खुद ही रास्ता तलाशा

मिथिला का कारवां अब वेब सीरीज से फिल्मों की तरफ चल पड़ा है। करियर अभिनय और गायकी से यात्रा शुरू की लेकिन उनकी ख्याति के चर्चे फोब्र्स की लिस्ट में भी दर्ज हैं। पेश है मिथिला पालकर से पूजा सामंत की बातचीत के प्रमुख अंश-
नॉन फिल्मी बैकग्राउंड के बावजूद अभिनय से जुड़ाव कैसे हुआ?
मेरे पिताजी एअर इंडिया के अकाउंट्स सेक्शन में मैनेजर रह चुके हैं तो मेरी मां गृहिणी है। मेरी बड़ी बहन साइंटिस्ट है, मैं बचपन से नाना-नानी के साथ दादर में रहती हूं। अभिनय-पढ़ाई-साहित्य-म्यूजिक इन सभी से लगाव था। बहुत से दोस्त थिएटर करने लगे। कुछ दोस्त साहित्य की बातें करते थे। धीरे-धीरे मुझे भी इस क्रिएटिव फील्ड से आकर्षण होने लगा। मैंने पढ़ाई साथ कत्थक भी सीखा।
अभिनय का पहला मौका कैसे मिला?
मैंने अपने लिए खुद ही रास्ता तलाशने की कोशिश की। जैसे भी मुझे ऑडिशन के बारे में पता चलता मैं बिना कोई झिझक ऑडिशन देते गई। टैलेंट और किस्मत दोनों का साथ मिले तो जमीं आसमान एक होने में देर नहीं लगती। फिल्म मेकर निखिल आडवाणी ने उनकी फिल्म `कट्टी बट्टी’ में मुझे इमरान खान (अभिनेता आमिर खान के भांजे) की सिस्टर का किरदार दिया। इस फिल्म को खास सफलता नहीं मिली पर मुझे इस फिल्म ने आत्मविश्वास दिया। वैसे मुझे पहला मौका एक शार्ट फिल्म में मिला था।
आपने मराठी थिएटर क्यों नहीं आजमाया?
मुझे अपनी मराठी मातृभाषा का अभिमान है। मुझे उतना स्कोप नहीं मिला मराठी थिएटर में। मैंने फिर हिंदी थिएटर की तरफ रुख कर लिया। आकाश खुराना के प्ले ग्रुप में मैं थी। मेरी पहली मराठी फिल्म `मुराम्बा’ को बहुत सराहना मिली। मेरी पहचान इसके बाद बनने लगी। इससे पहले एक मराठी फिल्म `माझा हनीमून’ भी मैंने की थी।
`कारवां’ फिल्म कैसे मिली आपको?
`कारवां’ के निर्देशक हैं आकाश खुराना। वे मुझे काफी समय से जानते हैं, उनके ग्रुप में मैंने थिएटर किया है। आकाश ने मुझे बताया कि नंदिनी सेन `कारवां’ की कास्टिंग डायरेक्टर हैं, उनसे मिलना। ऑडिशन में अगर पास हो गई तो फिल्म मिल सकती है। जाहिर सी बात है, मैंने ‘कारवां’ के लिए ऑडिशन पास की और उसके बाद हुई लुक टेस्ट में भी मुझे सिलेक्ट किया गया
फोब्र्ज मैगजीन में कैसे जगह मिली आपको?
फोब्र्ज मैगजीन ने प्रतिभाशाली और सफल युवाओं की लिस्ट बनाई थी, उसमें मेरा नाम था। फोब्र्ज मैगजीन के नीरज फोन कर मुझसे मिलने आए थे। मेरी बातचीत उन्होंने छापी थी। कारण यही होगा कि फिल्मी बैकग्राउंड न होने के बावजूद बॉलीवुड में काम करने का मौका मिलना।