गली-गली में आम, यूपी ‘ब्रांड’ जहरीला जाम!, खाड़ी इलाकों में खुली हैं मौत की फैक्ट्रियां

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जहरीली शराब से मरनेवालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जबकि सच्चाई तो यही है कि जहरीली शराब का यह जाम देशभर में बिकता है। मुंबई की तो गली-गली में इस तरह की शराब का बिकना आम बात है। लेकिन पुलिस व प्रशासन तब तक इनके खिलाफ सख्त नहीं होता जब तक कोई हादसा नहीं होता है। यूपी ‘ब्रांड’ जहरीला जाम मुंबई शहर को कभी भी दहला सकता है। मुंबई और आसपास के क्षेत्र में बिकनेवाले इस जहरीले जाम से आबकारी विभाग के अधिकारी भी हादसे की आशंका से खौफजदा हैं। यूपी में जहरीली शराब पीने से सहारनपुर, रुड़की और कुशीनगर में मरनेवालों की संख्या १०० के पार पहुंच गई है। अब तक सहारनपुर के ४६, रुड़की में ३२ मेर
ठ में २३ और कुशीनगर में १० लोगों की मौत हो चुकी है और पुलिस द्वारा करीब डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मुंबई और आसपास के इलाकों में कई ऐसे खाड़ी क्षेत्र और वन क्षेत्र हैं जहां पर मौत की पैâक्ट्रियां खुली है और वहां पर गावठी शराब बनाई जाती है। यही शराब मुंबई व आसपास के इलाकों में बेची जाती है। पुलिस की कार्रवाइयों में स्पष्ट हो चुका है कि बोरीवली स्थित गोराई खाड़ी क्षेत्र, भाइंदर-पश्चिम, दिवा खाड़ी क्षेत्र स्थित मैंग्रोव्ज इलाके, दहिसर के संजय नगर सहित पनवेल, न्हावा-शेवा और उरण के पहाड़ी इलाकों व पालघर जिले के मालजीपाड़ा, भाटपाड़ा इलाकों में भी बड़ी तादाद में अवैध शराब की भठ्ठियां चलती है।
भट्ठियों पर तैयार की गई ये शराब मुंबई व आसपास के इलाकों में स्थित झोपड़पट्टियों में बेची जाती है। मालाड स्थित मालवणी, सांताक्रुज स्थित गजधरबांध, खार स्थित दांडा, बांद्रा- पूर्व स्थित ज्ञानेश्वर नगर, माहिम-सायन स्थित धारावी, एंटॉप हिल और रेल पटरियों से सटी कई झोपड़पट्टियां हैं जहां जहरीली गावठी शराब बेची जाती हैं।
आमतौर इथाइल अल्कोहल (नवसागर, काले गुड़ तथा सड़े हुए फलों) से गावठी शराब बनाई जाती है। लेकिन गावठी शराब को और नशीला तथा ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने की लालच में हाथभट्ठीrवाले इसमें विभिन्न प्रकार के रसायनों की मिलावट करने लगे हैं। मिथाइल अल्कोहल, यूरिया, आयोडेक्स, ऑक्सिटोसिन, मीथेनॉल आदि ऐसी रसायन हैं, जिनका उपयोग आजकल गावठी शराब में हो रहा है। इन रसायनों से बनी शराब ५ से ७ रुपए प्रति गिलास में बिकती है। ये ब्रांडेड शराब से काफी सस्ती होती है जबकि इसका नशा कई गुना ज्यादा होता है। पर गावठी शराब बनाते समय इन रसायनों की मात्रा में गड़बड़ होने पर सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है। वर्ष २०१५ के जून महीने में तथा वर्ष ११९२ में मुंबई में जहरीली शराब का कहर टूट चुका है। वर्ष २०१५ जहां १०६ लोगों की मौत हुई थी, वहीं वर्ष १९९२ में ९१ लोग जहरीली शराब का सेवन करने से काल का ग्रास बने थे।
जानलेवा रसायन
आजकल ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने की लालच में हाथभट्ठीवाले गावठी शराब में विभिन्न प्रकार के रसायनों का इस्तेमाल करने लगे हैं। मिथाइल अल्कोहल, यूरिया, आयोडेक्स, ऑक्सिटोसिन, मीथेनॉल आदि ऐसे रसायन हैं जिनका उपयोग आजकल गावठी शराब में हो रहा है। इन रसायनों से बनी शराब न केवल जानलेवा होती है बल्कि काफी सस्ती भी होती है।
जहरीली शराब के अड्डे
मुंबई में बोरीवली स्थित गोराई खाड़ी क्षेत्र, भाइंदर-पश्चिम, दिवा खाड़ी क्षेत्र स्थित मैंग्रोव्ज इलाके, दहिसर के संजय नगर सहित पनवेल, न्हावा-शेवा और उरण के पहाड़ी इलाकों व पालघर जिले के मालजीपाड़ा, भाटपाड़ा इलाकों में भी बड़ी तादाद में जहलरीली अवैध शराब की भट्ठियां चलती है।