गधे पर बैठकर आ रही है संक्रांति

आज यानी १५ जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। संक्रांति के मौके पर लोग जलस्रोतों पर जाकर स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। इस वर्ष मकर संक्रांति का विशेष पुण्य काल बुधवार सुबह ८ बजकर ३३ मिनट से शाम ४ बजकर ३३ मिनट तक रहेगा। इस समय तिल का उपयोग शारीरिक व मानसिक निरोगता प्रदान कर अनेक वास्तुदोषों का शमन कर प्रदूषण मुक्त वातावरण बनाएगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मकर संक्रांति का प्रभाव जल, थल और नभ पर समान रूप से होता है। मनुष्य के अलावा अन्य जीव प्रकृतिमय होते हैं। प्राकृतिक ज्ञान से पूर्ण होने पर संक्रांति का उन पर भी बराबर प्रभाव पड़ेगा। मनुष्य कृत्रिम सुख-साधनों के प्रति उपभोग से कष्ट सहता रहता है इसलिए दीर्घ सुख प्राप्ति हेतु मकर संक्रांति काल से प्रकृति का अनुशरण करे। स्नान के समय तिल पीस कर उबटन करना, तिल मिश्रित जल से स्नान करना, तिल-गुड़ के साथ संकल्पित दान करना, तिल से होम करना, तिल मिश्रित जलपान करना और भोजन के साथ तिल के ल़ड्डू का प्रयोग विशेष लाभकारी होता है।
संक्रांति का स्वरूप
संक्रांति गधे पर बैठकर आ रही है इसलिए व्यापारियों को इसका लाभ मिलेगा। इसका उपवाहन भेड़ है इसलिए ऊनी वस्त्र की कमी हो सकती है। तरुण अवस्था में, पांडुर वस्त्र, विचित्र कंचुकी, गोपी चंदन का लेपन किए हाथ में दंड और केतकी का पुण्य धारण करके कांसे के पात्र में मालपुआ भोजन करती हुई दक्षिण मुखी होकर वायव्य में दृष्टि रखते हुए पूर्व दिशा से आकर पश्चिम दिशा की ओर सुप्त स्थिति में जा रही है।
पूर्व क्षेत्रवासियों को मिलेगा सुख
१५ जनवरी को मकर संक्रांति अपने वाहन से आ रही है चूंकि इसका आगमन पूर्व से पश्चिम की ओर है इसलिए पूर्व देशवासियों को सुख मिलेगा और गमन क्षेत्र पश्चिमी देशों में युद्ध व कलह की स्थिति नजर आ रही है।