" /> गुस्सैल हाथी को म्यूजिक थैरेपी!

गुस्सैल हाथी को म्यूजिक थैरेपी!

एमपी के इंदौर जिले में कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में हाथी मोती का गुस्सा शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कई बार अपने बाड़े की दीवार ढहा चुके मोती को शांत करने के लिए जू प्रबंधन नित नए प्रयोग कर रहा है। इसी कड़ी में मोती को शांत करने के लिए प्रबंधन अब म्यूजिक थैरेपी का सहारा ले रहा है। मोती को रोज गाने सुनाए जा रहे हैं। मोती भी गानों को सुनने में रुचि दिखा रहा है। मोती के गुस्से का शिकार हथिनी लक्ष्मी हो चुकी है। मोती ने उसे जमीन पर पटक दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। लक्ष्मी के जाने के बाद मोती और हमलावर हो चुका है।
इंदौर जू प्रभारी और डॉक्टर उत्तम यादव ने बताया कि मोती के गुस्से को शांत करने के लिए कई प्रयोग किए गए हैं। अभी उसके बाड़े में जेसीबी, ट्रैक्टर, ट्रक और बसों के टायरों को रखवाया गया है, जिससे वह खेलता रहता है। खेल में लगे रहने से उसका गुस्सा थोड़ा कम रहता है। हाथी के बाड़े में म्यूजिक सिस्टम लगाया गया है। म्यूजिक सिस्टम के माध्यम से बांसुरी और अन्य प्रकार के वाद्य यंत्र को बजाया जा रहा है, ताकि हाथी मोती का दिमाग शांत किया जा सके। प्रभारी डॉ. यादव के अनुसार म्यूजिक थैरेपी आमतौर पर दिमाग को शांत करने के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। इसी को लेकर हाथी के दिमाग को शांत करने के लिए यह नवाचार किया गया है। यादव ने बताया कि १९०२ में महान वैज्ञानिक जगदीश चंद बसु ने पौधे के ऊपर म्यूजिक का प्रयोग किया था, जिसके रिजल्ट बहुत अच्छे आए थे। हम जानते हैं कि हमारे दिमाग पर म्यूजिक का इफेक्ट कितना ज्यादा होता है? जानवरों में भी म्यूजिक का प्रभाव बहुत होता है। कई जगह ये बातें साबित भी हुई हैं। जैसे डेयरी फार्म में कई गायों को म्यूजिक सुनाया जाता है तो उनमें दूध देने की क्षमता बढ़ जाती है। मोती के बर्ताव को देखते हुए हमने लाइट म्यूजिक की व्यवस्था उसके बाड़े में की है। हम उम्मीद करते हैं कि म्यूजिक सुनकर वह शांत रहेगा। इसके अलावा हमने उसके बाड़े में स्विमिंग पूल, मड बाथ बना रखा है। ये सभी व्यवस्थाएं उसके गुस्से को कम करने के लिए की हैं। बता दें कि १४ दिसंबर, २०१९ को चिड़ियाघर में चार साल से रह रही हथिनी लक्ष्मी को मोती ने पटक दिया था, जिससे उसकी २४ दिसंबर को मौत हो गई थी। वह लक्ष्मी को पिंजरे में ही २५ फीट दूर तक घसीटते हुए ले गया था। लक्ष्मी की दोनों किडनी डैमेज हो चुकी थीं। लक्ष्मी की मौत के बाद से ही मोती गुस्से में नजर आ रहा है। चिड़ियाघर प्रभारी उत्तम यादव के मुताबिक हाथी की प्रजाति में उम्र के मुताबिक गुस्सा बढ़ता जाता है। मोती ४० साल से भी ज्यादा समय से इंदौर के चिड़ियाघर में रह रहा है। उसने सालों तक लोगों का मनोरंजन किया है। उसे बचपन में ही यहां लाया गया था।