" /> ग्रहों का ग्रहण है कोरोना– आचार्य पवन त्रिपाठी

ग्रहों का ग्रहण है कोरोना– आचार्य पवन त्रिपाठी

१४ अप्रैल के बाद मिलेगी राहत
३० जून तक बीमारी होगी खत्म
संपूर्ण विश्व कोरोना महामारी की चपेट में आ गया है और अब तक हजारों जानें चली गई हैं। अभी तक इस महामारी की कोई दवा नहीं उपलब्ध हुई है। इस महामारी से बचने के लिए सावधानी और परहेज ही उपाय बताया जा रहा है। जब भी पृथ्वी पर किसी भी प्रकार की कोई घटना-दुर्घटना घटित होती है तो उसके पीछे ग्रह नक्षत्रों का व्यापक प्रभाव होता है। उसके कारण ही इस तरह की समस्याएं आती हैं और ग्रहों के बदलाव से निजात भी मिलती है। ऐसा कहना है प्रसिद्ध ज्योतिषी आचार्य पवन त्रिपाठी का।

त्रिपाठी के अनुसार ज्योतिष की दृष्टि से दिसंबर २०१९ में चीन में प्रारंभ हुई इस बीमारी का प्रसार संपूर्ण विश्व में हुआ है। दिसंबर २०१९ में शनि, बृहस्पति, केतु और सूर्य धनु राशि में थे। सूर्य, शनि और केतु पाप ग्रह हैं, जिन्होंने मिलकर इस प्रकार का दुर्योग बनाए। गोचर में शनि २४ जनवरी २०२० को मकर राशि में प्रवेश किए, उसके बाद इस संक्रमण ने तीव्र गति से अपना पांव पैâलाया। सूर्य १४ अप्रैल २०२० को मेष राशि में प्रवेश करेंगे, उसके बाद इस महामारी की तीव्रता कम होगी। बृहस्पति ३० मार्च को मकर में प्रवेश करेंगे, जो उनकी नीच राशि है। वे शनि से जुड़ जाएंगे जो ज्यादा अशुभ फल देनेवाले हैं। बृहस्पति पुन: वक्री होकर ३० जून २०२० को धनु राशि में आ जाएंगे, उसके बाद पूरे विश्व को राहत मिलेगी। ग्रहों के अनुसार १४ अप्रैल के बाद राहत और ३० जून के बाद इस बीमारी से निजात मिलेगी। भारत वर्ष की कुंडली के अनुसार भी १४ अप्रैल तक समय ज्यादा खराब है। भारतीय नव वर्ष का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा बुधवार २५ मार्च २०२० से होगा और सोमवार, १२ अप्रैल वर्ष २०२१ तक बुध राजा और प्रधानमंत्री चंद्र का वर्चस्व रहेगा। यह संकेत है कि राजा और मंत्री दोनों के प्रभाव से नए रोग का शमन जून २०२० तक होगा। त्रिपाठी के अनुसार इस समय में सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताए निर्देश का पालन करें तथा धार्मिक दृष्टि से शिव जी का अभिषेक और महामृत्युंजय जप एवं हवन करने से लाभ मिलेगा।