" /> गीत गौना से शुरू हुआ बाबा विश्वनाथ का चार दिवसीय गौना रस्म

गीत गौना से शुरू हुआ बाबा विश्वनाथ का चार दिवसीय गौना रस्म

वाराणसी,महाशिवरात्रि पर देवाधिदेव महादेव के विवाहोत्सव के बाद सोमवार से बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का चार दिवसीय गौना रस्म शुरू हो गया। चार दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन गीत गौना कार्यक्रम हुआ।इस दौरान टेढ़ीनीम स्थित महंत डॉ कुलपति तिवारी का नया आवास मांगलिक गीत से गुंजायमान रहा।

बाबा विश्वनाथ का गौना रस्म हर वर्ष रंगभरी एकादशी की तिथि को निभाई जाती है। रंगभरी एकादशी पर काशी विश्वनाथ माँ पार्वती को विदा कराके कैलाश ले जाते हैं । इस वर्ष पांच मार्च को होने वाली गौना की रस्म से पहले किए जाने वाले लोकाचार का शुभारम्भ दो मार्च गीत गौना से टेढ़ीनीम स्थित नवीन महंत आवास से प्रारम्भ हुआ।

इस संदर्भ में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डा. कुलपति तिवारी ने बताया कि दो मार्च को गीत गौना, तीन मार्च को गौरा का तेल-हल्दी और चार मार्च को बाबा का ससुराल आगमन होगा। पांच मार्च को मुख्य अनुष्ठान की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में होगी। भोर में चार बजे 11 ब्राह्मणों द्वारा बाबा का रुद्राभिषेक होगा। सुबह छह बजे बाबा को पंचगव्य से स्नान कराया जाएगा। सुबह साढ़े छह बजे बाबा का षोडषोपचार पूजन होगा। सुबह सात से नौ बजे तक महंत परिवार के सदस्यों द्वारा लोकाचार किया जाएगा। नौ बजे से बाबा का श्रृंगार आरंभ होगा। जिसके तहत बाबा की आंखों में लगाने के लिए काजल विश्वनाथ मंदिर के खप्पड़ से लाया जाएगा जबकि गौर के माथे पर सजाने के लिए सिंदूर परंपरानुसार अन्नपूर्णा मंदिर के मुख्य विग्रह से मंगाया जाएगा। पूर्वाह्न 11 बजे भोग और महाआरती होगी। इसके उपरांत शिवांजलि महोत्सव का शुभारंभ होगा। गौना रस्म के दौरान पद्मश्री डा. राजेश्वर आचार्य द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम शिवांजली का शुभारंभ किया जाएगा। दोपहर 12 बजे से रजत प्रतिमा का दर्शन व कार्यक्रम प्रारंभ होगा जो कि शाम 4.30 बजे तक चलेगा। शिवांजलि में काशी के रुद्रनाद बैंड के कलाकारों द्वारा गायन, वादन और नृत्य की प्रस्तुतियां की जाएंगी। रुद्रनाद बैंड की ओर से भगवान शिव को समर्पित पांच नई कंपोजीशन की रिलीजिंग भी ‘शिवांजलि’ के मंच से होगी। सांस्कृतिक सत्र में दिल्ली की कथक नृत्यांगना नलिनी निगम, बिहार के डा. भरत शर्मा ‘व्यास’,जौनपुर के लोक गायक सौरभ शुक्ला, बनारस के डा. अमलेश शुक्ल सहित कई नामी-गिरामी कलाकारों के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

महंत डॉ तिवारी ने बताया कि 356 वर्षों के इतिहास में यह पहला मौका है जब बाबा की पालकी को मंदिर तक पहुंचाने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक दूरी तय करनी होगी। पहले मंदिर और महंत आवास आमने-सामने होने के कारण मात्र 25 से 30 कदम चलना होता था। इस बार टेढ़ीनीम से साक्षी विनायक, कोतलवालपुरा, ढुंढिराज गणेश, अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए बाबा की पालकी मुख्य द्वार से विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश करेगी। यह दूरी कम से कम साढ़े चार सौ मीटर होगी। पालकी यात्रा में डमरूदल और शंखनाद करने वाले 108 सदस्य भी शामिल होंगे। नादस्वरम् और बंगाल का ढाक भी बाबा की पालकी यात्रा में गूंजेंगे।