्धि हो सकती है।
मंदी के आसार
कंसल्टेंसी ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के मुताबिक कोरोना अगर महामारी का रूप लेती है तो वर्ष २०२० की पहली तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था पिछले साल के मुकाबले ४ प्रतिशत कम की दर से आगे बढ़ेगी। इस एजेंसी के अनुसार वर्ष २०२० में चीन की अर्थव्यवस्था ५.६ प्रतिशत की औसत दर से आगे बढ़ेगी। चीन का शेयर बाजार भी इससे प्रभावित हुआ है। कोरोना की वजह से कई बड़ी कंपनियां जैसे फर्नीचर कंपनी आइकिया, स्टारबक्स आदि ने अस्थायी रूप से अपना कारोबार चीन में बंद कर दिया है। कई एयरलाइंसों ने चीन की अपनी सभी उड़ानों को रद्द कर दिया है। होटल, ग्राहकों का एडवांस पैसा वापस लौटा रहे हैं। चीन आज कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री का बादशाह है। वह वैश्विक स्तर पर इनके कलपुर्जों का विभिन्न देशों में निर्यात करता है। चीन में ऑटोमोबाइल, मोबाइल और कंप्यूटर के कलपुर्जों का बड़ी मात्रा में निर्माण किया जाता है। दक्षिण कोरिया की कंपनी हूंडेई ने भी अपने कार उत्पादन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिसका कारण चीन से कार के कलपुर्जों का आयात का फिलवक्त बंद होना है।
तेल की कीमत
चीन में कारोबारी गतिविधियों में आई गिरावट के कारण तेल की मांग में भी कमी आई है। एक अनुमान के मुताबिक विगत १५ दिनों में कच्चे तेल की मांग में १५ प्रतिशत की गिरावट आई है। इसलिए तेल निर्यात करनेवाले देशों के समूह तेल उत्पादन में कटौती करने की योजना बना रहे हैं, ताकि कच्चे तेल की गिरती कीमतों को रोका जा सके। अभी, चीन से भारत आयात किए जानेवाले उत्पादों में इलेक्ट्रॉनिक्स का २०.६ प्रतिशत, मशीनरी का १३.४ प्रतिशत, ऑर्गेनिक केमिकल्स का ८.६ प्रतिशत और प्लास्टिक उत्पादों का २.७ प्रतिशत योगदान है जबकि भारत से चीन निर्यात किए जानेवाले उत्पादों में ऑर्गेनिक केमिकल्स का ३.२ प्रतिशत और कॉटन का १.८ प्रतिशत का योगदान है। भारत चीन से इलेक्ट्रिकल मशीनरी, मैकेनिकल उपकरण, ऑर्गेनिक केमिकल, प्लास्टिक और ऑप्टिकल सर्जिकल उपकरणों का ज्यादा आयात करता है, जो भारत के कुल आयात का २८ प्रतिशत है। कोरोना से विनिर्माण, परिवहन, मशीनरी विनिर्माण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भारत इन वस्तुओं का चीन से ७३ अरब डॉलर का आयात करता है जबकि भारत का कुल आयात ५०७ अरब डॉलर का है। भारत चीन को अपने कुल निर्यात का महज ५ प्रतिशत ही निर्यात करता है। भारत ने वित्त वर्ष २०१९-२० में अप्रैल से दिसंबर के दौरान चीन से ३,६५,३७७ करोड़ रुपए का आयात किया था जबकि समान अवधि में ९१,९८३ करोड़ रुपए का निर्यात किया था। इस प्रकार, वित्त वर्ष २०१९-२० के अप्रैल से दिसंबर के दौरान भारत को चीन के साथ कुल २,७३,३९४ करोड़ रुपए का व्यापार घाटा हुआ था।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
भारत में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित होनेवाले क्षेत्र कंप्यूटर, खिलौने, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और फार्मा हैं। इन उद्योगों के लिए कच्चे माल या कलपुर्जों का फिलहाल भारत में चीन से आयात बंद है। कंप्यूटर, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, ऑटोमोबाइल, फार्मा, टेक्सटाइल जैसे कई उद्योगों की अधिकांश पैâक्ट्रियां कोरोना के कारण चीन में अस्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं। कुछ उत्पादों जैसे, मोबाइल और खिलौने के स्टॉक भारत में खत्म होनेवाले हैं, जिनकी वजह से इन उत्पादों की भारत में कालाबाजारी की जा रही है। ऑटोमोबाइल उद्योग पर कोरोना वायरस का नकारात्मक प्रभाव पड़ने के कारण देश में १ अप्रैल, २०२० से लागू होनेवाली बीएस-६ पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। पर्यटन उद्योग भी चरमरा गया है। इतना ही नहीं, कोरोना की वजह से चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में वृद्धि दर में और भी गिरावट आने की संभावना बढ़ गई है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत की विकास दर ४.७ प्रतिशत दर्ज की गई थी, जो ६ सालों में सबसे कम है।
केंद्रीय बैंक की पहल
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कोरोना से प्रभावित क्षेत्रों के प्रभारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा है कि जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी पर नियंत्रण रखने की हरसंभव कोशिश की जाए और कारोबारी जरूरी वस्तुओं का कृत्रिम संकट पैदा करने से बाज आएं। भारतीय रिजर्व बैंक भी भारत में कोरोना के बढ़ते प्रभावों पर लगातार नजर रखे हुए है। कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस की वजह से भारत पर चीन के साथ होनेवाले आयात और निर्यात दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है लेकिन आयात पर प्रभाव ज्यादा पड़ सकता है क्योंकि भारत चीन से निर्यात की जगह आयात ज्यादा करता है। भारत में भले ही चाइनीज सामानों के बहिष्कार की बात कही जाती है लेकिन भारत के बहुत सारे उद्योग कच्चे माल एवं कलपुर्जों के लिए चीन पर निर्भर हैं। चीन से आयात बंद होने पर भारत के कई उद्योग बंद हो सकते हैं।