" /> गूगल की मदद से 43 साल बाद परिवार से मिली महिला! -महिला की उम्र 90 साल की

गूगल की मदद से 43 साल बाद परिवार से मिली महिला! -महिला की उम्र 90 साल की

-महाराष्ट्र की रहनेवाली थी महिला
-थाने में दर्ज थी गुमशुदगी की रिपोर्ट

महाराष्ट्र की रहनेवाली पंचुबाई चार दशक के भी अधिक समय तक खान परिवार के साथ अच्चन मासी के रूप में रहीं लेकिन इस सप्ताह वे अपने पोते के साथ दोबारा मिलीं। पंचुबाई इतने साल मध्य प्रदेश के दमोह जिले में कोटा ताल गांव की इसरार खान के साथ रहीं। इसरार को बीते माह गी पता चला कि उनकी अच्चन मौसी दरअसल महाराष्ट्र से थीं।

पंचुबाई के पोते पृथ्वी कुमार शिंदे अपनी 90 साल की दादी को लेकर गए। इसरार ने गूगल और व्हाट्सएप की थोड़ी मदद से पंचुबाई के पोते को ढूंढ निकाला। महाराष्ट्र के अमरावती जिले के एक गांव से बुंदेलखंड क्षेत्र के दमोह तक लगभग 500 किमी की दूरी तय कर पंचुबाई वहां कैसे पहुंची थीं ये कोई नहीं जानता? दरअसल खान के ट्रक ड्राइवर पिता ने पंचुबाई को तब देखा था जब मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक उनपर हमला कर दिया था। खान ने बताया कि 43 साल पहले जब मेरे पिता स्वर्गीय नूर खान अपने घर जा रहे थे तो उन्होंने पंचुबाई को बुरे हाल में देखा था। उन्होंने मधुमक्खियों के डंक से होनेवाले दर्द से राहत के लिए उन्हें कुछ दवाइयां दी थी।

खान ने बताया कि उनके पिता ने कुछ दिनों बाद उन्हें फिर से सड़क के किनारे देखा और उनसे उनके ठिकाने के बारे में पूछा लेकिन वह कुछ नहीं कह सकी। वह फिर उन्हें घर ले आए। तब से वह हमारी अच्चन मौसी बन गई और पूरे गांव की भी। ये मेरे पिता द्वारा दिया गया नाम था। वह अक्सर मराठी बोलती थीं। मेरे पिता और बाद में मैंने और मेरे दोस्तों ने उनके गांव को खोजने की बहुत कोशिश की लेकिन हमारे प्रयास बेकार रहे क्योंकि हमें उससे कोई सुराग नहीं मिला या शायद हम यह समझने में असफल रहे कि वे क्या कह रही थीं। 4 मई को लॉकडाउन के दौरान खान परिवार एक साथ बैठा था। मासी ने जो कहा खान ने अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया और पता लगा कि मासी ने खानम नगर बोला है। बाद में मुझे अमरावती जिले में एक खानजम नगर पंचायत मिली। गूगल की मदद से मुझे खानम नगर में एक कियोस्क मालिक अभिषेक का मोबाइल नंबर मिला। मैंने उनसे बात की और अपने गांव और आस-पास व्हाट्सएप के माध्यम से मौसी की फोटो को प्रसारित करने के लिए उनकी मदद मांगी।

जब अभिषेक ने मुझे बताया कि तो गांव के एक परिवार ने मौसी की पहचान पंचुबाई के रूप में की थी और वह पृथ्वी कुमार शिंदे की दादी हैं तो  हम खुशी में झूम उठे। शिंदे ने इसके बाद खान से संपर्क किया। उन्होंने उन्हें बताया कि पंचूबाई ने 2005 में अपने पति तेजपाल और तीन साल पहले बेटे भईलाल को खो दिया है।शिंदे ने बताया कि मेरे दादा तेजपाल और पिता भीलाल ने दादी के मिलने की उम्मीद खो दी थी। मेरे दादा ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।