खुद झूठ बोलनेवाले मुझे झूठा ठहरा रहे हैं!, भाजपा को उद्धव ठाकरे का करारा जवाब

शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल भाजपा के झूठ की पोल परत-दर-परत खोल डाली। उन्होंने भाजपा नेताओं को करारा जवाब देते हुए कहा कि खुद झूठ बोलनेवाले मुझे झूठा ठहरा रहे हैं! राज्यपाल को इस्तीफा देने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने कल कई झूठी बातें कहीं। इसके बाद शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने फडणवीस समेत तमाम भाजपा नेताओं की झूठ की पोल खोली।
फडणवीस ने कल एक बार फिर भाजपा का मुख्यमंत्री होने की बात कही। इस पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि बहुमत न होते हुए भी कार्यवाहक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने की बात कही है। इस पर उद्धव ठाकरे ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि बिना फूट की राजनीति खेले भाजपा वैâसे सरकार बना सकती है? उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा जल्द से जल्द सरकार बनाने का दावा करे वर्ना सभी के लिए विकल्प खुले हैं।
महाराष्ट्र की जनता तय करे, झूठा चाहिए या सच्चा
हिंदुत्व का बुरका पहनकर अगर कोई झूठ बोलता है, वह हिंदुत्व तुम्हें चलेगा क्या? ऐसा आरएसएस से सवाल करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि झूठ बोलनेवाला हिंदुत्व की कौन सी व्यवस्था में बैठता है? महाराष्ट्र की जनता तय करे कि उन्हें सच बोलनेवाला चाहिए या झूठ बोलनेवाला। हमारे परिवार ने कभी भी झूठ बोलकर काम नहीं किया। झूठ बोलना हमारे खून में नहीं है। ऐसा भी उद्धव ठाकरे ने कहा।
मैंने कभी व्यक्तिगत आलोचना की!
मुख्यमंत्री कहते हैं कि भाजपा ने हमेशा बालासाहेब का आदर किया है तो मैंने भी कभी अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी को लेकर कुछ नहीं कहा। मैंने कभी व्यक्तिगत आलोचना नहीं की। मैंने कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी नहीं की है। मोदी जी ने मुझे हमेशा अपना छोटा भाई कहा है। लेकिन हमारा यह रिश्ता इनकी आंखों में चुभ रहा है। भाजपा साबित करे कि मैंने कब मोदी जी पर हमला बोला? मैंने कभी नरेंद्र मोदी की आलोचना नहीं की। ३७० पर उन्हें मैंने सबसे पहले बधाई दी, ऐसा भी उद्धव ठाकरे ने कहा।
राम मंदिर का श्रेय सरकार न ले
राम मंदिर पर न्यायालय अपना पैâसला सुनानेवाला है। इसका श्रेय सरकार न ले। राम मंदिर का श्रेय न्यायालयीन प्रक्रिया को जाता है। राम मंदिर के निर्माण को लेकर शिवसेना ने केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने की मांग की थी लेकिन सरकार ने वह नहीं किया। इसलिए राम मंदिर पर न्यायालय के पैâसले का श्रेय सरकार न ले।
अमित शाह और कंपनी पर विश्वास नहीं
महाराष्ट्र की जनता को जितना विश्वास शिवसेनाप्रमुख के परिवार पर है, उतना विश्वास अमित शाह और कंपनी पर नहीं है। शिवसेनाप्रमुख के कमरे में मेरी और अमित शाह के बीच सत्ता को लेकर जो फॉर्मूला तय हुआ था उसे वे नकार रहे हैं तो उनकी बातों पर किसी को विश्वास नहीं होगा। युति के समय सबसे पहले उपमुख्यमंत्री पद का ऑफर आया था, तब मैंने कहा था कि उपमुख्यमंत्री पद के लिए युति करूं, इतनी लाचार शिवसेना नहीं है। इसके बाद अमित शाह ‘मातोश्री’ पर आए और अपनी बात सुधारने की मीठी बात कहते हुए मुख्यमंत्री पदों के समसमान वितरण की बात तय हुई। लेकिन उस समय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर यह बात जगजाहिर हुई तो भाजपा के भीतर कलह होगा। शब्दों का खेल वैâसे खेला जाता है और मुकरा जाता है, ये भाजपा ने मुझे बता दिया।
हम वचन देते हैं तो निभाते हैं
५०-५० फॉर्मूले को लेकर भाजपा पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि झूठ बोलनेवालों से वैâसी बातचीत? उन्होंने कहा कि झूठों से मुझे कोई चर्चा नहीं करनी है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने पिता बालासाहेब को वचन दिया था कि एक न एक दिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर शिवसैनिक को बैठाकर रहूंगा। शिवसेनाप्रमुख को मैंने जो वचन दिया है, उसे पूरा करके ही रहूंगा। उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेनाप्रमुख को दिए गए वचन को पूरा करने के लिए मुझे देवेंद्र फडणवीस और अमित शाह की मदद की जरूरत नहीं है।
गंगा साफ करते-करते इनका मन दूषित हो गया है
युति करते समय मुझे इस बात की खुशी थी कि हिंदुत्व को माननेवाले दो दल एक साथ आए हैं। जो हुआ वो गंगा में बह गया लेकिन गंगा साफ करते-करते इनके मन दूषित हो गए हैं।

अब आगे क्या?
विधिमंडल में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में भाजपा सरकार बनाने का दावा करेगी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत तय समयावधि में बहुमत सिद्ध करने की बात कहकर राज्यपाल भाजपा को सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं। इस समयावधि में मंत्रिमंडल की शपथविधि को पूरा कर भाजपा बहुमत के आंकड़े को जुटाने का प्रयास करेगी।
मंत्रिमंडल की शपथविधि पूरा होने के बाद तीन दिनों का विशेष अधिवेशन बुलाकर विधिमंडल के सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह पूरा किया जाएगा। इसके चलते मध्यावधि चुनाव नहीं होगा और राज्य में जल्द ही राष्ट्रपति शासन लागू नहीं किया जाएगा। नई विधानसभा अस्तित्व में आने के बाद विधानसभा अध्यक्ष का चयन व अन्य कार्यक्रम को पूरा किया जाएगा और राज्यपाल द्वारा दी गई समयावधि में सत्ताधारी पार्टी को बहुमत की अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ेगा।
सबसे बड़ी पार्टी होते हुए भी भाजपा अगर सरकार बनाने का दावा नहीं करती है तो भी राज्यपाल नियमानुसार भाजपा को सरकार बनाने का पहला मौका देंगे। वे आगे नहीं आए या मौका मिलने के बाद भी बहुमत सिद्ध नहीं कर पाए तो दूसरे क्रमांक पर रही मतलब शिवसेना को सरकार बनाने का मौका देकर बहुमत सिद्ध करने की बात राज्यपाल कह सकते हैं।
सरकार बनाने के लिए मौजूद सभी विकल्पों को परखने और मौका देने के बाद भी कोई भी बहुमत सिद्ध नहीं कर पाता तो राज्यपाल अपने अधिकार का इस्तेमाल कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं। राज्य का कामकाज संवैधानिक पद्धति से नहीं चल सकता, ऐसी रिपोर्ट राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को सौंपने के बाद राष्ट्रपति शासन लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

 गंगा साफ करते करते इनका मन दूषित हो गया है, इस बात का मुझे दुख है
 आरएसएस को यह विचार करना चाहिए कि झूठ बोलना ये कौन से हिंदुत्व में बैठता है?
 मुझे झूठा ठहरानेवाले के साथ मैं बात नहीं करूंगा
 जब तक तुम अपना झूठ कबूल नहीं करते, तब तक मैं तुमसे बोलनेवाला नहीं
 झूठ बोलनेवालों के साथ मुझे कोई रिश्ता ही नहीं रखना है
 शिवसेना जो भी करती है, चोरी-छिपे नहीं, खुले आम करती है
 भाजपा जल्द से जल्द सत्ता का दावा करे वरना सब के लिए सभी पर्याय खुले हैं।

`भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनेगी’
विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र की जनता ने महायुति को ही जनादेश दिया है। हम महायुति में ही चुनकर आए हैं। युति अभी भी टूटी नहीं है। हम महायुति में ही हैं। महायुति के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। वर्तमान परिस्थिति में राज्य में नया चुनाव होने की बजाय महाराष्ट्र को सरकार मिलनी ही चाहिए। इसके लिए हम उचित प्रयास करेंगे, ऐसा आश्वासन राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जनता को दिया है। अगर आनेवाले समय में सरकार बनेगी तो भाजपा के नेतृत्व में ही बनेगी।

‘वर्षा’ पर क्या हुआ?
राज्य में सरकार को लेकर निर्माण हुए पेंच पर गुरुवार को भाजपा शिष्टमंडल ने राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी से मुलाकात चर्चा की। राज्यपाल ने भी राज्य के सॉलिसिटर जनरल को बुलाकर नियमानुसार सलाह लीr। उसके बाद शुक्रवार को सुबह तय समय पर भाजपा के प्रमुख नेताओं की बैठक मुख्यमंत्री के निवास्थान स्थान ‘वर्षा’ पर हुई। इस बैठक में आगे की रणनीति, सत्ता समीकरण कैसा होगा? इस विषय पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री की बैठक में तय अनुसार भाजपा विधायक एड. आशीष शेलार, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटील, सुधीर मुनगंटीवार ने मुख्यमंत्री का राजीनामा, उसके मुख्यमंत्री की तरफ से किए गए निवेदन के बारे में सविस्तार मसौदा तैयार किया। इसके बाद आशीष शेलार व मुख्यमंत्री के विश्वासी सहयोगी डॉ. संजय कुटे ने दोपहर में राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की और राज्यपाल को मुख्यमंत्री द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बारे में सूचित करने के साथ ही वर्तमान परिस्थिति पर चर्चा की। उसी समय भाजपा नेता गिरीश महाजन व अन्य नेताओं में आगे की नीति वैâसे होगी? इस पर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा हुई।
गडकरी कैंप में चर्चा
राज्य के सत्ता समीकरण से पिछले दिनों से चार हाथ लंबे दूर रहे भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी शुक्रवार की सुबह मुंबई पहुंचे। उनके मुंबई पहुंचते ही विधानसभा चुनाव में जिन्हें फडणवीस ने टिकट नहीं दिया था वो भाजपा नेता विनोद तावडे, चंद्रशेखर बावनकुले ने सबसे पहले वर्ली स्थित ‘सुखदा’ निवास स्थान पर दौड़ लगाई और उन्हें वर्तमान परिस्थिति से अवगत कराया। उनके पीछे-पीछे सुभाष देशमुख, संभाजी पाटील-निलंगेकर भी गडकरी वैंâप में हाजिर हुए। गडकरी दिल्ली से कोई संदेश लेकर आए हैं और वे सरकार बनाने की समस्या को सुलझाएंगे, ऐसी चर्चा राजनीतिक गलियारे में थी। आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने भी वही बात दोहराई कि जिसकी सीट ज्यादा उसका ही मुख्यमंत्री।