चर्चित कठुआ रेप-हत्या मामले में 3 को उम्रकैद, 3 को 5-5 साल की सजा, एक बरी

चर्चित कठुआ हत्या मामले में सोमवार सुबह जिला एवं सत्र न्यायालय पठानकोट ने सात आरोपितों में से छह को दोषी करार दिया। दोपहर बाद करीब साढ़े चार बजे मामले पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास जबकि तीन को पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई। जबकि सांझी राम के बेटे विशाल जंगोत्रा को अदालत ने बरी कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में सांझी राम, दीपक खजुरिया और प्रवेश दोषी को मुख्य आरोपी करार देते हुए 376 में 25 साल की सजा और 302 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दीपक और सांझी राम को एक-एक लाख रूपये का जुर्माना भी किया। अन्य तीन दोषियों सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, एसपीओ सुरेंद्र कुमार व कांस्टेबल तिलक राज को 201 के तहत पांच-पांच साल की सजा और 50-50 हजार रूपये जुर्माना भी किया गया है।

वहीं कोर्ट के इस फैसले से रसाना गांव के लोग नाखुश हैं। गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और सांझी राम के परिजन भी किसी से मिल नहीं रहे हैं। सांझी राम की बेटी ने कुछ देर अपने घर से बाहर आकर मीडिया से यह बात अवश्य कही कि वे अभी भी अपने पिता की बेगुनाही पर अडिंग हैं और उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए वह उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह उनके भाई को इंसाफ मिला है, उनके पिता भी बेगुनाह करार होकर मामले से बरी होंगे।

यह मामला पठानकोट की विशेष अदालत में चल रहा है। इस फैसले पर पूरे देश की निगाहें हैं, वही पीड़िता के परिजन और आरोपी पक्ष के परिजन एवं इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हिंदू एकता मंच के सदस्य भी फैसले को जाने के लिए कोर्ट के बाहर मौजूद थे। कोर्ट का फाइनल फैसला जानने के लिए पठानकोट कोर्ट परिसर के बाहर मीडिया का जमावड़ा लगा रहा।

जानें इस मामले की समय-सीमा, कब-कब क्या-क्या हुआ
10 जनवरी 2018–कठुआ में बकरवाल जनजाति बंजारा समुदाय की आठ साल की बच्ची कठुआ जिले के रसाना गांव में मवेशियों को चराने के दौरान लापता हो गई।
12 जनवरी, 2018– हीरानगर पुलिस स्टेशन में पीड़िता के पिता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई।
17 जनवरी, 2018–बच्ची का शव मिला। पोस्टमार्टम में सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हुई।
22 जनवरी, 2018–मामला जम्मू-कश्मीर अपराध शाखा को सौंप दिया गया।
23 जनवरी 2018–जम्मू और कश्मीर सरकार ने मामले की जांच राज्य पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी ।
17 जनवरी 2018–हिंदू एकता मंच नाम के एक संगठन ने कठुआ में वकीलों के समर्थन में रैली निकाली, जिसमें भाजपा के स्थानीय विधायक राजीव जसरोटिया और दूसरे नेता भी शामिल थे।
10 फ़रवरी 2018–क्राइम ब्रांच ने को एक स्पेशल पुलिस ऑफ़िसर दीपक खजुरिया को गिरफ़्तार किया।
5 अप्रैल 2018–इस पूरी घटना के कथित मास्टरमाइंड सांझी राम ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।
9 अप्रैल, 2018–पुलिस ने 8 में से 7 आरोपियों के खिलाफ कठुआ की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
10 अप्रैल, 2018–8वें अभियुक्त के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। उसके किशोर होने का दावा।
13 अप्रैल 2018–भाजपा के दो मंत्री लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा से पार्टी ने इस्तीफ़ा माँगा।
14 अप्रैल, 2018–पुलिस ने 14 अप्रैल को अपराध शाखा के अधिकारियों को अदालत में चार्जशीट दाखिल करने से रोकने के लिए विरोध करने और विरोध का प्रयास करने के लिए वकीलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
16 अप्रैल, 2018–सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू और कश्मीर सरकार से इस बात का जवाब मांगा कि पीड़िता के परिवारवालों ने मामले के ट्रायल को राज्य से बाहर कराए जाने की मांग की है।
18 अप्रैल 2018–पहली सुनवाई में क्राइम ब्रांच को सभी आरोपियों को आरोप-पत्र की कॉपी देने के निर्देश।
7 मई, 2018–सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पंजाब के कठुआ से पठानकोट में शिफ्ट किया। दरअसल, पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल कर केस का ट्रायल जम्मू और कश्मीर से बाहर कराने की मांग की थी।इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पंजाब के पठानकोट में ट्रांसफर कर दिया था।
3 जून, 2019–इस मामले की सुनवाई 3 जून को पूरी हुई ।
10 जून, 2019–विशेष अदालत ने सात में से छह आरोपियों को दोषी करार दिया और सजाएं सुनाई।