चंडिका स्तोत्र पाठ से सुखमय होगा दांपत्य

गुरुजी, स्वप्न में सर्प देखता हूं क्या कारण है, उपाय बताएं? -राम अवतार यादव
(जन्म – १० नवंबर १९९४, समय ११.२० बजे, प्रयागराज-उत्तर प्रदेश)
राम अवतार जी, आपका जन्म मकर लग्न एवं मकर राशि में ही हुआ है, इस समय आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। कुंडली का गहन अध्ययन किया गया। सप्तम स्थान पर नीच राशि का मंगल बैठकर आपको मांगलिक भी बना दिया है। विवाह करने से पहले मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ जरूर कराएं, नहीं तो दांपत्य जीवन असुविधा में आ सकता है। आपकी कुंडली में राहु के साथ सूर्य बैठकर ग्रहण योग भी बना रहा है। राहु बृहस्पति एक स्थान पर बैठकर चांडाल योग बना दिया है। अत: आपकी कुंडली में सर्प शापित योग बन रहा है, इन्हीं कारणों से स्वप्न में सर्प भी दिखाई देता है। इनकी पूजा वैदिक विधि से कराएं एवं जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं। धीरे-धीरे सर्प का स्वप्न आना बंद हो जाएगा तथा विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

गुरु जी, मेरी राशि एवं मेरा भविष्य कैसा होगा?
-सोनी पाल
(जन्म- १७ फरवरी १९९८, समय दिन १०.३५ बजे, आजमगढ़-उत्तर प्रदेश)
सोनी जी, आपका जन्म मेष लग्न एवं तुला राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। पंचम भाव से शिक्षा एवं बौद्धिक स्तर का विचार किया जाता है। पंचम भाव का स्वामी सूर्य एकादश भाव में केतु बृहस्पति बुध मंगल के साथ में बैठा है। आप बुद्धिमान तो हैं लेकिन पंचम भाव पर राहु बैठकर शिक्षा भाव को कमजोर बना दिया है। राहु की दृष्टि सूर्य पर भी पड़ रही है, अत: ग्रहण योग भी बना दिया है तथा बृहस्पति पर राहु की पूर्ण दृष्टि पड़ने के कारण चांडाल योग भी बन रहा है। इन दोनों योगों के कारण कभी-कभी आप कन्फ्यूजन में भी हो जाती हैं। शिक्षा के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए प्रतिदिन सूर्य को प्रणाम करें एवं ग्रहण योग की पूजा वैदिक विधि से कराएं तथा तर्जनी अंगुली में पुखराज रत्न धारण करें, जो शिक्षा को विकसित कर देगा। जीवन की अन्य गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाएं।

गुरुजी, मेरी शादी कब होगी और भाग्योदय कब होगा? – तुषार सावंत
(जन्म- २ अप्रैल १९८८, समय प्रात: ७.१५ बजे, जोगेश्वरी-मुंबई)
तुषार जी, आपका जन्म मेष लग्न एवं कन्या राशि में हुआ है। इस समय आपकी राशि पर शनि की ढैया भी प्रारंभ हो गई है तथा राहु की महादशा भी चल रही है। आपकी कुंडली में पंचम भाव पर केतु एवं लाभ भाव पर राहु बैठकर कालसर्प योग भी बना दिया है। विवाह का समय चल रहा है लेकिन कालसर्प योग के कारण जीवन साथी का चयन करने में अनेक प्रकार की कठिनाइयां भी आ रही हैं। अत: अनुकूल जीवन साथी प्राप्त करने के लिए कालसर्प योग की शांति वैदिक विधि से कराना आवश्यक है। जीवन की संपूर्ण गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाना आवश्यक है।

गुरु जी मेरी राशि क्या है और कुंडली में दोष क्या है?
– प्रशांत चौधरी
(जन्म- १० सितंबर १९९४, समय प्रात: ६ बजे, मिर्जापुर-उ.प्र.)
प्रशांत जी आपका जन्म कन्या लग्न एवं तुला राशि में हुआ है। लग्नेश बुध उच्च राशि का होकर लग्न में बैठा है, जो आपके आत्मबल को बढ़ा रहा है तथा दशम भाव में पराक्रमेश एवं अष्टमेश मंगल दशम भाव में बैठा है। अर्थात दशम भाव में यदि मंगल बैठता है तो जातक कुल का दीपक होता है लेकिन आपकी कुंडली में द्वितीय भाव पर राहु-गुरु-चंद्र-शुक्र बैठकर चांडाल योग भी बना दिया है तथा सूक्ष्मता से अवलोकन करने पर कालसर्प योग ही बन रहा है। इन्हीं लोगों के कारण आप अपने पूर्ण परिश्रम का पारिश्रमिक प्राप्त नहीं कर पाते होंगे। जीवन की संपूर्ण गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं तथा पूर्ण पारिश्रमिक प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम चांडाल योग की पूजा वैदिक विधि से कराना आवश्यक है।

गुरुजी मेरा लव मैरिज सफल होगा या नहीं? – संजय परमार
(जन्म- २१ मई १९८५, समय दिन में ११.५० बजे, पाली-राजस्थान)
संजय परमार जी आपका जन्म कर्क लग्न एवं वृष राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का गहन अध्ययन किया। यह समझ में आ रहा है कि विवाह का कारक ग्रह बृहस्पति एवं शुक्र होता है। आपकी कुंडली में बृहस्पति सप्तम भाव पर नीच राशि का होकर बैठा है। इस योग के कारण अनुकूल पत्नी का प्राप्त न होना तथा बार-बार किसी न किसी कारण असुविधा का प्राप्त होना है। बृहस्पति जिस स्थान पर रहता है उस स्थान को कमजोर बना देता है वैसे ही आपकी राशि पर इस समय शनि की ढैया भी चल रही है, शनि संबंध बनाने में अड़चन भी डालता है। गहराई से देखा जाए तो आपकी कुंडली में चंद्र मांगलिक भी है। शनि का उपाय कराएं और पुखराज धारण करें, विवाह का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। जीवन के अन्य गहराई को जानने की लिए संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाएं।