" /> चलने के लिए फिट है परे की 52 लोकल

चलने के लिए फिट है परे की 52 लोकल

मॉनसून की मुसीबत से लड़ने को तैयार पश्चिम रेलवे
– पूरा हुआ नालों की सफाई का काम

पश्चिम रेलवे ने अपने ईएमयू उपनगरीय रेकों के मॉनसून संबंधी रखरखाव का कार्य भी शुरू कर दिया है, जिसमें ईएमयू कोचों और उनके विद्युत उपकरणों में संभावित रिसाव का पता लगाने और प्लग करने, खिड़कियों और दरवाजों का सुचारू मूवमेंट सुनिश्चित करने जैसे कार्य मुख्य रूप से शामिल हैं। कोचों की छत और इंसुलेटर की सफाई का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण ईएमयू कार शेड, मुंबई सेंट्रल में न्यूनतम कर्मचारियों की उपस्थिति होने के बावजूद अब तक 52 रेकों में इस कार्य को पूरा किया गया है, जो कि कभी भी चलने के लिए फिट हैं। लॉकडाउन खत्म होने के बाद मॉनसून मुसीबत न बने इसलिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लॉकडाउन में मजदूरों की कमी है, लेकिन ट्रेनें नहीं चलने के कारण काम के लिए समय भी ज्यादा मिल रहा है।
रेलवे ने चर्चगेट से विरार के बीच सभी बड़े 55 नालों का मनपाओं के साथ निरीक्षण पूरा कर लिया है। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविंद्र भाकर के अनुसार प्रतिवर्ष मुंबई उपनगरीय खंड पर भारी वर्षा के कारण रेलवे ट्रैक पर होनेवाले जल-जमाव से सेवाएं बाधित होती हैं। इसलिए इस बार नालों की सफाई का काम खत्म करके संबंधित निगमों एमसीजीएम, एमबीएमसी और वीवीसीएमसी के साथ संयुक्त निरीक्षण किया जा चुका है।

47 किमी नालों की सफाई
पश्चिम रेलवे पर 47 किलोमीटर नाले की नेटवर्क की मॉनसून पूर्व सफाई कार्य पूर्ण किया जा चुका है।
चर्चगेट-विरार खंड के बाढ़ संभावित क्षेत्रों में विभिन्न यार्डों और ब्लॉक सेक्शनों में लगभग 10 किलोमीटर अतिरिक्त नाले उपलब्ध कराए गए हैं। इन नालों को शहर के निकासी प्रणालियों के साथ जोड़ा गया है।

लगाए गए 191 पंप
जलजमाव के दौरान ट्रैक से पानी हटाने के लिए इस बार उच्च क्षमता वाले कुल 191 पंप लगाए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 33% अधिक है। उपनगरीय प्रणाली में बारिश शुरू होते ही इन पंपों को काम में लाया जाएगा। बारिश के दौरान कोई परेशानी न हो इसलिए इन्हें प्रतिदिन प्रयोग के लिए चलाया जाएगा।उपनगरीय खंड में 2,58,000 क्यूबिक मीटर कीचड़, कूड़े इत्यादि की सफाई का कार्य पूर्ण किया गया है। यह कार्य विशेष रूप से डिजाइन की गई स्पेशल ट्रेन बीआरएन, जेसीबी, पोकलेन एवं लगभग 500 श्रमिकों की सहायता से पूर्ण किया गया है। इससे मॉनसून के दौरान सुचारू रूप से बारिश के जल की निकासी में मदद मिलेगी।

15 जगहों पर उठाया ट्रैक
पिछले वर्ष हुई बारिश से सबक लेते हुए इस बार निचले क्षेत्र में 15 लोकेशनों की पहचान की गई है, जहां ट्रैक तथा ओएचई को 100 मिलीमीटर से 250 मिलीमीटर तक उठाया (लिफ्ट किया) गया है। रेलवे का कहना है इस बार मॉनसून के दौरान भारी वर्षा में इससे ट्रैक को डूबने से बचाने में सहायता मिलेगी।

बंद किए लीकेज
चर्चगेट-विरार सेक्शन के बांद्रा और प्रभादेवी की दो लोकेशनों पर लीकेज तथा टूटे-फूटे और पुराने कास्ट आयरन पाइप को चौड़े, आरसीसी कवर वाले जलमार्ग (वॉटर वे) से बदला गया है। इससे इस जलमार्ग प्रणाली (वॉटर वे सिस्टम) से पानी निकास की क्षमता में 300% की वृद्धि हुई है। गोरेगांव-मालाड तथा नालासोपारा-विरार सेक्शन में तीन लोकेशनों पर माइक्रो-टनलिंग से अतिरिक्त जलमार्गों की व्यवस्था की गई है। पिछले मॉनसून में बाढ़ के बाद इन लोकेशनों की पहचान की गई। इस कार्य के अतिरिक्त, बांद्रा (पुलिया संख्या 24) तथा वसई यार्ड में भी अतिरिक्त जलमार्ग की व्यवस्था का कार्य प्रगति पर है तथा 10 जुलाई, 2020 तक इसके पूरे हो जाने की संभावना है।

650 पेड़ों की छंटनी
मॉनसून में ओएचपी ट्रिपिंग को रोकने के लिए ट्रैक के साथ-साथ लगे हुए 650 वृक्षों की शाखाओं की छंटाई की गई। मॉनसूनी बरसात में इंसुलेटर की फ्लैशिंग को रोकने हेतु अब तक 5,500 इंसुलेटरों की साफ-सफाई की गई। पुलों की फिटिंग की भी जांच की गई, जहां क्लीयरेंस क्रिटिकल है। कई जगहों पर पक्षी घोंसले बना देते हैं और जब ट्रेन चलेगी तो उन्हें खतरा होगा इसलिए पश्चिम रेलवे पर अभी तक कुल 2,300 पक्षियों के घोंसले निकाले गए हैं।