गोल्ड मिला गया गणित की चिंता

अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में खेलनेवाली भारतीय निशानेबाजी टीम में शामिल अनीश भानवाल टीम के सबसे युवा व उभरते खिलाड़ी थे और ये उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था। देशवासियों को अनीश से काफी उम्मीद थी। देशवासियों की उम्मीद पर खरा उतरनेवाले युवा निशानेबाज अनीश भानवाल ने देश को उन पर गर्व करने का एक और मौका दिया है। स्टार निशानेबाज तेजस्विनी सावंत ने राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं की ५० मीटर राइफल थ्री पोजिशन में खेलों का नया रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता है वहीं हिंदुस्थान के किशोर निशानेबाज अनीश भानवाल ने पुरुषों की २५ मीटर रैपिड फायर पिस्टल स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। अनीश ने राष्ट्रमंडल खेलों में पदार्पण के साथ ही स्वर्ण पदक जीता और साथ ही इन खेलों का नया रिकॉर्ड भी बनाया है। उन्होंने हिंदुस्थान की झोली में १६वां स्वर्ण पदक डाला। हिंदुस्थान के १५ वर्षीय निशानेबाज अनीश ने फाइनल में कुल ३० अंक हासिल करते हुए सोना जीता। उन्होंने २०१४ में ग्लाग्सो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में ऑस्ट्रेलिया के डेविड चापमान की ओर से बनाए रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इसके साथ ही अनीश भानवाल सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले देश के पहले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने मनु भाकर का रिकॉर्ड तोड़ा। मनु ने इन्हीं गेम्स में १६ की उम्र में गोल्ड जीतने का कारनामा किया था। उनसे पहले तेजस्विनी सावंत ने गोल्ड मेडल जीता था।सोनीपत के गोहाना कसांडी गांव में जन्मे अनीश का पहला प्यार निशानेबाजी नहीं है। उन्होंने २०१३ में अंडर-१२ मॉडर्न पैंटाथलन विश्व चैंपियनशिप और २०१५ में एशियाई पैंटाथलन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। जब वे शूटिंग रेंज के अंदर होते हैं तो उनका आत्मविश्वास किसी मंझे हुए खिला़ड़ी जैसा रहता है लेकिन जैसे ही अनीश भानवाला रेंज से बाहर निकलते हैं तो एक १५ साल के किशोर की तरह गणित के पेपर की चिंता सताने लग जाती है। राष्ट्रमंडल खेलों में हिंदुस्थान के सबसे कम उम्र के स्वर्ण पदक विजेता की अभी यही स्थिति है। हरियाणा के इस युवा ने २५ मीटर रैपिड फायर पिस्टल में स्वर्ण पदक हासिल किया है। उन्होंने इस दौरान खेलों का नया रिकॉर्ड भी बनाया। अब उनके पास रिकार्ड स्वर्ण पदक है लेकिन अब वह एक और परीक्षा को लेकर चिंतित हैं। अनीश ने कहा कि मुझे पदक की पूरी उम्मीद थी क्योंकि अन्य टूर्नामेंटों में भी मैंने अच्छा प्रदर्शन किया था। नाम बदलते रहे लेकिन मैंने वही परिणाम हासिल किए।
गोल्ड लेकर ऐतिहासिक कारनामा करनेवाले अनीश को अब चिंता गणित की सता रही है। तभी तो अनीश ने कहते हैं कि मुझे हिंदुस्थान पहुंचने के तुरंत बाद दसवीं की परीक्षा देनी है। उसमें हिंदी, सामाजिक विज्ञान और गणित के पेपर शामिल हैं। मैं गणित को लेकर थोड़ा चिंतित हूं। मैंने उसकी कुछ भी तैयारी नहीं की है। मुझे अब लगातार तीन दिन तक अब उस पर ही ध्यान देना होगा। सीबीएसई ने अनीश के लिए अलग से परीक्षा की व्यवस्था की है। अनीश मैक्सिको आईएसएसएफ विश्व कप और सिडनी में आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप का हिस्सा थे और इसके बाद उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि सीबीएसई ने मुझ पर जो भरोसा दिखाया उस पर मैं खरा उतरा, यह अच्छा लग रहा है। उन्होंने मेरे लिए बहुत बड़ा फैसला किया। अब परीक्षा में उत्तीर्ण होने की एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी इस उभरते युवा निशानेबाज पर है। वह कहते हैं कि अच्छा प्रदर्शन करने के दबाव में मैं बेहतर परिणाम हासिल करता हूं। वह वास्तव में दबाव का पूरा आनंद लेते हैं ऐसे में परीक्षा के दबाव को आसानी से पार करके वह अपने भविष्य के लिए जरूरी दसवीं की परीक्षा में भी ऐतिहासिक जीत दर्ज करेंगे, क्योंकि समस्त देशवासियों का आशीर्वाद उनके साथ है। -प्रेमचंद शर्मा