चलेगी हिंदी, बढ़ेगी हिंदी जय हिंद की भाषा

बीबीसी की हिंदी सेवा से चर्चित पत्रकार मार्क तुली के अनुसार परिवर्तन प्रकृति का नियम है और इस परिवर्तन की एक निश्चित गति होती है पर हिंदी की गरिमा, वैश्विकता व प्रगति के सिलसिले में जो गति दिखी है, वह अद्भुत है। आज हिंदी हर जगह है। व्यापार में, प्रशासन में, मनोरंजन में, शोध में। राजनीति में, कूटनीति में। मीडिया में और सोशल मीडिया में। गूगल प्लस, फेसबुक, ऑरकुट, ट्विटर, लिंक्डइन, रेडिट, व्हाट्सऐप, प्रâेंडस्टर, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब, पिंटरेस्ट, तंबलर, फ्लिक, मीट-अप जैसे प्लेटफॉर्मों पर हिंदी चलती है। सत्ता की बात करें तो नरेंद्र मोदी के २०१४ में प्रधानमंत्री बनते ही हिंदी के दिन बहुर गए। नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में तबसे हिंदी की तूती बोलने लगी और यह संयुक्त राष्ट्र संघ सरीखे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी छा गई। अब तो यह आबू-धाबी की तीसरी मान्यता प्राप्त भाषा भी बन गई है। अभी तक आबू-धाबी की अदालतों में केवल अरबी एवं अंग्रेजी भाषा को ही मान्यता प्राप्त थी लेकिन हम समस्त हिंदुस्थानियों के लिए यह गौरव की बात है कि अब आबू-धाबी की सरकार ने हिंदी को भी तीसरी भाषा के रूप में मान्यता दे दी है।
बढ़ेगी तो हिंदी ही!
दुनिया में ३००० के करीब भाषाएं हैं, जिसमें हिंदी २००० साल पुरानी भाषा है। १००० ईसवी से चलकर आज २०१९ में भी हिंदी का जलवा बरकरार है। इसे हिंदुस्थान के साथ ही सूरीनाम, फिजी, त्रिनिदाद गुयाना, मारीशस, थाइलैंड व सिंगापुर इन सात देशों की राजभाषा या सह-राजभाषा के रूप में उसे मान्यता प्राप्त है और अब आबू धाबी को मिलाकर हिंदी हिंदुस्थान के अतिरिक्त ८ देशों की मान्यता प्राप्त भाषा बन गई है।
बता दें कि मनुष्य के समस्त श्रेष्ठत्व, उसकी सारी सभ्यता और संस्कृति संबंधी प्रगति के पीछे वस्तुत: भाषा का प्राथमिक हाथ रहा है। मनुष्य जो सामाजिक प्राणी है, वह भाषा के कारण ही है क्योंकि भाषा ही समाज है और सच तो यह है कि भाषा के बिना सृष्टि का कोई मतलब हो ही नहीं सकता। अत: कहा गया है कि सृष्टि के अंधकार में भाषा ही ज्योति है।
इदमन्द: नम: कृत्स्नं जायेत भुवन्त्रयम।
यदि शब्दाह वयं ज्योति ससन्सारम न दीप्यते।।
इसलिए आज तो हिंदी का न केवल सर्व भारतीय अपितु अंतरराष्ट्रीय चरित्र विकसित हो चुका है। यह २००० साल से देश की सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक, राजनीतिक अभिव्यक्ति और संपर्क की भाषा रही है। इसके साथ ही हिंदी प्रत्येक हिंदुस्थानी में राष्ट्रप्रेम तथा स्वाभिमान जगाने वाली, विश्व में उनकी पहचान बनाने वाली, व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करने वाली, प्रत्येक भारतीय को उसके घर परिवार, जड़ों, गौरवशाली अतीत व समृद्ध संस्कृति से जोड़ने वाली भाषा है।
यह देश की अस्मिता का प्रतीक है। हिंदी एकमात्र भाषा ही नहीं हिंदुस्थानी संस्कृति की सबल समर्थ संवाहिका भी है। इसमें संप्रेषणीयता के ऐसे अद्भुत गुण विद्यमान हैं जिनके कारण यह सदियों से इस देश के लोगों में संपर्क भाषा के रूप में निरंतर व्यवहृत होती जा रही है। हिंदी हिंदुस्थान में ही नहीं, हिंदुस्थान के बाहर भी दुनिया के अनेक देशों में बोली, समझी और पढ़ाई जाती है। मुंबई विश्वविद्यालय में हिंदी के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ.करुणाशंकर उपाध्याय के मुताबिक विश्व के ४४ देशों में (इसमें हिंदुस्थान भी शामिल है) हिंदी जाननेवालों की कुल संख्या लगभग डेढ़ अरब है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मुताबिक, ‘हिंदी को मैं राष्ट्रभाषा कहता हूं क्योंकि इसे हिंदुस्थान के अधिक से अधिक लोग बोलते और समझते हैं। किसी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए इतनी विशेषता काफी है।’ और इसीलिए १४ सितंबर १९४९ को हिंदी को भारत संघ की ‘राष्ट्रभाषा’ का दर्जा दिया गया था पर राजभाषा का दर्जा हिंदी के लिए शुभ नहीं रहा। हिंदी विरोध की एक बड़ी राजनीति चली, लिहाजा हिंदी को कई राजभाषा नियमों-अधिनियमों-धाराओं-उपधाराओं में बांध दिया गया पर अब तो हिंदी तेजी से बढ़ रही है। इसका दिल बहुत बड़ा है। पंडित गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी नवरत्न के शब्दों में—
हजारों लफ्ज आएंगे नए आ जाएं क्या डर है
पचा लेगी उन्हें हिंदी की है जिंदा जुबां हिंदी।।
हिंदुस्थान की पहचान है हिंदी। देश के विभिन्न इलाकों में अलग-अलग भाषाएं होने से देश की एकता हिंदी के संपर्क भाषा से बढ़ेगी ही। राजनीति के साथ समाज व तकनीकी दुनिया में भी हिंदी छा गई है। सोशल नेटवर्किंग और ब्लॉगिंग में भी। हर नए कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम (विंडोज, मैकिन्टोश, लिनक्स आदि) के साथ टैब व स्मार्टफोन्स में यूनिकोड के सौजन्य से यह पहले से विद्यमान है। हिंदी समर्थित वेब सेवाएं (ईमेल, अनुवाद, टेक्स्ट टू स्पीच, ई कॉमर्स, क्लाउड आदि) में हिंदी का जलवा अपने शबाब पर है। यानी कि १४ सितंबर १९४९ को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद से आज तक भले ही हिंदी पूरी तरह से हिंदुस्थान की राजभाषा न बन पाई हो पर वह दुनिया भर के दिलों की भाषा जरूर बन गई है।