" /> चाइना के नापाक हरकत से काशीवासियाें में आक्रोश, फूंका चीनी राष्ट्रपति का पुतला

चाइना के नापाक हरकत से काशीवासियाें में आक्रोश, फूंका चीनी राष्ट्रपति का पुतला

साल 1962 और 65 में चीन ने धोखे से भारत पर हमला किया। हज़ारों सैनिक शहीद हुए। उसके बाद कई वर्षों से चीनी सीमा पर रह रह कर तनाव पैदा हुए लेकिन मंगलवार को गलवान वैली लद्दाख में चीन ने नापाक हरकरत करते हुए हमारे 20 जवानों को धोखे से शहीद कर दिया। इस
नापाक हरकत के बाद से भारतीय नागरिकों में आक्रोश है।

इसी क्रम में धर्म की नगरी काशी में सामाजिक संस्था, विशाल भारत संस्था के लमही स्थिति प्रधान कार्यालय पर लोगों ने संस्था के अध्यक्ष डॉ राजीव श्रीवास्तव के नेतृत्व में महिलाओं ने चीन के राष्ट्रपति का पुतला फूका और चीन को आगाह किया कि यह 1962 और 65 का भारत नहीं है, ये 2020 का भारत है। ये ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता है। बता दें की भारत-चीन सीमा पर 1975 के बाद पहली बार भारतीय जवान शहीद हुए हैं।

पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी (Galwan Valley) में चीन के साथ हिंसक झड़प में भारत के कम से कम 20 जवान शहीद हो गए हैं, जबक‍ि चीन (China) को भी भारी नुकसान हुआ है। चीन के 43 सैनिक हताहत हुए हैं। सेना ने बयान में कहा कि जान गंवाने वाले 20 में से 17 सैनिक गतिरोध वाले स्थान पर शून्य से नीचे तापमान में ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। चीन की इस नापाक हरकत के बाद पूरे भारत में आक्रोश की स्थिति है। जगह जगह चीन के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। सरकार से मुहतोड़ जवाबी कार्रवाई किये जाने की मांग की जा रही है।

इसी क्रम में लमही स्थित विशाल भारत संस्था के कार्यालय पर चीन और चीनी सामानों का पुतला दहन किया गया और चाइना विरोधी नारे लगाए गए। चाइना अमानवीय कार्य के विरोध में सपा के लोग भी सामने आये और उन्होंने चीनी राष्ट्रपति का जोरदार विरोध करते हुए पूर्व पार्षद रविकांत विश्वकर्मा के नेतृत्व में शहीद भारतीय जवानों को राजेन्द्र प्रसाद घाट के गंगा तट पर श्रद्धांजलि भी अर्पित किया।