चर्चगेट स्टेशन का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट, डीआरएम ने साधी चुप्पी

चर्चगेट स्टेशन बिल्डिंग के बाहर लगे एल्युमिनियम की सीट गिरने से हुए हादसे में हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में रेलवे की लापरवाही की चर्चा जोरों पर है। इस गंभीर मामले में भी अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। खानापूर्ति के लिए रेलवे ने चर्चगेट स्टेशन का स्ट्रक्चरल ऑडिट का कार्य एक निजी कंपनी को सौंपा है। बता दें कि चर्चगेट स्टेशन की इमारत पर २०१२ में एल्युमिनियम फेकेड लगाया गया था। इसके बाद २०१७ में इस पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पेंटिंग की गई थी। रेल सूत्रों की मानें तो इस ढांचे का समुचित मेंटेनेंस नहीं किया गया, इसके चलते यह हादसा हुआ है। अब जब मामला गंभीर हो गया है, तो रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी जांच समिति बैठाकर मामले को रफा-दफा करने में जुटे हुए हैं। एक व्यक्ति की जान जाने के बाद रेलवे के आला अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।
वेस्टर्न रेलवे के जीएम एके गुप्ता ने जे ग्रेड के अधिकारियों की एक समिति बनाकर जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही रेलवे ने मृतक के परिवार को पांच लाख रुपए देने की घोषणा भी की है।
रेल यात्री परिषद के अध्यक्ष सुभाष गुप्ता कहते हैं कि वेस्टर्न रेलवे के सबसे बड़े स्टेशन पर होनेवाले इस हादसे की जिम्मेदारी डीआरएम संजय कुमार को लेनी चाहिए। क्योंकि जब अच्छे कामों में डीआरएम की पीठ ठोकी जाती है, तब जब एक व्यक्ति की जान गई तो इसकी जिम्मेदारी उन्हें लेनी ही चाहिए। वहीं रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य वैâलाश गौतम कहते हैं कि इस मामले में इंजीनियर के अधिकारी जिम्मेदार हैं। वे डीआरएम को गलत जानकारी देते हैं, जिसे बिना जांचे डीआरएम सही मान लेते हैं।