" /> गेमचेंजर

गेमचेंजर

जुलाई टीम इंडिया के दो ऐसे महान कप्तानों का जन्मदिन लेकर आया, जिन्होंने क्रिकेट की दशा और दिशा दोनों बदल दी थी। एक ७ जुलाई को महेंद्र सिंह धोनी का जन्मदिन था तो दूसरे ८ जुलाई को सौरव गांगुली का। इसमें गांगुली की कप्तानी से आए परिवर्तन ने टीम इंडिया का रूप ही बदल दिया था। उसके बाद शायद ही ऐसा रहा हो जब टीम ने पीछे मुड़ कर देखा हो इसलिए सौरव गांगुली को गेमचेंजर कहना गलत नहीं होगा। सबसे सफल कप्तानों में शुमार सौरव गांगुली का कल जन्मदिन था। गांगुली ने अपने जुझारू और आक्रामक तेवर से हिंदुस्थानी क्रिकेट की सूरत ही बदल दी। सौरव गांगुली जो अपने प्रशंसकों के बीच `दादा’ के नाम से भी जाने जाते हैं, क्रिकेट का पहला ऐसा चेहरा थे जिसने टीम के भीतर देश से बाहर मैच जीतने के भरोसे को और पक्का किया। खास तौर पर साल २००० की शुरुआत में वह टीम इंडिया के लिए `गेम चेंजर’ साबित हुए। `प्रिंस ऑफ कोलकाता’ सौरव गांगुली आज ४८ साल के हो गए हैं। गांगुली ने टीम की कमान उस वक्त संभाली जब इंडिया की टीम अपने खराब दौर से गुजर रही थी। गांगुली ने टीम को मैच फिक्सिंग से जुड़े विवादों से भी बाहर निकाला और हिंदुस्थान के सबसे महानतम मैच विनर्स युवराज सिंह, हरभजन सिंह, वीरेन्द्र सहवाग, जहीर खान और महेंद्र सिंह धोनी जैसे क्रिकेटर्स को बेहतर प्रदर्शन का मौका दिया। आज बीसीसीआई प्रेसीडेंट के तौर पर भी गांगुली देश के क्रि​केट को लगातार बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। गांगुली की कप्तानी में टीम ने १४६ वन डे मैच खेले, जिसमें से ७६ में हिंदुस्थानी टीम ने जीत हासिल की। ६५ मैचों में हार हुई। जबकि ५ वन डे मैचों का रिजल्ट नहीं आया। गांगुली की ओडीआई विनिंग परसेंटेज ५३.९० रही है।