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गलत क्या है?

अंगूरी भाभी यानी शिल्पा शिंदे के मुताबिक नेपोटिज्म हर फील्ड में है और हर जगह भेदभाव से गुजरना पड़ता है। मैं खुद इसे सीरियल `भाबीजी घर पर हैं’ के दौरान झेल चुकी हूं। शिल्पा शिंदे के मुताबिक, नेपोटिज्म तो अब हर फील्ड में ही देखने को मिलता है। अब एक्टर का बेटा तो एक्टर ही बनेगा, डॉक्टर का बेटा डॉक्टर ही बनेगा। लोग किस नेपोटिज्म की बात कर रहें है मुझे समझ नहीं आता। लेकिन एक बात जरूर है कि फिल्म इंडस्ट्री में भेदभाव बहुत होता है और मैं इससे खुद गुजर चुकी हूं। शिल्पा ने आगे कहा, कई बार तो मुझे दूसरे लोगों के साथ काम करने को मना किया गया। चैनल और प्रोडक्शन हाउस ने मुझे बैन किया। मुझे ये कहते हुए कई बार नोटिस भी भेजे कि तुम्हारी वजह से हमारा बड़ा नुकसान हुआ है, अब तुम इसके पैसे दो। शिल्पा के मुताबिक, वैसे भी जब तक इंसान जिंदा रहता है, तब तक कोई ध्यान नहीं देता, लेकिन जब वो चला जाता है तब सभी आकर सहानुभूति दिखाने लगते हैं। शिल्पा का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री छोड़ो, कई बार तो टीवी के सीनियर एक्टर्स खुद जूनियर्स पर अपना रौब जमाते हैं।