घाव… लावारिस!, टैटू से हुई मृतक की पहचान

मुंबई की लोकल ट्रेनों को मुंबई की लाइफ लाइन कहा जाता है लेकिन इसी लाइफ लाइन से सफर के दौरान प्रतिदिन करीब दो दर्जन लोग हादसों का शिकार होते हैं। इनमें लगभग १० लोग अकाल काल का शिकार भी बन जाते हैं। रेल हादसों में मरनेवाले एवं जख्मी लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाना एवं उनकी शिनाख्त करना रेलवे पुलिस के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती होती है। लोगों के पास से मिले सामान, पहचान पत्र, मोबाइल फोन आदि से पुलिस मृतकों एवं घायलों के परिजनों को ढूंढ़ने का प्रयास करती है। प्राय: हादसाग्रस्त की हालत इतनी वीभत्स हो जाती है कि उनकी शिनाख्त मुश्किल हो जाती है। शरीर के कपड़े आदि फटकर निकल जाते हैं तथा सामान कहीं और तथा लाश कहीं और पहुंच जाती है। ऐसे हालात में लाश पर मिले टैटू आदि से पुलिस मृतकों की शिनाख्त की कोशिश करती है। बीते दिनों बांद्रा रेलवे पुलिस की हद में दो मृतकों के परिजनों को ढूंढ़ने का सराहनीय प्रयास रेल पुलिस ने किया था।
एक घटना में एक ५० वर्षीय मजदूर ने बांद्रा टर्मिनस रेलवे यार्ड में ट्रेन के आगे कूद कर खुदकुशी की थी। १ नवंबर को घटी इस घटना में बांद्रा रेलवे पुलिस को मृतक के पास से उसके मोबाइल फोन के अलावा कुछ और नहीं मिला था। मोबाइल फोन में मिले नंबरों से संपर्क करके पुलिस ने मृतक के भाई को ढूंढ़ निकाला, जो कि सूरत में मजदूरी करता था। मृतक के भाई से मृतक का नाम मुरली खली साहू होने की जानकारी पुलिस को मिली थी, जो कि मूल रूप से ओडिशा का रहनेवाला था। मूरली सूरत में अपने भाई के साथ मजदूरी करता था।
इसी तरह १५ अक्टूबर, २०१९ को भोर में ६.४० बजे के करीब सांताक्रुज रेलवे स्टेशन पास घटी एक अन्य घटना में एक १९ वर्षीय युवक की लोकल ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। बांद्रा रेलवे पुलिस को मृतक की जेब से ६७ हजार रुपए, एक सोने का पैंडल, एक मंगलसूत्र, दो अंगूठी और दो मोबाइल फोन मिला था लेकिन उसकी पहचान हो सके ऐसा कोई दस्तावेज पुलिस को नहीं मिला था।
चोर निकला मृतक
सांताक्रुज के हादसा में जान गंवानेवाले युवक के पास से मिले सामानों से रेलवे पुलिस ने यह अनुमान लगाया था कि मृतक कोई चोर हो सकता है। वह गुजरात की तरफ से बांद्रा टर्मिनस आनेवाली लंबी दूरी की किसी ट्रेन से सांताक्रुज आया होगा। रास्ते में उसने लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों का सामान चुराया होगा और सांताक्रुज में चलती ट्रेन से तब उतर गया होगा, जब ट्रेन बांद्रा टर्मिनस जाने के लिए यार्ड में प्रवेश करती है। यार्ड से गुजरने के दौरान ट्रेन गति बेहद कम हो जाती है लेकिन ट्रेन से उतरकर लोकल ट्रेन के लिए प्लेटफॉर्म नंबर ३-४ पर जाते समय अंधेरे में वह चर्चगेट जानेवाली धीमी लोकल की चपेट में आ गया होगा। मृतक के चोर होने की पुष्टि घटना के एक घंटे बाद बांद्रा रेल पुलिस थाने में आए एक पीड़ित ने कर दी। पीड़ित ने बताया कि वह लोकशक्ति एक्सप्रेस ट्रेन से बांद्रा टर्मिनस आया था। रास्ते में किसी ने उसके सामान में से मोबाइल फोन, कुछ आभूषण एवं ६७ हजार रुपए चुरा लिए। उक्त शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए सामान का विवरण सांताक्रुज में हादसाग्रस्त हुए युवक के पास से मिले सामान से मिलता जुलता था। रेलवे पुलिस ने जब मृतक के पास से मिला सामान शिकायतकर्ता को दिखाया तो उसने अपना सामान, मोबाइल फोन आदि पहचान लिया। पुलिस ने जब दूसरे मोबाइल फोन के मालिक से संपर्क किया तो उसने भी बताया कि लोकशक्ति ट्रेन में सफर के दौरान उसका मोबाइल फोन चोरी हो गया था।
शिनाख्त की चुनौती
मृतक के पास से मिले सामान से मृतक के चोर होने की पुष्टि के बाद पुलिस के समक्ष उसकी शिनाख्त सबसे बड़ी चुनौती बन गई थी। कोई पहचान पत्र नहीं था और न ही मुंबई रेलवे पुलिस की हद में उक्त चोर के खिलाफ कोई मामला पहले से दर्ज था। ऐसे में रेलवे पुलिस ने मृतक के शरीर पर लिखे मोती और मॉम के टैटू से उसकी पहचान ढूंढ़ने का प्रयास शुरू किया। पुलिस ने अपने प्रयास का दायरा बढ़ा दिया। मुंबई के आसपास के रेलवे पुलिस थानों को भी मृतक का ब्यौरा भेज दिया। पुलिस की मेहनत रंग लाई। वलसाड रेलवे पुलिस ने मोती और मॉम टैटू से मृतक को पहचान लिया। वलसाड रेलवे पुलिस थाने ने वर्ष २०१५ में उसे चोरी के एक मामले में गिरफ्तार किया था। मृतक की पहचान मोतीशंकर पवार के रूप में हुई जो कि कलवा (ठाणे) का निवासी था। पुलिस ने मृतक के परिजनों को ढूंढ़ कर उसकी लाश उन्हें सौंप दी।