घाव: कब्र!, दुल्हन बनना चाहती थी, मिली मौत

किसी मजबूर बेसहारा महिला पर यदि अचानक कोई मेहरबान हो जाए, बहुत ज्यादा सहानुभूति दिखाने लगे तो उस महिला को सतर्क हो जाना चाहिए। उस मेहरबान-मददगार से बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाने या सपने संजोने से पहले उसकी वास्तविक मंशा जांच लेनी चाहिए क्योंकि कभी-कभी मदद की कीमत अस्मत या जान देकर भी चुकानी पड़ जाती है। मानखुर्द निवासी रोहिणी घोरपडे के मामले में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। रोहिणी की हत्या की गुत्थी सुलझाने में पुलिस को भले ही ३ महीने से ज्यादा वक्त लग गया होगा लेकिन उसके हत्यारे प्रेमी ने हत्या से दो दिन पहले ही उसकी कब्र खुदवा ली थी। शादी की जिद यानी दोबारा दुल्हन बनने के अरमान रोहिणी की मौत की वजह बने।
२८ वर्षीय रोहिणी मानखुर्द के ज्योतिर्लिंग नगर स्थित संताजी धनाजी चाल में रहती थी। वह वाशी स्थित मनपा अस्पताल में कांट्रेक्ट पद्धति पर काम करती थी। १४ नवंबर को सुबह ११ बजे रोहिणी अपनी सहेली की शादी का बहाना बनाकर घर से निकली लेकिन वापस लौटकर नहीं आई। १६ नवंबर को रोहिणी के बड़े भाई गुलाबराव मोहिते ने मानखुर्द पुलिस थाने में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।
जोन ६ के पुलिस उपायुक्त शाहजी उमाप व ट्रॉम्बे विभाग के एसीपी बजरंग बनसोडे के मार्गदर्शन तथा मानखुर्द पुलिस थाने के वरिष्ठ पुुलिस निरीक्षक नितीन बोबडे के नेतृत्व में पीआई चंद्रकांत लांडगे, पीएसआई तुकाराम घाडगे व प्रताप देसाई की टीम ने मामले की जांच शुरू की।
पुलिस को पता चला कि वाशी अस्पताल में काम करनेवाले सुनील रामा शिर्वेâ के साथ रोहिणी का प्रेमसंबंध चल रहा था तथा रोहिणी १४ नवंबर को सुनील के साथ उसके गांव मानगांव ही गई थी, वहीं दूसरी ओर १५ नवंबर को रोहिणी के एसबीआई के एटीएम कार्ड का इस्तेमाल करके कोपरखैरणे स्थित आईडीबीआई व कोटक महेंद्रा के एटीएम केंद्रों से ६५ हजार रुपए निकाले गए थे लेकिन एटीएम में लगे सीसीटीवी वैâमरों में पैसा निकालनेवाला कोई और था, जिसकी स्पष्ट तस्वीर वैâमरे में दर्ज नहीं हो सकी थी। लेकिन मानखुर्द पुलिस की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद एटीएम से पैसे निकालनेवाले रामचंद्र जाधव की शिनाख्त कर ली। उन्हें पता चला कि रामचंद्र, सुनील का दोस्त है। कोपरखैरणे में रहनेवाला रामचंद्र लगातार सुनील के संपर्क में था तथा वह नई मुंबई में एक बड़े केबल चालक के पास काम करता था। वारदात के बाद पुलिस ने रामचंद्र को उसके सातारा जिले के कराड तालुका स्थित वानरवाड़ी गांव से दबोच लिया। रामचंद्र की गिरफ्तारी के बाद सुनील के कुकर्मों का राजफाश हो गया।
पति की मौत के बाद सुनील ने नौकरी हासिल करने में रोहिणी की मदद की थी। नौकरी के सिलसिले में मुलाकातों के दौरान वह सुनील के करीब आई थी। सुनील ने नौकरी दिलाकर जो एहसान किया था उसके बदले प्यार का झांसा देकर वह रोहिणी को अपनी हवस का शिकार बनाने लगा। सुनील पहले से ही विवाहित था जबकि विधवा रोहिणी सुनील से विवाह करके एक बार फिर सुहागिन बनने के सपने देखने लगी। सुनील भी उसे सपने दिखाकर वासना की आग मिटाता रहा लेकिन इन संबंधों की भनक सुनील की बीवी को लग गई, जिसके बाद उसके घर में महाभारत छिड़ गया। दूसरी ओर रोहिणी भी सुनील पर शादी के लिए दबाव बढ़ाने लगी। रोहिणी और अपने नाजायज संबंधों की आग में जलते अपने घर को बचाने और रोहिणी से छुटकारा पाने के लिए सुनील ने उसकी हत्या की साजिश रच डाली। रोहिणी को रास्ते से हटाने की योजना में सुनील ने अपने दोस्त रामचंद्र जाधव व विजय सिंह मोरे की मदद ली। साजिश से अनजान रोहिणी १४ नवंबर को सुबह सुनील और रामचंद्र व विजयसिंह के साथ कार क्रमांक एमएच ४३ बीके ४१०१ से मानगांव के लिए रवाना हुई थी। सुनील मूलरूप से मानगांव का ही निवासी है, सिरसाड गांव स्थित पुलिया के पास सुनील और उसके साथियों ने रोहिणी के सिर पर पहले कुदार के डंडे से वार किया फिर साड़ी से रोहिणी का गला घोंट दिया। वहीं पास में दो दिन पहले खोदे गए गड्ढे में रोहिणी की लाश को दफनाकर वे मौके से फरार हो गए। कब्र से निकालकर पुलिस ने जेजे अस्पताल में लाश का पोस्टमार्टम कराया तो सिर पर गहरी चोट के कारण मौत होने का खुलासा हुआ।

 मददगार ले लूटी अस्मत, छिनी जिंदगी
 शादी की जिद बनी काल
 दो दिन पहले खोदी थी कब्र
 कुकर्म में साथी बने दोस्त