" /> खट्टर पर खटका

खट्टर पर खटका

संकटमोचक
अब गरीबी, बेरोजगारी, दंगे, पंगे, हिंदू-मुस्लिम, तेजी-मंदी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को लेकर सरकार का संकट मोचक बनकर कोरोना वायरस आ गया है। देश में कितना पैâला? यह जांच का विषय हो सकता है लेकिन चैनलों में फिलहाल कोरोना पूरी तरह पसरा हुआ है। हाथ मिलाने के बहाने हथेली खुजलाने वाले भारतीय संस्कृति की दुहाई देते हुए हाथ जोड़ने की परंपरा पर जोर दे रहे हैं। जैसे दो हजार की नोट में चिप लगी होने को क्रांतिकारी जानकारी चैनलिया चतुरों ने बांटी थी उसी तरह की जानकारी इन दिनों कोरोना से निपटने के बारे में बांटी जा रही है। गोबर से लेकर मदिरा तक में कोरोना रोधी तत्वों पर विवेचन चल रहा है। एक मित्र का कहना है कि कोरोना गलती से हिंदुस्थान आ तो गया है अब चैनलवाले उसकी इतनी दवाएं बता /बना देंगे कि कोरोना के प्राण ही निकल जाएंगे।
खट्टर पर खटका
पिछले साल सितंबर में चुनावी सभाओं में हरियाणा के मुख्यमंत्री दहाड़-दहाड़कर कह रहे थे कि वे अवैध प्रवासियों को हरियाणा से निकालने के लिए राज्य में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करेंगे। पूर्व वायुसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस एच.एस. भल्ला से मुलाकात के बाद खट्टर ने कहा था, `हम असम की तरह हरियाणा में भी एनआरसी लागू करेंगे।’ रिटायर्ड जस्टिस ने मुख्यमंत्री को सलाह दी थी कि असामाजिक तत्वों को बाहर रखने के लिए राज्य के निवासियों के लिए एक आईडी कार्ड बनाया जाए। ट्विस्ट यह है कि खट्टर सहित उनकी सरकार के कई मंत्रियों और राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य के पास ही नागरिकता से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं। पानीपत के रहनेवाले सूचना अधिकार कार्यकर्ता पी.पी. कपूर द्वारा इस संबंध में जानकारी पाने के लिए दाखिल आरटीआई के जवाब में उन्हें जो जानकारी मिली, वह हैरान करनेवाली थी। हरियाणा की जन सूचना अधिकारी पूनम राठी के मुताबिक उनके रिकॉर्ड में इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। माननीयों के नागरिकता संबंधी दस्तावेज चुनाव आयोग के पास हो सकते हैं।
मनुष्य रूपेण…!
अब यह तो गुजरातवाले संत ही बता सकते हैं कि मनुष्य योनि में जीवित रहते हुए भी कोई व्यक्ति पशु योनि पा सकता है? यद्यपि निपट कुछ विशिष्ट गुणोंवाले मनुष्यों के लिए ‘मनुष्य रूपेण मृगाश्चरन्ति’ कहा गया है। दूसरे शब्दों में कहें तो ऐसे लोग मनुष्य होते हुए भी पशु होते हैं। मगर हमारा चुनाव आयोग इतना सक्षम है कि मनुष्य के जीवित रहते हुए भी उसे पशु बना सकता है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के सुनील करमाकर ने अपने मतदाता कार्ड में कुछ अशुद्धि को ठीक कराने के लिए आवेदन किया था। नया कार्ड बनकर आया तो उसमें सारी गलतियों को सुधार दिया गया था लेकिन सुनील की जगह झबरी पूंछवाले एक कुत्ते की फोटो कार्ड पर चस्पां थी। अब सुनील चुनाव आयोग पर मानहानि का दावा करने जा रहे हैं और आयोग के कर्मचारी यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि सुनील के वोटर कार्ड में कुत्ता वैâसे घुस गया।
कमलनाथी परिक्रमा
सरकार की स्थिरता के संकट से जूझ रहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ समझ नहीं पा रहे हैं कि असली लड़ाई किससे है? वर्षों तक ३६ का आंकड़ा रखनेवाले दिग्विजय सिंह से रिश्ते सुधरे तो थोड़ी राहत थी। मौजूदा समय में दिग्विजय सिंह संकटमोचक बनकर उभरे हैं। मगर उनके छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने इस जुगलबंदी में पलीता लगाते हुए कमलनाथ को सद्बुद्धि की कामना के साथ मथुरा में गिरिराज पर्वत की परिक्रमा शुरू कर दी है। चाचौड़ा को जिला बनाने की मांग को लेकर विधायक लक्ष्मण सिंह एक बार फिर ताल ठोंक रहे हैं। लक्ष्मण सिंह चाचौड़ा के विधायक हैं। उनका कहना है कि जब मुख्यमंत्री अपने वादे से पलटेंगे तो फिर जनता और विधायक उनके ऊपर वैâसे विश्वास करेंगे। लक्ष्मण सिंह के बदले हुए सुर कमलनाथ की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं।