ग्लोबल स्तर पर रहेगी गांधी जयंती की धूम

हिंदुस्थान के सबसे बड़े उपदेशक का जन्मदिन ग्लोबल स्तर पर मनाया जाएगा। स्वच्छ भारत की परिकल्पना करनेवाले महात्मा यानी महात्मा गांधी की १५०वीं जयंती इस बार कुछ खास अंदाज में मनाई जाएगी। देशी स्तर पर ही नहीं बल्कि ग्लोबल जगत पर भी जयंती की धूम रहेगी। जयंती का उत्सव उल्लास के तौर पर नहीं मनाया जाएगा बल्कि समूचे संसार को स्वच्छ संदेश देने की अपील के तौर पर अनुसरण किया जाएगा। इसकी घोषणा बीते दिनों प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र के सालाना ७४ वें अधिवेशन में की, जिसे सैकड़ों देशों ने स्वीकार किया। विश्वस्तर पर होनेवाले कार्यक्रमों में मुख्यत: ग्लोबल साइकििंलग इवेंट, वेजिटेरियन फूड फेस्टिवल, वैश्विक स्वच्छता अभियान शामिल होंगे। हर जगह तैयारियां हो रही हैं।
दो अक्टूबर को लेखन प्रतियोगिता के रूप में कई देशों के मशहूर शख्सियतों से ‘गांधी साहित्य’ लिखवाने के भी कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसका मकसद गांधी की खादी को जनसंदेश और हेल्थ के तौर पर बढ़ावा दिया जाना होगा। गांधी साहित्य संकलन के लिए कई देशों के ख्यातिप्राप्त राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार, पत्रकार, र्आिटस्ट्स और बिजनेस लीडर्स समेत डेढ़ सौ शख्सियतों का चुनाव किया गया है। इन सबके सामने एक ही प्रश्न परोसा जाएगा। प्रश्न होगा २१वीं शताब्दी में गांधी की अहमियत? केंद्र सरकार महात्मा गांधी के अनछुए पहलुओं को सिर्फ िंहदुस्थान तक ही सीमित नहीं रखना चाहती। उनका प्रचार समूचे संसार में करना चाहती है। सरकार चाहती है कि गांधी के दिखाए अहिंसा के रास्ते पर पूरी दुनिया चले, उनका शांति अभियान निरंतर चलता रहे।
गौरतलब है कि पूरी दुनिया विगत कुछ वर्षों से आतंक से ग्रस्त है, इससे छुटकारा पाने के लिए कई तरह की कोशिशें भी जारी हैं। संसार में शांति पैâले इस दिशा में भारत सरकार गांधी के दिखाए रास्तों का प्रचार हर ओर करना चाहती है। यही कारण है कि इस बार महात्मा गांधी की जयंती बड़े स्तर पर मनाने का पैâसला किया है। सरकार इस बार गांधी से जुड़े दो क्रांतिकारी कदमों का प्रचार करेगी। अव्वल, खादी का प्रचार और दूसरा गांधी साहित्य संकलन? साहित्य संकलन से विदेशों में भी खादी के कपड़ों का इस्तेमाल और हेल्थ के तौर पर बढ़ावा देना शामिल होगा। दो अक्टूबर को महात्मा गांधी पर इंटरनेशल स्तर पर वार्ता को बढ़ावा देने के लिए तकरीबन सैकड़ों कार्यक्रमों की कार्य योजना बनाई गई है।
१५०वीं जयंती को सफल बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। इसमें जनसहयोग की भी अपील की जा रही है। एक इवेंट में दुनियाभर के जाने-माने कलाकारों से गुजराती में ‘वैष्णव जन’ तो भजन गायन और दूसरा विश्वभर की महत्वपूर्ण इमारतों पर गांधी की तस्वीरों का डिजिटल प्रोजेक्शन शामिल है, साथ ही केंद्र सरकार डेढ़ सौवीं गांधी जयंती पर डाक टिकट जारी कराने के लिए दुनियाभर के देशों से बात कर रही है, जो अंतिम दौर में है। गौरतलब है कि २१वीं शताब्दी में महात्मा गांधी के बताए रास्ते क्या अहमियत रखते हैं? इसका अनुसरण हमारी हुकूमत पूरे जगत को कराना चाहती है। इसी कड़ी में सरकार चारों तरफ खादी को बढ़ावा देना चाहती है।
गांधी ने कभी कहा था कि खादी धारण करने से अंदरूनी स्तर पर शांति का एहसास होता है लेकिन यह सच है कि विगत कुछ सालों से देश के अलावा विदेशों में भी खादी की सामग्री की बिक्री बढ़ी है। दुनियाभर में पैâले इंडियन मिशन से खादी को दुनियाभर में महज कपड़ा नहीं बल्कि टिकाऊ विकास और रोजगार सृजन के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। लोग खादी का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करें, इसके लिए हेल्थ सलूशन और खादी आइडिया का इनोवेटिव तरीके को ढूंढ़ा जा रहा है। युवा पीढ़ी महापुरुषों के ज्ञान से दूर होती जा रही है। उनके पास सिर्फ गूगल का ज्ञान है लेकिन विदेशों की कई यूनिर्विसटीज में आज भी गांधी पर लिखी सामग्री का अनुवाद करके पढ़ाया जाता है। आगामी दो अक्टूबर पर वैश्विक स्तर पर छात्रों की पहुंच में लाने के लिए गांधी पर विभिन्न भाषाओं में किताबें िंप्रट की गई हैं जो उन्हें मुहैया कराई जाएंगी। साथ ही गांधी की १५०वीं जयंती को प्रधानमंत्री मोदी के संजीदगी से लेने के चलते आगामी एक साल में होनेवाले सेलिब्रेशंस पर सरकार डॉक्युमेंटरी भी बनाएगी, जिसे प्रमुख मौको पर दिखाई जाएगी।
कुछ बड़े उदाहरण ऐसे भी हैं जो बताते हैं कि गांधी के दिखाए रास्तों पर चलकर वैâसे बदलें? महात्मा गांधी पर लिखी रोमैन की बायोग्राफी ने प्रसिद्ध सेविका मेडेलीन को बहुत प्रभावित किया था। उन पर गांधी का प्रभाव इस कदर हुआ कि उन्होंने अपनी वास्तविक लाइफ त्यागकर गांधी के बताए रास्तों पर चला और शराब छोड़कर, खेती करना तथा गांधी के आश्रम में अपना जीवन काटना शुरू कर दिया था। ऐसे कई उदाहरण हैं जो हमें गांधी के दिखाए पथों पर चलने को मजबूर करते हैं। उदार और भिन्न खयालोंवाले ऐसे कई लोग थे, जो गांधी की संगत में आकर बदल जाते थे। उनके आश्रम के एकांत माहौल में फिट हो जाते थे। लोगों को अपना पूर्व का मुश्किल भरा जीवन बाद में सहज लगने लगता था।
ऐसे महापुरुषों की बताई बातें आज भी हमें सही-गलत के अंतर का बोध कराती हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर सरकार गांधी की १५०वीं जयंती को यादगार बनाने के लिए प्रयासरत है। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को निर्देश दिए हैं कि गांधी जयंती से लेकर माह के अंत तक यानी ३१ अक्टूबर तक अपने-अपने क्षेत्रों में लगभग १५० किमी की पदयात्रा करें और महात्मा गांधी का संदेश जन-जन तक पहुंचाएं, साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रम और गोष्ठियां आयोजित कर जनता में स्वच्छ अभियानों का प्रचार-प्रसार करें। जिससे सभी में स्वच्छता का भाव पैदा हो सके।