" /> चना-चावल तक ही सीमित रहा प्रधानमंत्री का भाषण

चना-चावल तक ही सीमित रहा प्रधानमंत्री का भाषण

-पूर्व के भाषणों के मुकाबले सबसे छोटा रहा भाषण
-लोगों को उम्मीद थी कोरोना या चीन पर बोलेंगे 

पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंगलवार को चार बजे आना का इंतजार कर रहा था। इंतजार जब खत्म हुआ और उन्होंने बोलना शुरू किया तो सभी को निराशा हाथ लगी। उनके भाषण से पहले लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे थे कि शायद प्रधानमंत्री कोई बड़ा एलान करेंगे। हो सकता है लाॅकडाउन फिर बढ़ाया जाए या चीन के साथ होने वाले युद्व जैसे हालातों के संबंध में देशवासियों को कोई सूचना दें। पर जब चार पीएम ने अपना संबोधन शुरू किया तो चना-चावल की बात करने लगे। भाषण सुनकर लोग आपस में कानाफूसी करने लगे। बोलने लगे ऐसी घोषणा तो गांव कोटेदार या प्रधान करते हैं। बता दें, इस बार प्रधानमंत्री का भाषण सबसे छोटा रहा। जबकि इससे पहले उनका संबोधन घंटों लंबे रहे। उन्होंने एलान किया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार दीवाली और छठ पूजा तक यानी नवंबर महीने के आखिर तक किया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार 90 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करेगी। पीएम के भाषण से तय हो गया है कि कोरोना संकट अभी आगे भी जारी रहने वाला है। आगे की संभावनाओं को देखते हुए ही उन्होंने राशन वितरण योजना को आगे बढ़ाया है।

पीएम के भाषण पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आईं। आम आदमी पार्टी की नेत्री पूनम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री से ऐसी बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। पूरा देश कोरोना संकट से जूझ रहा है और सीमा पर युद्व जैसे हालात बनें हुए है, तब प्रधानमंत्री चने-चावल की बात करते हैं। वहीं, कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ मीठी-मीठी बातें करते हैं। गलवान में क्या हो रहा है उसकी जानकारी क्यों नहीं देते। कोरोना से निपटने के क्या प्रयास हो रहे हैं, कुछ नहीं बताते। ठीक है आपने ग़रीबों के लिए ऐसा सोचा, पर मध्यमवर्ग का ख्याल क्यों नहीं करते। प्रधानमंत्री के भाषण पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें गरीबी की इतनी परवाह है। पूर्व के प्रधानमंत्रियों ने अब तक सिर्फ धनाड्य लोगों के हितों के लिए ही सोचा किसी ने ग़रीबों के संबंध में नहीं सोचा।