खोखली हो रही है खाकी! हर पल हार्ट अटैक और आत्महत्या का डर

सुविधाओं के अभाव के बावजूद मुंबई पुलिस की तुलना विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जानेवाली स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस से की जाती है। मुंबई पुलिस की कर्तव्यपरायणता के कारण ही लोग बेखौफ होकर शहर में रहते हैं लेकिन जिन खाकी वर्दीवालों पर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, काम का तनाव उन्हें खोखला बना रहा है, जिससे हार्ट अटैक, आत्महत्या का डर हर एक पुलिसकर्मी पर मंडरा रहा है। १२ घंटे से ज्यादा की ड्यूटी, छुट्टी की अनिश्चितता, समय-असमय बदली की मार, वरिष्ठों द्वारा कार्रवाई का डर, खान-पान में अनियमितता जैसे कई कारणों से ज्यादातर पुलिसकर्मी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदयविकार, अस्थमा और मोटापे जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो जा रहे हैं। पिछले सप्ताह भर में बीमारी और अवसाद से ग्रस्त एक सुपरकॉप की खुदकुशी और एक अन्य सुपरकॉप सहित एक पीएसआई की हार्ट अटैक से मौत इसका प्रमाण है।
कल मुंबई पुलिस में पूर्व पुलिस उपायुक्त के पद पर तैनात आनंद मंड्या की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मंड्या को जाननेवालों के अनुसार ३० अप्रैल, २०१८ से पहले वे सांताव्रुâज-पूर्व के कालीना (कोले कल्याण) स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में तैनात थे। इस पोस्ट पर तबादले के समय से ही वे अवसाद का शिकार हो गए थे। इसी तरह महाराष्ट्र एटीएस की नागपाड़ा यूनिट में तैनात पीएसआई नरेंद्र (भाई) पाटकर की दिल का दौरा पड़ने से उस समय मौत हो गई जब वे जांच के सिलसिले में गुजरात गए थे, जबकि पुणे के शिक्रापुर पुलिस थाने में तैनात सिपाही प्रह्लाद सातपुते की लाश जंगल में पेड़ से लटकती पाई गई। अनुमान लगाया जा रहा है कि काम के साथ-साथ पारिवारिक कारणों से हताश हो चुके प्रह्लाद ने पेड़ से लटक कर खुदकुशी की होगी।