" /> गांव को है २५ वर्षों से सरपंच का इंतजार

गांव को है २५ वर्षों से सरपंच का इंतजार

भिवंडी तालुका के पहारे गांव का सरपंच पद पिछले २५ वर्षों से खाली पड़ा है। उक्त गांव का सरपंच पद आदिवासियों के लिए आरक्षित है जबकि गांव में एक भी आदिवासी परिवार नहीं रहता है। सरपंच के अभाव में गांव का विकास कार्य पूरी तरह ठप्प पड़ा है। वहीं गांव के लोग मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित हैं। ग्रामीणों ने सरपंच पद का आरक्षण हटाने के साथ ही अविलंब सरपंच का चुनाव कराने की ‌मांग प्रशासन से की है।गौरतलब हो कि भिवंडी तालुका के पहारे गांव सरपंच पद को शासन व चुनाव यंत्रणा ने मिलकर १९९५ में आदिवासियों के लिए आरक्षित किया था। गांव में एक भी आदिवासी परिवार नहीं होने के कारण सरपंच पद की कुर्सी पिछले २५ वर्षों से खाली पड़ी है। पहारे गांव पंचायत के कार्यभार ग्रामसेवक अधिकारी संभालते हुए आ रहे है किंतु ग्रामसेवक की दूसरे गांव में अतिरिक्त जिम्मेदारी होने के कारण वह १५ दिनों या महीने में सिर्फ एक बार ही गांव पंचायत में आ पाते हैं। सरपंच के अभाव में गांव बदतर स्थिति में है। खराब सड़कों पर चलना कांटे पर चलने के बराबर है। गांव में २५ वर्ष पूर्व बनी पानी की टंकी खराब होने के कारण नागरिकों को पानी खरीदकर या बोरबेल का पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। १० वर्षों से जिला परिषद स्कूल की मरम्मत नहीं होने के कारण विद्यार्थी जीवन खतरे में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं, जिसके कारण गांव के लोगों ने आरक्षित किया और सरपंच पद को हटाने की मांग शासन से की है।

गांव के पुलिस पाटिल भारत भोईर ने बताया कि गांव में सरपंच पद रिक्त है। ग्राम पंचायत का पूरा कामकाज ग्रामसेवक देखते आ रहे हैं लेकिन उनके पास दो गांवों की जिम्मेदारी शासन ने सौंप रखी है, जिसके कारण वह गांव पंचायत कार्यकाल में १५ दिन या महीने में एक बार ही आते हैं इसलिए गांव का विकास पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।

पहारे गांव के पूर्व सरपंच पुंडलिक पाटील ने बताया कि गांव में पानी टंकी का काम २५ वर्ष पहले किया गया था किंतु टंकी में आज तक पानी कनेक्शन न जुड़ने के कारण लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है। यहां तक कि कुछ लोग कुएं तथा बोरिंग का पानी पीते हैं। सरकार ने गांव में आदिवासी नहीं होने के बावजूद भी सरपंच पद पर आरक्षण लागू कर गांव के लोगों के साथ अन्याय किया है। सरकार इसे संज्ञान में लेकर ग्रामीणों के साथ न्याय करें।